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Etawah News: डेढ़ घंटे दर्द से तड़पी महिला, पति ने खींचा स्ट्रेचर, ड्रिप की बोतल लेकर दौड़ा बेटा
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इटावा। जिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को इलाज के लिए पहुंची घायल महिला को न तो स्ट्रेचर पकड़ने के लिए वार्ड बॉय मिला न ही समय से एक्सरे की सुविधा। पति स्ट्रेचर खींचते हुए और बेटा ड्रिप की बोतल हाथ में लेकर दौड़ते हुए नजर आया। करीब डेढ़ घंटे तक महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी कर्मचारी का दिल नहीं पसीजा। इस घटना से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत सामने आ गई। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन वार्ड बॉय की कमी होने का रोना रो रहा है।
मैनपुरी के करहल निवासी सुनील कुमार बाइक पर अपनी पत्नी रेनू (48) के साथ बृहस्पतिवार की सुबह लखना के कालिका मंदिर में दर्शन करने आ रहे थे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे लखना मोड़ पर सामने से आ रही बाइक से सुनील की बाइक की टक्कर हो गई। इसमें रेनू बाइक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। सुनील ने अपनी पत्नी को 50 शैया अस्पताल में भर्ती कराया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद रेनू को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रेनूू को लेकर सुनील 11 बजे तक जिला अस्पताल पहुंच गए।
हादसे की जानकारी मिलने पर सुनील का बेटा सुमित भी जिला अस्पताल पहुंच गया। यहां ईएमओ डॉ. श्याम मोहन ने जांच के बाद रेनू के सिर में चोट लगे होने की वजह से एक्सरे करवाने की सलाह दी। सुमित ने बताया कि मां के पैर व सिर में चोट लगे होने से वह चलने-फिरने में असमर्थ थीं। साथ ही उनके ड्रिप लगी थी। इसके बाद भी जिला अस्पताल में उन्हें वार्ड बॉय उपलब्ध नहीं कराया गया। मां दर्द से तड़प रही थी, लेकिन वहां कोई सुनने वाला नहीं था। सुनील ने स्ट्रेचर खींचा और सुमित ने ड्रिप की बोतल हाथ में ली और किसी तरह एक्सरे रूम तक पहुंचे। सुमित ने एक्सरे कर्मियों से दर्द से कराह रही घायल मां का एक्सरे पहले करने को कहा तो कर्मचारियों ने क्रम से एक्सरे करने की बात कह दी। डेढ़ घंटे तक उनका एक्सरे नहीं हुआ था। इस वजह से रेनू दर्द से तड़पती रहीं। एक्सरे कराने के बाद रेनू को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुरुष जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पारितोष शुक्ला ने बताया कि वार्ड बॉय के 30 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में आठ वार्ड बॉय की तैनाती है। पिछले कई साल में वार्ड बॉय रिटायर्ड हो चुके हैं और कई की मौत हो चुकी है।वार्ड बॉय की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। नई भर्ती न होने पर वार्ड बॉय को संविदा पर रखा जाना है। उसकी पत्रावली अभी लंबित है।
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वर्जन-- -
जिला अस्पताल में वार्ड बॉय की काफी कमी है। वार्ड बॉय लगातार रिटायर्ड हो रहे हैं, लेकिन नई भर्ती नहीं हो रही है। हर मरीज को वार्ड बॉय नहीं नहीं मिल सकता है। गंभीर रोगियों की वार्ड बॉय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अगर लापरवाही हुई तो जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल
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मैनपुरी के करहल निवासी सुनील कुमार बाइक पर अपनी पत्नी रेनू (48) के साथ बृहस्पतिवार की सुबह लखना के कालिका मंदिर में दर्शन करने आ रहे थे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे लखना मोड़ पर सामने से आ रही बाइक से सुनील की बाइक की टक्कर हो गई। इसमें रेनू बाइक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। सुनील ने अपनी पत्नी को 50 शैया अस्पताल में भर्ती कराया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद रेनू को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रेनूू को लेकर सुनील 11 बजे तक जिला अस्पताल पहुंच गए।
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हादसे की जानकारी मिलने पर सुनील का बेटा सुमित भी जिला अस्पताल पहुंच गया। यहां ईएमओ डॉ. श्याम मोहन ने जांच के बाद रेनू के सिर में चोट लगे होने की वजह से एक्सरे करवाने की सलाह दी। सुमित ने बताया कि मां के पैर व सिर में चोट लगे होने से वह चलने-फिरने में असमर्थ थीं। साथ ही उनके ड्रिप लगी थी। इसके बाद भी जिला अस्पताल में उन्हें वार्ड बॉय उपलब्ध नहीं कराया गया। मां दर्द से तड़प रही थी, लेकिन वहां कोई सुनने वाला नहीं था। सुनील ने स्ट्रेचर खींचा और सुमित ने ड्रिप की बोतल हाथ में ली और किसी तरह एक्सरे रूम तक पहुंचे। सुमित ने एक्सरे कर्मियों से दर्द से कराह रही घायल मां का एक्सरे पहले करने को कहा तो कर्मचारियों ने क्रम से एक्सरे करने की बात कह दी। डेढ़ घंटे तक उनका एक्सरे नहीं हुआ था। इस वजह से रेनू दर्द से तड़पती रहीं। एक्सरे कराने के बाद रेनू को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुरुष जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पारितोष शुक्ला ने बताया कि वार्ड बॉय के 30 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में आठ वार्ड बॉय की तैनाती है। पिछले कई साल में वार्ड बॉय रिटायर्ड हो चुके हैं और कई की मौत हो चुकी है।वार्ड बॉय की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। नई भर्ती न होने पर वार्ड बॉय को संविदा पर रखा जाना है। उसकी पत्रावली अभी लंबित है।
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जिला अस्पताल में वार्ड बॉय की काफी कमी है। वार्ड बॉय लगातार रिटायर्ड हो रहे हैं, लेकिन नई भर्ती नहीं हो रही है। हर मरीज को वार्ड बॉय नहीं नहीं मिल सकता है। गंभीर रोगियों की वार्ड बॉय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अगर लापरवाही हुई तो जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल