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UP: फिरोजाबाद के वनखंडी मंदिर से बेशकीमती सिक्के चोरी, नींव की खोदाई में मिले थे; जांच में जुटी पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:38 AM IST
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सार
पुरातत्व विभाग की टीम प्रारंभिक जांच के बाद कुछ नमूने (सिक्के) अपने साथ ले गई थी, जबकि बाकी सिक्कों को बिना किसी सुरक्षा के मंदिर की एक कोठरी में बोरी में भरकर ट्रस्ट की सुपुर्दगी में छोड़ दिया था। जून 2025 में जब विभाग की टीम दोबारा सिक्के लेने पहुंची, तो पूरी बोरी ही गायब थी।
खोदाई में मिले सिक्के जो चोरी हो गए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
फिरोजाबाद के सदर तहसील के नारखी क्षेत्र में स्थित वनखंडी मंदिर के तहखाने से चोरी बेशकीमती प्राचीन सिक्कों के संबंध में प्राथमिकी दर्ज हो गई है। अमर उजाला ने सिक्कों के गायब होने का 13 जून को राजफाश किया था। इसके बाद नारखी थाने में कोटला चौकी प्रभारी ने अज्ञात चोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस सिक्कों की तलाश, जांच में जुटी है। इधर, डीएम संतोष कुमार शर्मा ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक जांच के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व कल्पना जायसवाल को आदेश दिया है।
इन सिक्कों की चोरी की वारदात ने पुलिस प्रशासन से लेकर पुरातत्व विभाग की नींद उड़ा दी है। बता दें कि बीते वर्ष मई 2025 में वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में पर्यटन विकास के तहत जीर्णोद्धार व नींव की खोदाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान मिट्टी के दो मटकों में भारी मात्रा में प्राचीन सिक्के निकले, जिनका वजन करीब 40 से 45 किलोग्राम आंका गया था। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप ने इसकी विधिवत सूचना राज्य पुरातत्व विभाग की आगरा इकाई को दी थी।
इन सिक्कों की चोरी की वारदात ने पुलिस प्रशासन से लेकर पुरातत्व विभाग की नींद उड़ा दी है। बता दें कि बीते वर्ष मई 2025 में वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में पर्यटन विकास के तहत जीर्णोद्धार व नींव की खोदाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान मिट्टी के दो मटकों में भारी मात्रा में प्राचीन सिक्के निकले, जिनका वजन करीब 40 से 45 किलोग्राम आंका गया था। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप ने इसकी विधिवत सूचना राज्य पुरातत्व विभाग की आगरा इकाई को दी थी।
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22 मई 2025 को पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और बताया कि यह उच्च कोटि के तांबे के सिक्के हैं, जो उत्तर कुषाण काल (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) के हैं। पुरातत्व विभाग की टीम प्रारंभिक जांच के बाद कुछ नमूने (सिक्के) अपने साथ ले गई थी, जबकि बाकी सिक्कों को बिना किसी सुरक्षा के मंदिर की एक कोठरी में बोरी में भरकर ट्रस्ट की सुपुर्दगी में छोड़ दिया था। जून 2025 में जब विभाग की टीम दोबारा सिक्के लेने पहुंची, तो पूरी बोरी ही गायब थी।
आखिर किसने की चोरी, सब झाड़ रहे पल्ला
सिक्के गायब होने के बाद अब सभी जिम्मेदार पक्ष और विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप का कहना है कि सिक्के गायब होने की जानकारी मिलते ही पुलिस को लिखित तहरीर दी गई थी, लेकिन पुलिस ने उस वक्त मुकदमा दर्ज नहीं किया। ग्रामीणों को दिखाने के लिए इसे ठेकेदार की निगरानी में रखा गया था। पुरातत्व विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण मोहन दुबे (वर्तमान में गोरखपुर तैनात) और आगरा इकाई के अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी का कहना है कि उनका काम सिर्फ प्राचीनता बताना था, सिक्कों को संरक्षित करने का काम संग्रहालय का है। उन्होंने उस समय सिक्कों को पुलिस मालखाने में रखवाने को कहा था। एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें या तहसील के किसी भी अन्य अधिकारी को इस बारे में किसी भी स्तर से कोई लिखित या मौखिक सूचना उस वक्त नहीं दी गई थी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में चोरी की पुष्टि
कोटला चौकी प्रभारी जयचंद्र बाबू शर्मा ने अपनी तहरीर में लिखा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह और पुरातत्व विभाग (आगरा यूनिट) के कर्मचारियों से पूछताछ की। इसमें इस बात की पुष्टि हुई कि खुदाई में मिले वो ऐतिहासिक सिक्के वास्तव में चोरी हो चुके हैं और उन्हें किसी अज्ञात ने गायब कर दिया है। 16 जून की रात को इस संबंध में नारखी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले की जांच उपनिरीक्षक यशपाल सिंह भाटी को सौंपी गई है।
मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। नारखी थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। संबंधितों के बयान, जांच, साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। -अरुण कुमार चौरसिया, डिप्टी एसपी टूंडला
सिक्के गायब होने के बाद अब सभी जिम्मेदार पक्ष और विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप का कहना है कि सिक्के गायब होने की जानकारी मिलते ही पुलिस को लिखित तहरीर दी गई थी, लेकिन पुलिस ने उस वक्त मुकदमा दर्ज नहीं किया। ग्रामीणों को दिखाने के लिए इसे ठेकेदार की निगरानी में रखा गया था। पुरातत्व विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण मोहन दुबे (वर्तमान में गोरखपुर तैनात) और आगरा इकाई के अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी का कहना है कि उनका काम सिर्फ प्राचीनता बताना था, सिक्कों को संरक्षित करने का काम संग्रहालय का है। उन्होंने उस समय सिक्कों को पुलिस मालखाने में रखवाने को कहा था। एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें या तहसील के किसी भी अन्य अधिकारी को इस बारे में किसी भी स्तर से कोई लिखित या मौखिक सूचना उस वक्त नहीं दी गई थी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में चोरी की पुष्टि
कोटला चौकी प्रभारी जयचंद्र बाबू शर्मा ने अपनी तहरीर में लिखा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह और पुरातत्व विभाग (आगरा यूनिट) के कर्मचारियों से पूछताछ की। इसमें इस बात की पुष्टि हुई कि खुदाई में मिले वो ऐतिहासिक सिक्के वास्तव में चोरी हो चुके हैं और उन्हें किसी अज्ञात ने गायब कर दिया है। 16 जून की रात को इस संबंध में नारखी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले की जांच उपनिरीक्षक यशपाल सिंह भाटी को सौंपी गई है।
मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। नारखी थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। संबंधितों के बयान, जांच, साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। -अरुण कुमार चौरसिया, डिप्टी एसपी टूंडला