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Fatehpur News: फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाई शिक्षिका को दो माह का वेतन जारी
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फतेहपुर। विकास खंड खजुहा के कंपोजिट विद्यालय समसपुर में सहायक अध्यापक पद पर कार्यरत सुषमा देवी के फर्जी अभिलेखों से करीब 10 साल पहले नौकरी पाने का मामला सामने आया है। इस मामले की शिकायत कानपुर के चौराई निवासी राजेंद्र पांडेय ने 2023 में शासन को की थी। शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए गए और बीएसए ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें बीईओ भिटौरा, बीईओ खजुहा और बीईओ मलवां को शामिल किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभाग ने जांच और कार्रवाई के बावजूद शिक्षिका का वेतन रोकने में लापरवाही बरती। बीएसए भारती त्रिपाठी ने आठ अक्तूबर को सुषमा देवी का वेतन रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद विभाग ने अक्तूबर और नवंबर माह का वेतन शिक्षिका के खाते में भेज दिया। इस दौरान फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने की जांच तीन सदस्यीय कमेटी की ओर से की जा रही थी। शिक्षिका ने भी अपने खाते से वेतन निकाल लिया।
शिकायतकर्ता ने आरटीआई कार्रवाई के माध्यम से वेतन जारी होने और विभाग की कार्रवाई के बारे में दोबारा जानकारी मांगी। इसके बाद ही विभाग ने दिसंबर माह से शिक्षिका का वेतन रोक दिया। बीईओ पवन द्विवेदी ने 16 जनवरी को वेतन रोकने की पुष्टि की। शिकायतकर्ता ने बताया कि फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने वाली शिक्षिका को अब तक दो माह का वेतन मिल चुका है।
ये है मामला
कंपोजिट स्कूल की शिक्षिका पर फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी करने का मामला करीब तीन साल पहले हुई शिकायत में आया था। बेसिक शिक्षा निदेशक से शिकायत में आरोप लगाए कि शिक्षिका ने दो बार शैक्षिक प्रमाणपत्र प्राप्त किए। शैक्षिक प्रमाण पत्रों में जन्म तिथि बदलकर नौकरी हासिल की। पहले जानकी इंटर काॅलेज बकेवर सरायं से सुषमा देवी पुत्री रामस्वरूप के नाम से 1999 में हाईस्कूल और 2001 में इंटर की शिक्षा ग्रहण की। इसमें जन्मतिथि 21 सितंबर 1984 अंकित है। इसके बाद दोबारा 2007 में हाईस्कूल कौशाम्बी के नारा से किया। इसमें जन्मतिथि 10 जनवरी 1991 दर्शायी है। इंटर भी 2009 में कौशाम्बी से किया। स्नातक बिंदकी महिला महाविद्यालय से 2012 में किया। शिकायतकर्ता ने दोबारा के अंकपत्रों में मां के स्थान पर सास का नाम शामिल करने का आरोप लगाया है। पिता का नाम रामस्वरूप ही है।
विभाग के प्रशासनिक अधिकारी की ओर से वेतन रोकने का आदेश जारी किया जाता है। उन्हें बीईओ की ओर से आदेश मिलने के बाद वेतन रोका गया है। देरी बीईओ कार्यालय से आदेश आने में हुई है।
शेष नारायण श्रीवास्तव, लेखाकार
उन्हें जब वेतन रोकने का आदेश जारी हुआ है तभी उन्होंने आदेश की संबंधित कॉपी भेज दी। उन्हें यह नहीं मालूम किस माह में वेतन रोका गया है। आदेश के क्रम में कार्रवाई बढ़ाई गई है।
- पवन द्विवेदी, बीईओ।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभाग ने जांच और कार्रवाई के बावजूद शिक्षिका का वेतन रोकने में लापरवाही बरती। बीएसए भारती त्रिपाठी ने आठ अक्तूबर को सुषमा देवी का वेतन रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद विभाग ने अक्तूबर और नवंबर माह का वेतन शिक्षिका के खाते में भेज दिया। इस दौरान फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने की जांच तीन सदस्यीय कमेटी की ओर से की जा रही थी। शिक्षिका ने भी अपने खाते से वेतन निकाल लिया।
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शिकायतकर्ता ने आरटीआई कार्रवाई के माध्यम से वेतन जारी होने और विभाग की कार्रवाई के बारे में दोबारा जानकारी मांगी। इसके बाद ही विभाग ने दिसंबर माह से शिक्षिका का वेतन रोक दिया। बीईओ पवन द्विवेदी ने 16 जनवरी को वेतन रोकने की पुष्टि की। शिकायतकर्ता ने बताया कि फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने वाली शिक्षिका को अब तक दो माह का वेतन मिल चुका है।
ये है मामला
कंपोजिट स्कूल की शिक्षिका पर फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी करने का मामला करीब तीन साल पहले हुई शिकायत में आया था। बेसिक शिक्षा निदेशक से शिकायत में आरोप लगाए कि शिक्षिका ने दो बार शैक्षिक प्रमाणपत्र प्राप्त किए। शैक्षिक प्रमाण पत्रों में जन्म तिथि बदलकर नौकरी हासिल की। पहले जानकी इंटर काॅलेज बकेवर सरायं से सुषमा देवी पुत्री रामस्वरूप के नाम से 1999 में हाईस्कूल और 2001 में इंटर की शिक्षा ग्रहण की। इसमें जन्मतिथि 21 सितंबर 1984 अंकित है। इसके बाद दोबारा 2007 में हाईस्कूल कौशाम्बी के नारा से किया। इसमें जन्मतिथि 10 जनवरी 1991 दर्शायी है। इंटर भी 2009 में कौशाम्बी से किया। स्नातक बिंदकी महिला महाविद्यालय से 2012 में किया। शिकायतकर्ता ने दोबारा के अंकपत्रों में मां के स्थान पर सास का नाम शामिल करने का आरोप लगाया है। पिता का नाम रामस्वरूप ही है।
विभाग के प्रशासनिक अधिकारी की ओर से वेतन रोकने का आदेश जारी किया जाता है। उन्हें बीईओ की ओर से आदेश मिलने के बाद वेतन रोका गया है। देरी बीईओ कार्यालय से आदेश आने में हुई है।
शेष नारायण श्रीवास्तव, लेखाकार
उन्हें जब वेतन रोकने का आदेश जारी हुआ है तभी उन्होंने आदेश की संबंधित कॉपी भेज दी। उन्हें यह नहीं मालूम किस माह में वेतन रोका गया है। आदेश के क्रम में कार्रवाई बढ़ाई गई है।
- पवन द्विवेदी, बीईओ।
