फर्रुखाबाद। कथाव्यास पंकज महारथी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण मात्र से मानव जीवन से मुक्ति मिल जाती है। महर्षि शुकदेव से कथा सुनकर राजा परीक्षित ने भी मोक्ष की प्राप्ति कर ली थी। कहा कि जहां भी कथा का वाचन हो रहा हो, मानव को कुछ समय निकालकर अवश्य सुनना चाहिए।
राजेपुर के खरगपुर स्थित गायत्री माता मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा के समापन दिवस मंगलवार को नैमिषारण्य से आए कथाव्यास पंकज महारथी ने परीक्षित मोक्ष और बर्बरीक की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हो सकी थी। तक्षक नाग द्वारा डसे जाने के शाप के भय से परीक्षित ने सात दिन तक गंगा तट पर कथा सुनी। इसी के बाद उन्हें आत्म-साक्षात्कार हुआ और वह मृत्यु के भय से मुक्त और भगवत धाम को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा जीवन-मृत्यु से मुक्ति दिलाती है। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भागवत कथा का श्रवण करें। आरती के बाद कथा का विश्राम हुआ। रूपलाल मिश्रा, पत्नी सुमन मिश्रा के अलावा आयोजन में प्रधान ज्ञानेंद्र शुक्ला, नरेंद्र शुक्ला, भुवनेश्वर अग्निहोत्री, अरविंद मिश्रा, ब्रह्मप्रकाश दीक्षित, गोविंद शुक्ला, प्रशांत दीक्षित आदि का सहयोग रहा।