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Etawah News: मौसम साफ होने से राहत, खाद-दवा छिड़काव में जुटे
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फोटो 01:: निवाड़ीकला में गेहूं की खेत में खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करता किसान। संवाद
- लगातार तीसरे दिन धूप निकलने से फसलों में खरपतवार नाशक के साथ खाद डालने में जुटे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। पिछले लगभग 15 दिनों से मौसम के मिजाज में आए अप्रत्याशित परिवर्तन के बाद अब स्थिति सामान्य होने लगी है। लगातार तीसरे दिन रविवार को दिन में अच्छी धूप खिली रही, जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है।
तीन दिन पहले तक घने कोहरे और धूप के अभाव में खेती-बाड़ी से जुड़ी गतिविधियां पूरी तरह ठप पड़ गई थीं। रविवार को मौसम खुलने के बाद किसान सुबह से ही खेतों की ओर रुख कर गए। गेहूं की फसल में उर्वरक और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया गया है, जिससे फसल की बढ़वार सुनिश्चित हो सके।
कोहरे और गलन भरी ठंड ने जहां गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद साबित हो रही थी, वहीं दूसरी ओर सरसों, चना, मटर और अरहर जैसी फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ने लगा था। इससे किसान काफी चिंतित थे।
मौसम की खराबी के कारण कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को उर्वरक या कीटनाशक दवाओं का छिड़काव स्थगित रखने की सलाह दे रहे थे। पिछले शुक्रवार को दोपहर बाद मौसम में कुछ सुधार हुआ और शनिवार को भी दोपहर के आसपास धूप निकली। रविवार को सुबह से ही मौसम खुशनुमा होने के कारण किसान उत्साहित दिखे।
किसानों ने मौसम खुलने का पूरा लाभ उठाते हुए सुबह से ही खेतों में काम शुरू कर दिया। गेहूं की फसल में जरूरत के अनुसार यूरिया का छिड़काव किया गया। इसके साथ ही, खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव भी शुरू कर दिया गया है। किसान अरुण कुमार ने बताया कि मौसम खराब होने के कारण वे गेहूं की फसल में खाद और कीटनाशक का छिड़काव नहीं कर पा रहे थे, जिससे गेहूं की पौध की बढ़वार प्रभावित हो रही थी। अब मौसम साफ होने के बाद छिड़काव कार्य शुरू हो गया है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले तीन दिनों से मौसम का रुख बदला है और अच्छी धूप निकलने से खेती-बाड़ी के कार्य फिर से शुरू हो गए हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम के अनुसार ही दवाओं का छिड़काव करें। यदि पुनः कोहरा गिरने लगे तो कीटनाशक दवाओं का छिड़काव स्थगित करना ही हितकर होगा। डॉ. कुमार ने यह भी बताया कि खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के बाद धूप निकलना फसल के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है, क्योंकि यह दवाओं के असर को बढ़ाने में मदद करता है। इस प्रकार, बदलते मौसम के साथ ही किसानों ने अपनी कृषि गतिविधियों को फिर से गति दी है, जिससे रबी की फसलों को बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। पिछले लगभग 15 दिनों से मौसम के मिजाज में आए अप्रत्याशित परिवर्तन के बाद अब स्थिति सामान्य होने लगी है। लगातार तीसरे दिन रविवार को दिन में अच्छी धूप खिली रही, जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है।
तीन दिन पहले तक घने कोहरे और धूप के अभाव में खेती-बाड़ी से जुड़ी गतिविधियां पूरी तरह ठप पड़ गई थीं। रविवार को मौसम खुलने के बाद किसान सुबह से ही खेतों की ओर रुख कर गए। गेहूं की फसल में उर्वरक और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया गया है, जिससे फसल की बढ़वार सुनिश्चित हो सके।
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कोहरे और गलन भरी ठंड ने जहां गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद साबित हो रही थी, वहीं दूसरी ओर सरसों, चना, मटर और अरहर जैसी फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ने लगा था। इससे किसान काफी चिंतित थे।
मौसम की खराबी के कारण कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को उर्वरक या कीटनाशक दवाओं का छिड़काव स्थगित रखने की सलाह दे रहे थे। पिछले शुक्रवार को दोपहर बाद मौसम में कुछ सुधार हुआ और शनिवार को भी दोपहर के आसपास धूप निकली। रविवार को सुबह से ही मौसम खुशनुमा होने के कारण किसान उत्साहित दिखे।
किसानों ने मौसम खुलने का पूरा लाभ उठाते हुए सुबह से ही खेतों में काम शुरू कर दिया। गेहूं की फसल में जरूरत के अनुसार यूरिया का छिड़काव किया गया। इसके साथ ही, खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव भी शुरू कर दिया गया है। किसान अरुण कुमार ने बताया कि मौसम खराब होने के कारण वे गेहूं की फसल में खाद और कीटनाशक का छिड़काव नहीं कर पा रहे थे, जिससे गेहूं की पौध की बढ़वार प्रभावित हो रही थी। अब मौसम साफ होने के बाद छिड़काव कार्य शुरू हो गया है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले तीन दिनों से मौसम का रुख बदला है और अच्छी धूप निकलने से खेती-बाड़ी के कार्य फिर से शुरू हो गए हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम के अनुसार ही दवाओं का छिड़काव करें। यदि पुनः कोहरा गिरने लगे तो कीटनाशक दवाओं का छिड़काव स्थगित करना ही हितकर होगा। डॉ. कुमार ने यह भी बताया कि खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के बाद धूप निकलना फसल के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है, क्योंकि यह दवाओं के असर को बढ़ाने में मदद करता है। इस प्रकार, बदलते मौसम के साथ ही किसानों ने अपनी कृषि गतिविधियों को फिर से गति दी है, जिससे रबी की फसलों को बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद है।