सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Fearing the burden of storage, farmers are gathering potatoes in their orchards.

Farrukhabad News: भंडारण के बोझ से डरे किसान बागों में इकट्ठा कर रहे आलू

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:30 AM IST
विज्ञापन
Fearing the burden of storage, farmers are gathering potatoes in their orchards.
फोटो-20 गांव प्रहलादपुर में बाग में लगे आलू के ढेर। संवाद - फोटो : 1
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। मंदी की दोहरी मार झेल चुके किसान अब शीतगृहों में आलू का भंडारण करने से कतरा रहे हैं। बाजार में भाव की मंदी से किसान आलू बेचना भी नहीं चाहते और शीतगृहों में भंडारण व बारदाना पर होने वाले खर्च से भी घबरा रहे हैं। इससे कई किसान बागों में आलू का ढेर लगाकर भाव बढ़ने की उम्मीद लगाए हैं। गांव प्रहलादपुर में तो एक बाग में 50 से अधिक किसानों के आलू के ढेर लगे हैं।
Trending Videos

जनपद में किसान प्रमुख रूप से आलू की खेती करते हैं। करीब 43 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में आलू की फसल की जाती है। जिले में 111 शीतगृह संचालित हैं। इनमें करीब 10.30 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारण की क्षमता है। गत वर्ष शीतगृहों में भंडारित आलू का किसानों को भाव बेहद कम मिलने से किसान बर्बाद हो गए। नई फसल भी मंदी की भेंट चढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मंदी की दोहरी मार झेल चुके किसान इस बार शीतगृहों में आलू भंडारण करने से भी कतरा रहे हैं। हालांकि बीज और ज्यादा दिनों तक आलू को खराब होने से रोकने के लिए किसान व व्यापारियों ने शीतगृहों में आलू का भंडारण किया है लेकिन कुछ दिनों बाद भाव बढ़ने की उम्मीद लगाए किसानों ने खेतों से आलू खोदने के बाद खेत में और बागों ढेर लगा दिए हैं। इससे भाव बढ़ने पर वह अपना आलू मंडी में बेच सकें और भंडारण शुल्क व बारदाना के खर्च के बोझ से भी बच सकें। इन दिनों खेत व बागों में किसानों ने आलू के बड़े-बड़े ढेर लगा रखे हैं।
कम भाव मिलने से किसान मंडी में नहीं ले जा रहे आलू
शमसाबाद। क्षेत्र के गांव प्रहलादपुर, संतोषपुर सहित आसपास के कई गांवों के किसान इन दिनों खेतों से आलू खोदने के बाद बाजार नहीं ले जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि मंडी में आलू का भाव इतना कम है कि लागत भी नहीं निकल पा रही है। बाग में ही आलू के ढेर लगाकर उसे पुआल से ढककर धूप से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। गांव प्रहलादपुर से कुछ दूरी पर स्थित करीब 15 बीघा के एक बाग में 50 से अधिक किसानों ने जगह-जगह आलू ढेर लगा दिए हैं। इससे पूरे बाग में आलू के ढेर ही नजर आ रहे हैं। किसान रामनिवास ने करीब 8 बीघा खेत का आलू बाग में ढेर लगाकर रखा है। वहीं रामभजन, ऋषिपाल, रामप्रकाश, हरवेंद्र सिंह, पप्पू, सियाराम और पंकज राजपूत सहित 50 से अधिक किसानों ने भी बाग में आलू के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगाए हैं। किसानों का कहना है कि यदि आलू का भाव न बढ़ा तो किसान बर्बाद हो जाएगा। फिलहाल बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में आलू रोका है।
आलू बेचने से लागत भी नहीं निकल रही
फोटो-21 नरेंद्र राजपूत।
गांव प्रहलादपुर निवासी नरेंद्र राजपूत ने बताया अभी आलू बेचने से लागत भी नहीं निकल रही है। शीतगृह में भंडारण करने पर 200 रुपये पैकेट और खर्च बढ़ेगा। इसलिए बाग में आलू का ढेर लगा दिया है। भाव सही मिलने पर बेच देंगे।
भाव बढ़ने की उम्मीद में लगाया ढेर
फोटो-22 विकास राजपूत।
गांव प्रहलादपुर निवासी किसान विकास राजपूत ने बताया एक बीघा आलू की फसल में 10 हजार रुपये की लागत आती है। इन दिनों बेचने पर 8000 रुपये बीघा के हिसाब से ही दाम मिलेंगे। इससे घाटा हो रहा है। भाव बढ़ने की उम्मीद में बाग में ही आलू का ढेर लगा दिया है।


छाया में लगाएं आलू, ढेर ऊंचा न करें

फसल सुरक्षा कृषि वैज्ञानिक अभिमन्यु यादव ने बताया कि किसान खेत या बाग में आलू का ऊंचा ढेर न लगाएं। छांव में लगे आलू के ढेर को भी पुआल से ढक दें और अधिक दिन तक न रोकें। तापमान बढ़ने पर ढेर में लगे आलू में नुकसान हो सकता है। इससे जल्द ही बेचने का भी प्रयास करें।

फोटो-20 गांव प्रहलादपुर में बाग में लगे आलू के ढेर। संवाद

फोटो-20 गांव प्रहलादपुर में बाग में लगे आलू के ढेर। संवाद- फोटो : 1

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed