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Hamirpur News: प्रेम विवाह करने वाली महिलाओं को पड़ी माता-पिता की जरूरत
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एसआईआर:
- सरकारी प्रक्रिया की वजह से मायके के दस्तावेज हुए जरूरी
- मतदाता सूची निकलवा ली तो आधार कार्ड में अटका मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) ने कई महिला मतदाताओं को असहज स्थिति में डाल दिया है। कच्ची मतदाता सूची में जिनका नाम है उन्होंने मायके पक्ष के साक्ष्य नहीं दिए। निर्वाचन प्रशासन की ओर से दिए गए नोटिस में कागजात प्रस्तुत करने के लिए कहा है। यही वजह है कि वर्षों पहले माता-पिता को छोड़कर प्रेम विवाह करने वाली युवतियां परेशान हैं। उनके मतदाता अधिकार पर खतरा मंडराया तो अब उन्हें मायके की याद सता रही है।
एसआईआर के तहत मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या संशोधन के लिए जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र व पारिवारिक अभिलेखों की मांग की जा रही है। प्रेम विवाह करने वाली कई महिलाओं के पास ससुराल से जुड़े दस्तावेज तो उपलब्ध हैं लेकिन मायके पक्ष के प्रमाणपत्र न होने से वह परेशान हैं। मायके पक्ष से उनके रिश्ते भी मधुर नहीं हैं तो कुछ मामलों में मायके से संबंध पूरी तरह टूट चुके है। ऐसी स्थिति में मायके पक्ष के कागजात जुटाना कठिन हो गया है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची के साथ माता या पिता में किसी एक का आधार कार्ड होना अनिवार्य है। यह नहीं है तो बाबा-दादी के कागजात चाहिए। किसी तरह वर्ष 2003 की मतदाता सूची उपलब्ध करा ली तो आधार कार्ड में मामला अटक गया। आधार कार्ड अगर अपलोड भी कराया जाए तो उसमें ओटीपी का पेंच फंस जाता है।
बृहस्पतिवार को तहसील पहुंची एक युवती ने बताया कि उसका मायका कानपुर में है। उन्होंने प्रेम विवाह किया। इस निर्णय से माता-पिता असंतुष्ट हैं। मौजूदा समय में रिश्ते मधुर नहीं हैं। अब सरकारी प्रक्रिया की वजह से मायके के कागजात जुटाना आवश्यक है ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।
वर्जन
भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत वैध दस्तावेज आवश्यक हैं। बिना प्रमाण के किसी का नाम जोड़ना या संशोधन करना संभव नहीं है। नोटिस की सुनवाई में महिलाओं के माता-पिता, बाबा-दादी के आधार कार्ड व अन्य प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने के कुछ केस आए हैं। उन्हें जरूरी विकल्पों के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।-केडी शर्मा, सदर एसडीएम हमीरपुर
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525 नोटिस की होनी है सुनवाई, दो दिन में पहुंचे सिर्फ 197
- निर्वाचन आयोग के नोटिस का जवाब देने कम पहुंच रहे मतदाता
फोटो 22 एचएएमपी 31- नोटिस की सुनवाई करते एसडीएम। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में कच्ची मतदाता सूची जारी होने के बाद नो मैपिंग के मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस की सुनवाई चल रही है। जिन्हें नोटिस मिला है उनमें जागरूकता का अभाव दिख रहा है। यही वजह है कि वह सुनवाई में साक्ष्य प्रस्तुत करने कम संख्या में पहुंच रहे हैं। हमीरपुर तहसील क्षेत्र में भेजे नोटिसों के सापेक्ष 525 की सुनवाई होनी है। बुधवार और गुरुवार को सुनवाई में सिर्फ 197 लोग ही नोटिस का जवाब देने पहुंचे।
गुरुवार को भी वही लोग आए जिनके कागजात अधूरे थे। इनमें जो कागजात नहीं दे पाया उनका निस्तारण नहीं हो पाया। एसडीएम केडी शर्मा, तहसीलदार रविंद्र पाल समेत सभी बीएलओ मौजूद रहे लेकिन समाधान कराने वाले कम पहुंचे। ऐसी ही स्थिति राठ, मौदहा, सरीला तहसील क्षेत्र में भी देखने को मिली। मतदाताओं में जागरूकता का अभाव नजर आ रहा है या फिर वह क्षेत्र से कहीं बाहर हैं। शुक्रवार को भी हमीरपुर में 784 नोटिस की सुनवाई की जानी है। एसडीएम केडी शर्मा का कहना है कि जिन्हें नोटिस मिला है वह जरूरी दस्तावेज लेकर आएं।
