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Etawah News: पालिकाध्यक्ष के अधिकार समाप्त करने व आश्रित को भुगतान कराने के आदेश
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इटावा। राज्य मानवाधिकार आयोग ने नगर पालिका परिषद के लिपिक की आत्महत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पालिकाध्यक्ष के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार समाप्त करने का आदेश दिया है। यह आदेश मृतक आश्रित की नियुक्ति और बकाया देयकों के भुगतान में लापरवाही के कारण है।
जून में वरिष्ठ लिपिक राजीव यादव ने पालिका अध्यक्ष और ईओ पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर जान दे दी थी। इस मामले में राजीव यादव पर फर्जी तरीके से नौकरी करने का आरोप लगा था। इस मामले को लेकर राजीव यादव के बेटे सिद्धार्थ यादव मानवाधिकार आयोग गए थे। आयोग में बेटे ने बताया था कि उनके पिता की मृत्यु के बाद न तो कोई भुगतान किया गया और न ही आश्रित में नौकरी दी गई है।
इस पर आयोग ने सिटी मजिस्ट्रेट की जांच के आधार पर नौकरी को सही बताया था और सात दिन में उनके बकाया देयकों का भुगतान करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद राजीव यादव के भुगतान नहीं हुए। इस पर सात अप्रैल को उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने निर्देशों का अनुपालन न होने पर जिलाधिकारी को पालिकाध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार समाप्त करने का निर्देश दिए हैं।
आयोग ने राजीव यादव के पुत्र को मृतक आश्रित के रूप में नियुक्त कराने के निर्देश दिए। उनके सभी बकाया देयकों का भुगतान सुनिश्चित कराएं। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने बताया कि इस मामले में शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। शासन का आदेश मिलने पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
- यह है मामला
दिवंगत राजीव यादव नगर पालिका परिषद में वरिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी नीतू यादव ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार को कोई सहायता नहीं मिली। पुत्र को नौकरी भी नहीं दी गई। नीतू यादव ने आरोप लगाया कि पालिका प्रशासन जानबूझकर इस मामले को लटका रहा था।
-आयोग को जल्द सौंपी जाए रिपोर्ट
आयोग ने पाया कि पूर्व निर्देशों के बावजूद पालिका प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। आयोग ने जिलाधिकारी को दिए गए आदेश में यह भी कहा है। इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट जल्द से जल्द आयोग को सौंपी जाए। यह आदेश लापरवाही के प्रति आयोग के सख्त रवैये को दर्शाता है।
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जून में वरिष्ठ लिपिक राजीव यादव ने पालिका अध्यक्ष और ईओ पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर जान दे दी थी। इस मामले में राजीव यादव पर फर्जी तरीके से नौकरी करने का आरोप लगा था। इस मामले को लेकर राजीव यादव के बेटे सिद्धार्थ यादव मानवाधिकार आयोग गए थे। आयोग में बेटे ने बताया था कि उनके पिता की मृत्यु के बाद न तो कोई भुगतान किया गया और न ही आश्रित में नौकरी दी गई है।
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इस पर आयोग ने सिटी मजिस्ट्रेट की जांच के आधार पर नौकरी को सही बताया था और सात दिन में उनके बकाया देयकों का भुगतान करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद राजीव यादव के भुगतान नहीं हुए। इस पर सात अप्रैल को उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने निर्देशों का अनुपालन न होने पर जिलाधिकारी को पालिकाध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार समाप्त करने का निर्देश दिए हैं।
आयोग ने राजीव यादव के पुत्र को मृतक आश्रित के रूप में नियुक्त कराने के निर्देश दिए। उनके सभी बकाया देयकों का भुगतान सुनिश्चित कराएं। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने बताया कि इस मामले में शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। शासन का आदेश मिलने पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
- यह है मामला
दिवंगत राजीव यादव नगर पालिका परिषद में वरिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी नीतू यादव ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार को कोई सहायता नहीं मिली। पुत्र को नौकरी भी नहीं दी गई। नीतू यादव ने आरोप लगाया कि पालिका प्रशासन जानबूझकर इस मामले को लटका रहा था।
-आयोग को जल्द सौंपी जाए रिपोर्ट
आयोग ने पाया कि पूर्व निर्देशों के बावजूद पालिका प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। आयोग ने जिलाधिकारी को दिए गए आदेश में यह भी कहा है। इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट जल्द से जल्द आयोग को सौंपी जाए। यह आदेश लापरवाही के प्रति आयोग के सख्त रवैये को दर्शाता है।