{"_id":"6a625e323ce116cb250a5f91","slug":"waterlogging-in-the-underpass-has-turned-three-neighborhoods-into-hell-for-six-years-farrukhabad-news-c-22-1-sknp1018-111157-2026-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: अंडरपास में जलभराव से छह साल से तीन मोहल्ले बने नरक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: अंडरपास में जलभराव से छह साल से तीन मोहल्ले बने नरक
विज्ञापन
फोटो-17 बढ़पुर बगिया की गली में भरे तालाब के पानी से निकलते बेटियां। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्रुखाबाद। छह साल पहले सातनपुर क्षेत्र के लोगों को अंडरपास से मिली सहूलियत बारिश के समय तीन मोहल्लों के लिए बदहाली बन गया। करीब 150 मकानों के चारों तरफ नरक सा हो गया। पालिका ने चंद गलियां ऊंची कर दीं, मगर गंदे पानी से निकलना उनकी भी मजबूरी है। गनीमत दो दिन से बारिश न हुई। फिर भी मुख्यमार्ग से अंडरपास की सड़क पानी व कीचड़ से लबालब है। बढ़पुर बगिया और मलिन बस्ती की सभी गलियाें में तालाब का सड़ांध वाला पानी भरा है। इससे लोग परेशान हैं।
बढ़पुर तालाब में बारिश के समय एकत्र होने वाला पानी कई दशकों से सातनपुर के बड़े तालाब में जाता था। लिहाजा आसपास जलभराव जैसे कोई हालात नहीं थे। छह साल पहले सातनपुर क्षेत्र के लोगों को शहर में आने-जाने के लिए अंडरपास का निर्माण किया गया। इसी दौरान बढ़पुर तालाब का पानी सातनपुर तालाब में जाने से रुक गया। दूसरी तरफ तालाब की सफाई न होने से गहराई बेहद कम हो गई। ऐसे में कुछ देर की बारिश होते ही ओवरफ्लो होकर विकासनगर आंशिक, बढ़पुर बगिया व मलिन बस्ती के करीब 150 मकान टापू बन जाते हैं।
मंगलवार से बारिश नहीं हुई। बृहस्पतिवार को बस्ती का जायजा लिया गया, तो कुछ महीने पहले ऊंची करके बनी करीब 100 मीटर सड़क को छोड़ सभी गलियां जलमग्न थीं। छात्र-छात्राएं, महिलाएं, पुरुष जरूरी कामकाज के लिए गंदे पानी से निकलने को मजबूर हैं। घरों में सड़ांध से रुकना मुश्किल है। जिम्मेदार पालिका ने पंपसेट लगाकर पानी निकासी की जरूरत नहीं समझी।
विज्ञापन
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि पालिका ने किसानन नगला के सामने बढ़पुर तालाब की तरफ पंपसंप लगाने की योजना बनाई थी। वहां तालाब में काम होना था। एक महिला ने मुकदमा कर दिया है। इससे वहां जल निकासी के लिए कोई काम नहीं हो पा रहा है। मुकदमा फाइनल होने पर जल निकासी की व्यवस्था कराई जाएगी।
ई-रिक्शे से मुख्यमार्ग तक पहुंचाते बच्चे
बगिया के सुमित कुमार ई-रिक्शा चलाते हैं। मूसलाधार बारिश होने पर ई-रिक्शा नहीं निकलता। फिलहाल बच्चों को स्कूल के समय वह बाहर तक मुख्यमार्ग पर छोड़ देते हैं। सात साल से इस समस्या से जूझ रहे हैं। सोचा न था कि नरक से हालात हो जाएंगे।
दो दिन से बारिश नहीं, फिर भी जलभराव
अजयपाल दरवाजे पर खड़े थे। गली में एक-एक फीट गंदा पानी भरा था। बताया कि वह बाहर नौकरी करते हैं। घर में छोटा भाई नन्हें और परिजन रहते हैं। हालत बदतर है। चारों तरफ की सड़ांध से कमरों में रुकना मुश्किल है। दो दिन से बारिश नहीं हुई, फिर भी एक-एक फीट पानी भरा है।
विज्ञापन
बढ़पुर तालाब में बारिश के समय एकत्र होने वाला पानी कई दशकों से सातनपुर के बड़े तालाब में जाता था। लिहाजा आसपास जलभराव जैसे कोई हालात नहीं थे। छह साल पहले सातनपुर क्षेत्र के लोगों को शहर में आने-जाने के लिए अंडरपास का निर्माण किया गया। इसी दौरान बढ़पुर तालाब का पानी सातनपुर तालाब में जाने से रुक गया। दूसरी तरफ तालाब की सफाई न होने से गहराई बेहद कम हो गई। ऐसे में कुछ देर की बारिश होते ही ओवरफ्लो होकर विकासनगर आंशिक, बढ़पुर बगिया व मलिन बस्ती के करीब 150 मकान टापू बन जाते हैं।
विज्ञापन
मंगलवार से बारिश नहीं हुई। बृहस्पतिवार को बस्ती का जायजा लिया गया, तो कुछ महीने पहले ऊंची करके बनी करीब 100 मीटर सड़क को छोड़ सभी गलियां जलमग्न थीं। छात्र-छात्राएं, महिलाएं, पुरुष जरूरी कामकाज के लिए गंदे पानी से निकलने को मजबूर हैं। घरों में सड़ांध से रुकना मुश्किल है। जिम्मेदार पालिका ने पंपसेट लगाकर पानी निकासी की जरूरत नहीं समझी।
विज्ञापन
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि पालिका ने किसानन नगला के सामने बढ़पुर तालाब की तरफ पंपसंप लगाने की योजना बनाई थी। वहां तालाब में काम होना था। एक महिला ने मुकदमा कर दिया है। इससे वहां जल निकासी के लिए कोई काम नहीं हो पा रहा है। मुकदमा फाइनल होने पर जल निकासी की व्यवस्था कराई जाएगी।
ई-रिक्शे से मुख्यमार्ग तक पहुंचाते बच्चे
बगिया के सुमित कुमार ई-रिक्शा चलाते हैं। मूसलाधार बारिश होने पर ई-रिक्शा नहीं निकलता। फिलहाल बच्चों को स्कूल के समय वह बाहर तक मुख्यमार्ग पर छोड़ देते हैं। सात साल से इस समस्या से जूझ रहे हैं। सोचा न था कि नरक से हालात हो जाएंगे।
दो दिन से बारिश नहीं, फिर भी जलभराव
अजयपाल दरवाजे पर खड़े थे। गली में एक-एक फीट गंदा पानी भरा था। बताया कि वह बाहर नौकरी करते हैं। घर में छोटा भाई नन्हें और परिजन रहते हैं। हालत बदतर है। चारों तरफ की सड़ांध से कमरों में रुकना मुश्किल है। दो दिन से बारिश नहीं हुई, फिर भी एक-एक फीट पानी भरा है।

फोटो-17 बढ़पुर बगिया की गली में भरे तालाब के पानी से निकलते बेटियां। संवाद