फर्रुखाबाद। राजेपुर के गांव खरगपुर में चल रही भागवत कथा में नैमिषारण्य से आए आचार्य पंकज महारथी ने कहा कि सच्ची मित्रता के बीच स्वार्थ नहीं होता। यदि असली मित्रता का मोल सीखना है तो भगवान कृष्ण और सुदामा के चरित्र से सीखें।
गायत्री माता मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा में सोमवार को कथाव्यास ने रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि असली मित्रता के बीच छल और फरेब नहीं होता। कृष्ण और सुदामा की मित्रता से आज के युवा और बच्चों को सीख लेने की जरूरत है। भगवान श्रीकृष्ण राजा और उनके दरिद्र ब्राह्मण मित्र सुदामा की मित्रता अमर थी। सुदामा कृष्ण से निःस्वार्थ प्रेम और अटूट भक्ति करते थे। वहीं भगवान कृष्ण उन्हें अपना सच्चा मित्र मानते थे। उनका प्रेम बचपन में ही संदीपन आश्रम से हुआ था। कहा कि गरीब सुदामा जब कृष्ण के महल में पहुंचे, तो वहां के दृश्य मित्रता की अंतिम सीमा थी। उन्होंने आंसुओं से चरण धोने की कथा का मार्मिक वर्णन किया, तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा में परीक्षित रूपलाल मिश्रा व सुमन मिश्रा रहीं। कथा में नरेंद्र शुक्ला, प्रधान ज्ञानेंद्र शुक्ला, रुद्र शुक्ला, गगन शुक्ला, गौरव शुक्ला, प्रशांत दीक्षित आदि का सहयोग रहा।