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Ghazipur News: रोजाना 20 बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे
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शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वार्ड में भर्ती डायरिया से पीड़ित बच्चें। संवाद
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बारिश के दिनों में बच्चों में डायरिया की समस्या बढ़ गई है। शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 35 से 40 बच्चे दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
इनमें डिहाइड्रेशन की स्थिति गंभीर होने पर 15 से 20 बच्चों को वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीता यादव ने बताया कि बाल रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 90 से 120 बच्चे विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए पहुंचते हैं।
इनमें 35 से 40 बच्चे पतली दस्त, उल्टी, कमजोरी, पेट में दर्द, मरोड़ और बुखार जैसी समस्या से पीड़ित मिल रहे हैं। शरीर में पानी की कमी के कारण करीब 15 से 20 बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। सामान्य तौर पर इन बच्चों को ठीक होने में तीन से पांच दिन का समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में बच्चों में डायरिया की समस्या आम तौर पर बढ़ जाती है।
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दूषित भोजन, पानी या आंतों के संक्रमण से यह समस्या हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के खानपान और पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. यादव ने बताया कि बच्चे को उल्टी या दस्त होने पर तत्काल ओआरएस का घोल दें। इसके बावजूद समस्या बनी रहे तो बच्चे को नजदीकी अस्पताल ले जाकर चिकित्सक को दिखाएं।
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इनमें डिहाइड्रेशन की स्थिति गंभीर होने पर 15 से 20 बच्चों को वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीता यादव ने बताया कि बाल रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 90 से 120 बच्चे विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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इनमें 35 से 40 बच्चे पतली दस्त, उल्टी, कमजोरी, पेट में दर्द, मरोड़ और बुखार जैसी समस्या से पीड़ित मिल रहे हैं। शरीर में पानी की कमी के कारण करीब 15 से 20 बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। सामान्य तौर पर इन बच्चों को ठीक होने में तीन से पांच दिन का समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में बच्चों में डायरिया की समस्या आम तौर पर बढ़ जाती है।
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दूषित भोजन, पानी या आंतों के संक्रमण से यह समस्या हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के खानपान और पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. यादव ने बताया कि बच्चे को उल्टी या दस्त होने पर तत्काल ओआरएस का घोल दें। इसके बावजूद समस्या बनी रहे तो बच्चे को नजदीकी अस्पताल ले जाकर चिकित्सक को दिखाएं।