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Farrukhabad News: पांचाल घाट पुल के बीच धंस गया जोड़, बढ़ा खतरा
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फोटो-9 पांचाल घाट गंगा पुल पर धंसी सड़क के बीच से गुजरते वाहन। संवाद
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फर्रुखाबाद। इटावा-बरेली हाईवे पर गंगा नदी के ऊपर बने पांचाल घाट पुल के बीचोबीच जोड़ धंस जाने से सड़क का हिस्सा नीचे बैठ गया है। अब यहां से गुजरना खतरनाक हो गया है। प्रतिदिन 15 हजार से अधिक वाहन और राहगीर जान जोखिम में डालकर इस पुल से गुजरते हैं।
वर्ष 1971 में लोक निर्माण विभाग ने 750 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया था। यह पुल फर्रुखाबाद को बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं जिलों से जोड़ता है। मार्च 2025 में लगभग एक माह तक पुल को बंद कर मरम्मत कराई गई थी। यातायात वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया गया और करीब 50 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके बाद 31 मार्च को पुल दोबारा चालू कर दिया गया लेकिन महज तीन माह में ही जोड़ फिर खुल गए। इसके बाद दोबारा रूट डायवर्ट कर पुल की मरम्मत का काम हुआ।
कुछ दिन पहले पुल के बीचोंबीच लोहे का पटला हटने से बड़ा गड्ढा बन गया था। उसकी मरम्मत की गई। अब दोबारा गर्डर और जोड़ धंसने से आधी सड़क प्रभावित हो गई है। रात के समय जब तेज रफ्तार वाहन अंधेरे में पुल पार करते हैं तो स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। राहगीरों का कहना है कि पुल की लगातार मरम्मत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
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एनएचएआई के साइट इंजीनियर विश्वास मिश्रा ने बताया कि तकनीकी टीम को मौके पर लगाया गया है। एक-दो दिनों में जोड़ों की पुख्ता मरम्मत कर यातायात पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा।
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एक माह की बंदी भी नहीं दिला सकी राहत
मार्च 2025 में पुल को करीब एक माह तक बंद रखकर मरम्मत कराई गई थी। जोड़ भरने और सड़क को मजबूत बनाने के लिए कंक्रीट डाली गई लेकिन भारी यातायात के दबाव से मरम्मत टिक नहीं सकी। तीन माह के भीतर ही पुल की सतह फिर उखड़ने लगी और जोड़ खुल गए।
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सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम
पांचाल घाट पुल केवल फर्रुखाबाद ही नहीं, बल्कि कई जनपदों की यातायात व्यवस्था की धुरी है। प्रतिदिन करीब 15 हजार बड़े और छोटे वाहन यहां से गुजरते हैं। नेपाल और चीन की सीमा तक सेना की आवाजाही के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पुल की खराब हालत न सिर्फ आम लोगों बल्कि सामरिक दृष्टि से भी चिंता का विषय है।
वर्ष 1971 में लोक निर्माण विभाग ने 750 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया था। यह पुल फर्रुखाबाद को बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं जिलों से जोड़ता है। मार्च 2025 में लगभग एक माह तक पुल को बंद कर मरम्मत कराई गई थी। यातायात वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया गया और करीब 50 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके बाद 31 मार्च को पुल दोबारा चालू कर दिया गया लेकिन महज तीन माह में ही जोड़ फिर खुल गए। इसके बाद दोबारा रूट डायवर्ट कर पुल की मरम्मत का काम हुआ।
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कुछ दिन पहले पुल के बीचोंबीच लोहे का पटला हटने से बड़ा गड्ढा बन गया था। उसकी मरम्मत की गई। अब दोबारा गर्डर और जोड़ धंसने से आधी सड़क प्रभावित हो गई है। रात के समय जब तेज रफ्तार वाहन अंधेरे में पुल पार करते हैं तो स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। राहगीरों का कहना है कि पुल की लगातार मरम्मत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
एनएचएआई के साइट इंजीनियर विश्वास मिश्रा ने बताया कि तकनीकी टीम को मौके पर लगाया गया है। एक-दो दिनों में जोड़ों की पुख्ता मरम्मत कर यातायात पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा।
एक माह की बंदी भी नहीं दिला सकी राहत
मार्च 2025 में पुल को करीब एक माह तक बंद रखकर मरम्मत कराई गई थी। जोड़ भरने और सड़क को मजबूत बनाने के लिए कंक्रीट डाली गई लेकिन भारी यातायात के दबाव से मरम्मत टिक नहीं सकी। तीन माह के भीतर ही पुल की सतह फिर उखड़ने लगी और जोड़ खुल गए।
सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम
पांचाल घाट पुल केवल फर्रुखाबाद ही नहीं, बल्कि कई जनपदों की यातायात व्यवस्था की धुरी है। प्रतिदिन करीब 15 हजार बड़े और छोटे वाहन यहां से गुजरते हैं। नेपाल और चीन की सीमा तक सेना की आवाजाही के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पुल की खराब हालत न सिर्फ आम लोगों बल्कि सामरिक दृष्टि से भी चिंता का विषय है।