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Hamirpur News: फसल बीमा क्लेम के लिए भटक रहे पात्र किसान
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- नदी, नालों को खेत दिखा अपात्रों को दिया लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
राठ (हमीरपुर)। राठ क्षेत्र में फसल बीमा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। खराब हुई फसलों के मुआवजे के लिए पात्र किसान आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि नदी-नालों को कृषि भूमि बताकर अपात्रों को योजना का लाभ पहुंचाया गया है। इस फर्जीवाड़े में 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
पात्र किसानों को नहीं मिला बीमा क्लेम सरकार की महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है। टोला (औंता) के किसान शंकरलाल पुत्र गरीबदास ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड से बीमा का प्रीमियम कटने के बावजूद फसल नष्ट होने पर उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला है। इसी तरह, चिल्ली के सुरेंद्र राजपूत और सरसई गांव के अनीश त्रिपाठी, हरीसिंह राजपूत व जगदीश प्रसाद ने भी अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों का बीमा क्लेम न मिलने की शिकायत की है। उन्होंने टोल फ्री नंबर पर भी इसकी शिकायत दर्ज कराई है।
फर्जीवाड़े में 10 पर प्राथमिकी जांच में फर्जीवाड़ा पाए जाने पर चकबंदी लेखपाल अनुराग सिंह व अक्षय कुमार शर्मा ने 3 सितंबर को एक जनसेवा केंद्र संचालक सहित मुस्करा खुर्द के देवनारायण, वीरसिंह, राजेंद्र सिंह, भवानीदीन, बरुआ के कौशल, जराखर के अवधेश, नौरंगा के दीपक सिंह, बरहरा के बीरेंद्र और मनकेश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच अधिकारी एसआई शिवसहाय सरोज ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
बांध में फसल दिखा कर दिया बीमा
किसान फसल बीमा में धांधली की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम अभिमन्यु कुमार और एसडीएम न्यायिक अभिषेक कुमार की जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। बीमा राशि का बंदरबांट जांच में पाया गया कि रौरो क्षेत्र में मौदहा बांध के कई गाटा फसली दिखाकर बीमा राशि का बंदरबांट हुआ है, जिसका कुल क्षेत्रफल 102 हेक्टेयर है। इसके अलावा, नाला, बंजर, बीहड़ और आबादी जैसे खातों में दर्ज गाटे भी बीमा कंपनियों की सूची में शामिल थे, जिनका कुल रकबा 21 हेक्टेयर है। कुल 526 हेक्टेयर रकवे पर बीमित किसान और खतौनी में दर्ज खातेदार अलग-अलग पाए गए। रौरो गांव में कृषि भूमि 687 हेक्टेयर है, जबकि बीमा कंपनी ने 822.60 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा कर दिया था।
डेढ़ साल से भटक रहा मलखान
फोटो 15 एचएएमपी 24- मलखान सिंह निषाद। संवाद
सदर गांव निवासी जनसेवक मलखान सिंह निषाद ने बताया कि 2024 में उरद व मूंग की फसल का बीमा कराया था। फसल नष्ट हो गई थी। बीमा क्लेम नहीं मिला। आठ बार समाधान दिवस में गुहार लगाई। 21 जून को एसडीएम ने बीमा कंपनी के कर्मचारियों को फटकार लगाई थी जिसके बाद भी क्लेम नहीं मिला।
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भूमिहीन के खाते में भेजे 1.15 लाख रुपये
फोटो 15 एचएएमपी 25- विक्रम सिंह बंगरा। स्वयं
भाकियू युवा जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह राजपूत (बंगरा) ने फसल बीमा में धांधली का आरोप लगाया है। बताया कि औंता गांव के भूमिहीन व्यक्ति के खाते में फसल बीमा के 115653.86 रुपये डाले गए हैं। इसी गांव के एक अन्य व्यक्ति के खाते में फर्जी तरीके से धनराशि डाली गई है। कई बार शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
राठ (हमीरपुर)। राठ क्षेत्र में फसल बीमा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। खराब हुई फसलों के मुआवजे के लिए पात्र किसान आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि नदी-नालों को कृषि भूमि बताकर अपात्रों को योजना का लाभ पहुंचाया गया है। इस फर्जीवाड़े में 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
पात्र किसानों को नहीं मिला बीमा क्लेम सरकार की महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है। टोला (औंता) के किसान शंकरलाल पुत्र गरीबदास ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड से बीमा का प्रीमियम कटने के बावजूद फसल नष्ट होने पर उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला है। इसी तरह, चिल्ली के सुरेंद्र राजपूत और सरसई गांव के अनीश त्रिपाठी, हरीसिंह राजपूत व जगदीश प्रसाद ने भी अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों का बीमा क्लेम न मिलने की शिकायत की है। उन्होंने टोल फ्री नंबर पर भी इसकी शिकायत दर्ज कराई है।
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फर्जीवाड़े में 10 पर प्राथमिकी जांच में फर्जीवाड़ा पाए जाने पर चकबंदी लेखपाल अनुराग सिंह व अक्षय कुमार शर्मा ने 3 सितंबर को एक जनसेवा केंद्र संचालक सहित मुस्करा खुर्द के देवनारायण, वीरसिंह, राजेंद्र सिंह, भवानीदीन, बरुआ के कौशल, जराखर के अवधेश, नौरंगा के दीपक सिंह, बरहरा के बीरेंद्र और मनकेश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच अधिकारी एसआई शिवसहाय सरोज ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
बांध में फसल दिखा कर दिया बीमा
किसान फसल बीमा में धांधली की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम अभिमन्यु कुमार और एसडीएम न्यायिक अभिषेक कुमार की जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। बीमा राशि का बंदरबांट जांच में पाया गया कि रौरो क्षेत्र में मौदहा बांध के कई गाटा फसली दिखाकर बीमा राशि का बंदरबांट हुआ है, जिसका कुल क्षेत्रफल 102 हेक्टेयर है। इसके अलावा, नाला, बंजर, बीहड़ और आबादी जैसे खातों में दर्ज गाटे भी बीमा कंपनियों की सूची में शामिल थे, जिनका कुल रकबा 21 हेक्टेयर है। कुल 526 हेक्टेयर रकवे पर बीमित किसान और खतौनी में दर्ज खातेदार अलग-अलग पाए गए। रौरो गांव में कृषि भूमि 687 हेक्टेयर है, जबकि बीमा कंपनी ने 822.60 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा कर दिया था।
डेढ़ साल से भटक रहा मलखान
फोटो 15 एचएएमपी 24- मलखान सिंह निषाद। संवाद
सदर गांव निवासी जनसेवक मलखान सिंह निषाद ने बताया कि 2024 में उरद व मूंग की फसल का बीमा कराया था। फसल नष्ट हो गई थी। बीमा क्लेम नहीं मिला। आठ बार समाधान दिवस में गुहार लगाई। 21 जून को एसडीएम ने बीमा कंपनी के कर्मचारियों को फटकार लगाई थी जिसके बाद भी क्लेम नहीं मिला।
भूमिहीन के खाते में भेजे 1.15 लाख रुपये
फोटो 15 एचएएमपी 25- विक्रम सिंह बंगरा। स्वयं
भाकियू युवा जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह राजपूत (बंगरा) ने फसल बीमा में धांधली का आरोप लगाया है। बताया कि औंता गांव के भूमिहीन व्यक्ति के खाते में फसल बीमा के 115653.86 रुपये डाले गए हैं। इसी गांव के एक अन्य व्यक्ति के खाते में फर्जी तरीके से धनराशि डाली गई है। कई बार शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
