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Farrukhabad News: ब्लड बैंक में मोबाइल की रोशनी में निकाला रक्त
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फोटो-26 लोहिया अस्पताल की ब्लड बैंक में मोबाइल की रोशनी में कागजी कार्रवाई करते कर्मचारी। संवाद
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फर्रुखाबाद। रात भर बिजली ट्रिपिंग और गुल होने से अस्पताल में मरीजों के लिए आफत रही। डीजल बचाने के चक्कर में जेनरेटर चलाने में भी खानापूर्ति की गई। इसी का नतीजा रहा कि ब्लड बैंक में मोबाइल की रोशनी में रक्त निकालना पड़ा। दफ्तर की कई-कई घंटे बिजली गुल होने से जरूरी कामकाज भी अंधेरे में निपटाना प़ड़ा। सीटी स्केन, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड यूनिटों में भी काम न होने से मरीज बैरंग लौट गए। वार्डों में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल रहे। हाथ के पंखों के सहारे जागकर रात भी गुजारनी पड़ी। जिम्मेदारों ने समस्या समाधान का कोई ठोस उपाय नहीं किया।
बढ़ते तापमान में बिजली गायब होना बड़़ी समस्या बन गई है। रविवार रात से शुरू हुई ट्रिपिंग के बाद आधीरात को बिजली गुल हो गई। इसके बाद सोमवार दोपहर एक बजे तक एक-डेढ़ घंटे ही आपूर्ति मिल सकी। सुबह ओपीडी में मरीजों का पहुंचना शुरू हुआ, तो बिजली न होने से दिक्कतें खड़ी हो गईं। ब्लड बैंक में अंधेरा घुप होने के दौरान इमरजेंसी में रक्त लेने पहुंचे मरीजों के तीमारदारों की कागजी कार्रवाई से लेकर रक्त निकालने का काम मोबाइल की रोशनी में करना पड़ा। इमरजेंसी से लेकर ऊपर वार्डों में इन्वर्टर से रोशनी तो रही, मगर पंखे न चलने से तीमारदार मरीजों के ऊपर हाथ के पंखे से हवा करते दिखे। दोपहर एक बजे के बाद बिजली आपूर्ति होने पर राहत मिली। हालांकि कम वोल्टेज की समस्या से देर रात तक निजात नहीं मिल सका। लोहिया जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने कहा कि बिजली की ट्रिपिंग खत्म नहीं हो रही। लोड अधिक और जनरेटर छोटा होने से दिक्कत है। 125 केवी के जनरेटर के लिए लिखेंगे। कोशिश है कि आवश्यक यूनिटों में बिजली की दिक्कत न आए।
अल्ट्रासाउंड कराने आए 30 मरीज लौटे
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की सुबह से ही लाइन लगी रही। पर्ची जमा करने के बावजूद बिजली के अभाव में मात्र 15 मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड हो सके। दोपहर दो बजे तक इंतजार करने के बाद करीब 30 मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड के ही घर लौटना पड़ा। इससे उन्हें दवाएं तक नहीं मिल सकी। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक तिवारी ने बताया कि चंद देर ही बिजली आई। जनरेटर ने भी काम नहीं किया। इसीलिए 15 अल्ट्रासाउंड ही हो सके। समझाकर मरीजों को वापस किया गया।
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अलग जेनरेटर, डीजल खर्च भी मिलता, नहीं मिली सुविधा
अस्पताल की डिजिटल एक्सरे यूनिट का अलग जेनरेटर है। उसका अलग से डीजल भी कंपनी की ओर से मिलता है। इसके बावजूद एक्सरे यूनिट को उसके जनरेटर की बिजली नसीब नहीं होती। गनीमत रही कि ओपीडी में एक भी आर्थो सर्जन नहीं था। फिर भी पिछले दिनों के लंबित एक्सरे कराने वाले मरीजों की भीड़ रही। चार मेडिकोलीगल एक्सरे नहीं हो सके।
अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन की बात
अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन पवन तिवारी ने बताया कि 800 केवी का लोड है। अस्पताल में सात जनरेटर हैं। इसमें 62.5 केवी का अस्पताल के लिए। एक्सरे यूनिट और ऑक्सीजन प्लांट का 125-125 केवी का जनरेटर लगा है। एक जनरेटर सीटी स्केन यूनिट का है। इसके अलावा दो महिला अस्पताल और एक नया जनरेटर ट्रामा सेंटर के लिए आया है। अस्पताल का जनरेटर लोड नहीं उठाता। लिहाजा ऑक्सीजन व एक्सरे यूनिट के जनरेटर से काम चलाते हैं। वह भी गर्म हो जाते हैं। मजबूरन बंद करना पड़ता है।
बढ़ते तापमान में बिजली गायब होना बड़़ी समस्या बन गई है। रविवार रात से शुरू हुई ट्रिपिंग के बाद आधीरात को बिजली गुल हो गई। इसके बाद सोमवार दोपहर एक बजे तक एक-डेढ़ घंटे ही आपूर्ति मिल सकी। सुबह ओपीडी में मरीजों का पहुंचना शुरू हुआ, तो बिजली न होने से दिक्कतें खड़ी हो गईं। ब्लड बैंक में अंधेरा घुप होने के दौरान इमरजेंसी में रक्त लेने पहुंचे मरीजों के तीमारदारों की कागजी कार्रवाई से लेकर रक्त निकालने का काम मोबाइल की रोशनी में करना पड़ा। इमरजेंसी से लेकर ऊपर वार्डों में इन्वर्टर से रोशनी तो रही, मगर पंखे न चलने से तीमारदार मरीजों के ऊपर हाथ के पंखे से हवा करते दिखे। दोपहर एक बजे के बाद बिजली आपूर्ति होने पर राहत मिली। हालांकि कम वोल्टेज की समस्या से देर रात तक निजात नहीं मिल सका। लोहिया जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने कहा कि बिजली की ट्रिपिंग खत्म नहीं हो रही। लोड अधिक और जनरेटर छोटा होने से दिक्कत है। 125 केवी के जनरेटर के लिए लिखेंगे। कोशिश है कि आवश्यक यूनिटों में बिजली की दिक्कत न आए।
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अल्ट्रासाउंड कराने आए 30 मरीज लौटे
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की सुबह से ही लाइन लगी रही। पर्ची जमा करने के बावजूद बिजली के अभाव में मात्र 15 मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड हो सके। दोपहर दो बजे तक इंतजार करने के बाद करीब 30 मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड के ही घर लौटना पड़ा। इससे उन्हें दवाएं तक नहीं मिल सकी। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक तिवारी ने बताया कि चंद देर ही बिजली आई। जनरेटर ने भी काम नहीं किया। इसीलिए 15 अल्ट्रासाउंड ही हो सके। समझाकर मरीजों को वापस किया गया।
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अलग जेनरेटर, डीजल खर्च भी मिलता, नहीं मिली सुविधा
अस्पताल की डिजिटल एक्सरे यूनिट का अलग जेनरेटर है। उसका अलग से डीजल भी कंपनी की ओर से मिलता है। इसके बावजूद एक्सरे यूनिट को उसके जनरेटर की बिजली नसीब नहीं होती। गनीमत रही कि ओपीडी में एक भी आर्थो सर्जन नहीं था। फिर भी पिछले दिनों के लंबित एक्सरे कराने वाले मरीजों की भीड़ रही। चार मेडिकोलीगल एक्सरे नहीं हो सके।
अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन की बात
अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन पवन तिवारी ने बताया कि 800 केवी का लोड है। अस्पताल में सात जनरेटर हैं। इसमें 62.5 केवी का अस्पताल के लिए। एक्सरे यूनिट और ऑक्सीजन प्लांट का 125-125 केवी का जनरेटर लगा है। एक जनरेटर सीटी स्केन यूनिट का है। इसके अलावा दो महिला अस्पताल और एक नया जनरेटर ट्रामा सेंटर के लिए आया है। अस्पताल का जनरेटर लोड नहीं उठाता। लिहाजा ऑक्सीजन व एक्सरे यूनिट के जनरेटर से काम चलाते हैं। वह भी गर्म हो जाते हैं। मजबूरन बंद करना पड़ता है।

फोटो-26 लोहिया अस्पताल की ब्लड बैंक में मोबाइल की रोशनी में कागजी कार्रवाई करते कर्मचारी। संवाद

फोटो-26 लोहिया अस्पताल की ब्लड बैंक में मोबाइल की रोशनी में कागजी कार्रवाई करते कर्मचारी। संवाद