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Etawah News: मृतक और अस्पताल में भर्ती मरीज पर मारपीट का आरोप
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परेशान करने के उद्देश्य से दायर किए गए परिवाद को कोर्ट ने किया खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कोर्ट ने विरोधियों को परेशान करने के उद्देश्य से दायर किए गए परिवाद को निराधार और संदेहास्पद मानते हुए खारिज कर दिया।
ग्राम सुंदरपुर निवासी ओमप्रकाश ने आरोप लगाया था कि 12 नवंबर 2025 को अरुण कुमार मिश्रा, श्यामकिशोर, विवेक, राजीव व अन्य लोगों ने उसकी जमीन पर कब्जे का प्रयास करते हुए जातिसूचक शब्द कहे, मारपीट की और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने परिवाद की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जांच में पता चला कि आरोपी विवेक दुबे की मृत्यु 13 मार्च 2019 को ही हो चुकी थी जबकि दूसरे आरोपी राजीव कुमार घटना के समय नागपुर के अस्पताल में गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे थे।
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परिवादी और उसके गवाह के बयानों में भी कई विरोधाभास पाए गए। स्वतंत्र गवाह के रूप में पेश किया गया व्यक्ति परिवादी का सगा भाई निकला और कथित चोटों के संबंध में कोई चिकित्सीय प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सरकारी खूंटी स्वयं परिवादी ने उखाड़ी थी। अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून का उपयोग किसी को तंग या दबाव में लाने के लिए नहीं किया जा सकता और पर्याप्त आधार न मिलने पर परिवाद निरस्त कर दिया। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कोर्ट ने विरोधियों को परेशान करने के उद्देश्य से दायर किए गए परिवाद को निराधार और संदेहास्पद मानते हुए खारिज कर दिया।
ग्राम सुंदरपुर निवासी ओमप्रकाश ने आरोप लगाया था कि 12 नवंबर 2025 को अरुण कुमार मिश्रा, श्यामकिशोर, विवेक, राजीव व अन्य लोगों ने उसकी जमीन पर कब्जे का प्रयास करते हुए जातिसूचक शब्द कहे, मारपीट की और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
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सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने परिवाद की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जांच में पता चला कि आरोपी विवेक दुबे की मृत्यु 13 मार्च 2019 को ही हो चुकी थी जबकि दूसरे आरोपी राजीव कुमार घटना के समय नागपुर के अस्पताल में गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे थे।
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परिवादी और उसके गवाह के बयानों में भी कई विरोधाभास पाए गए। स्वतंत्र गवाह के रूप में पेश किया गया व्यक्ति परिवादी का सगा भाई निकला और कथित चोटों के संबंध में कोई चिकित्सीय प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सरकारी खूंटी स्वयं परिवादी ने उखाड़ी थी। अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून का उपयोग किसी को तंग या दबाव में लाने के लिए नहीं किया जा सकता और पर्याप्त आधार न मिलने पर परिवाद निरस्त कर दिया। संवाद