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फोटो22एचएएमपी 32- जमुना प्रसाद।
बहू का वोट न कटे, परेशान हैं जमुना प्रसाद
निर्वाचन प्रशासन की ओर से भेजे गए नोटिस के बाद शहर के मुहल्ला कजियाना भाग संख्या 104 निवासी जमुना प्रसाद अपनी बहू मधु के वोट को लेकर परेशान है। दो दिन से वह तहसील में उप जिलाधिकारी के समक्ष दस्तावेज लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन अभी तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया। बहू का मायका जनपद फतेहपुर के गांव लहूरी मऊ में है। वहां से वर्ष 2003 की डिटेल नहीं मिल पा रही है। बृहस्पतिवार को भी वह तहसील पहुंचे लेकिन उन्हें चार विकल्प देकर फिर लौटा दिया गया। अगर वह प्रपत्र पूरे नहीं दे पाए तो अंतिम मतदाता सूची में बहू का नाम कटना तय है।
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फोटो 22 एचएएमपी 33-पति व बच्चे के साथ पूजा।
नोटिस सुनवाई में छोटे बच्चे व पति के साथ पहुंचीं पूजा
शहर के आंबेडकर नगर नौबस्ता भाग संख्या 120 निवासी पूजा देवी पति मोहित वर्मा के साथ अपने छोटे बच्चे को भी लेकर तहसील पहुंचीं। पूजा को भेजे गए नोटिस में रिश्तेदार से संबंधित विवरण नहीं होने की बात थी। इस पर वह जरूरी प्रपत्र लेकर पहुंचीं। देर हो जाने की वजह से वह एसडीएम के जाने के बाद तहसीलदार के पास पहुंचीं। मोहित का कहना है कि इस नोटिस ने परेशान कर दिया है। कागजात जुटाना आसान नहीं है। एसआईआर के नियम कायदों में सरलता होनी चाहिए।
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नाम संशोधन में हो रही परेशानी
सुमेरपुर क्षेत्र के पारा ओझी निवासी कुसुम कली के नाम और जन्मतिथि में संशोधन होना है। नाम संशोधन के लिए उसने फार्म आठ भरा तो बीएलओ ने गंभीरता नहीं दिखाई। कुछ खामियां थीं फिर भी उसे आगे बढ़ा दिया। अब दोबारा बीएलओ के पास फार्म भेजा गया। कुसुम कली के बेटे का कहना है कि मतदाता सूची में नाम संशोधन कराना बहुत कठिन काम है।
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- मतदाता सूची निकलवा ली तो आधार कार्ड में अटका मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) ने कई महिला मतदाताओं को असहज स्थिति में डाल दिया है। कच्ची मतदाता सूची में जिनका नाम है उन्होंने मायके पक्ष के साक्ष्य नहीं दिए। निर्वाचन प्रशासन की ओर से दिए गए नोटिस में कागजात प्रस्तुत करने के लिए कहा है। यही वजह है कि वर्षों पहले माता-पिता को छोड़कर प्रेम विवाह करने वाली युवतियां परेशान हैं। उनके मतदाता अधिकार पर खतरा मंडराया तो अब उन्हें मायके की याद सता रही है।
एसआईआर के तहत मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या संशोधन के लिए जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र व पारिवारिक अभिलेखों की मांग की जा रही है। प्रेम विवाह करने वाली कई महिलाओं के पास ससुराल से जुड़े दस्तावेज तो उपलब्ध हैं लेकिन मायके पक्ष के प्रमाणपत्र न होने से वह परेशान हैं। मायके पक्ष से उनके रिश्ते भी मधुर नहीं हैं तो कुछ मामलों में मायके से संबंध पूरी तरह टूट चुके है। ऐसी स्थिति में मायके पक्ष के कागजात जुटाना कठिन हो गया है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची के साथ माता या पिता में किसी एक का आधार कार्ड होना अनिवार्य है। यह नहीं है तो बाबा-दादी के कागजात चाहिए। किसी तरह वर्ष 2003 की मतदाता सूची उपलब्ध करा ली तो आधार कार्ड में मामला अटक गया। आधार कार्ड अगर अपलोड भी कराया जाए तो उसमें ओटीपी का पेंच फंस जाता है।
