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Gonda News: जिले में अब तक 25,305 टीबी मरीजों में से 20,908 हुए ठीक
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:36 PM IST
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गोंडा। समय पर जांच और इलाज के चलते क्षय रोग से पीड़ित मरीजों के ठीक होने की दर में तेजी से सुधार आया है। टीबी उन्मूलन को लेकर जिले में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे लोग जांच और उपचार के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इसके चलते ही जिले में अब तक चिह्नित 25,305 टीबी मरीजों में से 20,908 क्षय रोगी इस बीमारी से मुक्त हो कर ठीक हो चुके हैं। यह जानकारी विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में उजागर की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि 22,016 मरीजों को विभाग और सामाजिक संगठनों द्वारा गोद लेकर उनकी नियमित निगरानी कर इलाज कराया जा रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जयगोविंद ने बताया कि जिले में टीबी रोगियों की जांच के लिए आधुनिक मशीनों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हालांकि पोर्टल में बदलाव के कारण पिछले पांच माह से टीबी मरीजों की पोषण राशि अटकी है। इसको लेकर शासन स्तर पर प्रयास चल रहा है।
लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजीशियन डॉ. शोएब इकबाल ने बताया कि टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य तौर से फेफड़ों को प्रभावित करती है और धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बना देती है। शुरुआती तौर पर इसके लक्षण सामान्य खांसी जैसे लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ यह ज्यादा गंभीर हो जाते हैं। लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बलगम में खून आना, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर पीड़ित को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर पूरी जांच कराने के साथ इलाज कराना चाहिए।
एक नजर में
2024: कुल मरीज 11,278 | स्वस्थ 10,786 | गोद लिए गए 9,812
2025: कुल मरीज 11,909 | स्वस्थ 10,122 | गोद लिए गए 10,361
2026: कुल मरीज 2,118 | गोद लिए गए 1,843
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जयगोविंद ने बताया कि जिले में टीबी रोगियों की जांच के लिए आधुनिक मशीनों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हालांकि पोर्टल में बदलाव के कारण पिछले पांच माह से टीबी मरीजों की पोषण राशि अटकी है। इसको लेकर शासन स्तर पर प्रयास चल रहा है।
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लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजीशियन डॉ. शोएब इकबाल ने बताया कि टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य तौर से फेफड़ों को प्रभावित करती है और धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बना देती है। शुरुआती तौर पर इसके लक्षण सामान्य खांसी जैसे लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ यह ज्यादा गंभीर हो जाते हैं। लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बलगम में खून आना, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर पीड़ित को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर पूरी जांच कराने के साथ इलाज कराना चाहिए।
एक नजर में
2024: कुल मरीज 11,278 | स्वस्थ 10,786 | गोद लिए गए 9,812
2025: कुल मरीज 11,909 | स्वस्थ 10,122 | गोद लिए गए 10,361
2026: कुल मरीज 2,118 | गोद लिए गए 1,843