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Fatehpur News: कागजों में स्वच्छता, मुरारपुर में गंदे पानी के बीच रहने को मजबूर परिवार
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बकेवर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में साफ-सफाई, नाली निर्माण और जलनिकासी को लेकर किए जा रहे दावे मुरारपुर गांव में खोखले साबित हो रहे हैं। बिंदकी तहसील के देवमई ब्लॉक अंतर्गत बकेवर थाना क्षेत्र के इस गांव में एक परिवार महीनों से गंदे और बदबूदार पानी के बीच जीवन गुजारने को मजबूर है। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता लगातार बनी हुई है।
पीड़ित बबलू शर्मा उर्फ सोनू शर्मा पुत्र कालिका प्रसाद ने बताया कि उनके मकान के सामने से गुजरने वाली सरकारी नाली में आसपास के कई घरों का घरेलू और बरसाती पानी छोड़ा जाता है। नाली की ढलान और निकासी व्यवस्था सही न होने के कारण पानी जमा रहता है। इससे दुर्गंध फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि बच्चों और बुजुर्गों के बीमार पड़ने का खतरा बना हुआ है।
समस्या के समाधान के लिए पीड़ित ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी। डीएम रविंद्र सिंह को संपूर्ण समाधान दिवस में भी प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन अब तक न तो कोई स्थलीय जांच हुई और न ही नाली सुधार या जलनिकासी की व्यवस्था कराई गई। पंचायत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से परिवार की परेशानी और बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की राजनीति और बहुमत के दबाव में कमजोर परिवार की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। लोगों का सवाल है कि जब शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंच चुकी हैं तो जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। स्वच्छता के नाम पर चल रही योजनाएं क्या केवल कागजों और होर्डिंग तक सीमित हैं।
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पीड़ित बबलू शर्मा उर्फ सोनू शर्मा पुत्र कालिका प्रसाद ने बताया कि उनके मकान के सामने से गुजरने वाली सरकारी नाली में आसपास के कई घरों का घरेलू और बरसाती पानी छोड़ा जाता है। नाली की ढलान और निकासी व्यवस्था सही न होने के कारण पानी जमा रहता है। इससे दुर्गंध फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि बच्चों और बुजुर्गों के बीमार पड़ने का खतरा बना हुआ है।
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समस्या के समाधान के लिए पीड़ित ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी। डीएम रविंद्र सिंह को संपूर्ण समाधान दिवस में भी प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन अब तक न तो कोई स्थलीय जांच हुई और न ही नाली सुधार या जलनिकासी की व्यवस्था कराई गई। पंचायत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से परिवार की परेशानी और बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की राजनीति और बहुमत के दबाव में कमजोर परिवार की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। लोगों का सवाल है कि जब शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंच चुकी हैं तो जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। स्वच्छता के नाम पर चल रही योजनाएं क्या केवल कागजों और होर्डिंग तक सीमित हैं।