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बृहस्पतिवार को तहसील पहुंची एक युवती ने बताया कि उसका मायका कानपुर में है। उन्होंने प्रेम विवाह किया। इस निर्णय से माता-पिता असंतुष्ट हैं। मौजूदा समय में रिश्ते मधुर नहीं हैं। अब सरकारी प्रक्रिया की वजह से मायके के कागजात जुटाना आवश्यक है ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।
वर्जन
भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत वैध दस्तावेज आवश्यक हैं। बिना प्रमाण के किसी का नाम जोड़ना या संशोधन करना संभव नहीं है। नोटिस की सुनवाई में महिलाओं के माता-पिता, बाबा-दादी के आधार कार्ड व अन्य प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने के कुछ केस आए हैं। उन्हें जरूरी विकल्पों के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।-केडी शर्मा, सदर एसडीएम हमीरपुर
525 नोटिस की होनी है सुनवाई, दो दिन में पहुंचे सिर्फ 197
- निर्वाचन आयोग के नोटिस का जवाब देने कम पहुंच रहे मतदाता
फोटो 22 एचएएमपी 31- नोटिस की सुनवाई करते एसडीएम। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में कच्ची मतदाता सूची जारी होने के बाद नो मैपिंग के मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस की सुनवाई चल रही है। जिन्हें नोटिस मिला है उनमें जागरूकता का अभाव दिख रहा है। यही वजह है कि वह सुनवाई में साक्ष्य प्रस्तुत करने कम संख्या में पहुंच रहे हैं। हमीरपुर तहसील क्षेत्र में भेजे नोटिसों के सापेक्ष 525 की सुनवाई होनी है। बुधवार और गुरुवार को सुनवाई में सिर्फ 197 लोग ही नोटिस का जवाब देने पहुंचे।
गुरुवार को भी वही लोग आए जिनके कागजात अधूरे थे। इनमें जो कागजात नहीं दे पाया उनका निस्तारण नहीं हो पाया। एसडीएम केडी शर्मा, तहसीलदार रविंद्र पाल समेत सभी बीएलओ मौजूद रहे लेकिन समाधान कराने वाले कम पहुंचे। ऐसी ही स्थिति राठ, मौदहा, सरीला तहसील क्षेत्र में भी देखने को मिली। मतदाताओं में जागरूकता का अभाव नजर आ रहा है या फिर वह क्षेत्र से कहीं बाहर हैं। शुक्रवार को भी हमीरपुर में 784 नोटिस की सुनवाई की जानी है। एसडीएम केडी शर्मा का कहना है कि जिन्हें नोटिस मिला है वह जरूरी दस्तावेज लेकर आएं।
फोटो22एचएएमपी 32- जमुना प्रसाद।
बहू का वोट न कटे, परेशान हैं जमुना प्रसाद
निर्वाचन प्रशासन की ओर से भेजे गए नोटिस के बाद शहर के मुहल्ला कजियाना भाग संख्या 104 निवासी जमुना प्रसाद अपनी बहू मधु के वोट को लेकर परेशान है। दो दिन से वह तहसील में उप जिलाधिकारी के समक्ष दस्तावेज लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन अभी तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया। बहू का मायका जनपद फतेहपुर के गांव लहूरी मऊ में है। वहां से वर्ष 2003 की डिटेल नहीं मिल पा रही है। बृहस्पतिवार को भी वह तहसील पहुंचे लेकिन उन्हें चार विकल्प देकर फिर लौटा दिया गया। अगर वह प्रपत्र पूरे नहीं दे पाए तो अंतिम मतदाता सूची में बहू का नाम कटना तय है।
फोटो 22 एचएएमपी 33-पति व बच्चे के साथ पूजा।
नोटिस सुनवाई में छोटे बच्चे व पति के साथ पहुंचीं पूजा
शहर के आंबेडकर नगर नौबस्ता भाग संख्या 120 निवासी पूजा देवी पति मोहित वर्मा के साथ अपने छोटे बच्चे को भी लेकर तहसील पहुंचीं। पूजा को भेजे गए नोटिस में रिश्तेदार से संबंधित विवरण नहीं होने की बात थी। इस पर वह जरूरी प्रपत्र लेकर पहुंचीं। देर हो जाने की वजह से वह एसडीएम के जाने के बाद तहसीलदार के पास पहुंचीं। मोहित का कहना है कि इस नोटिस ने परेशान कर दिया है। कागजात जुटाना आसान नहीं है। एसआईआर के नियम कायदों में सरलता होनी चाहिए।
नाम संशोधन में हो रही परेशानी
सुमेरपुर क्षेत्र के पारा ओझी निवासी कुसुम कली के नाम और जन्मतिथि में संशोधन होना है। नाम संशोधन के लिए उसने फार्म आठ भरा तो बीएलओ ने गंभीरता नहीं दिखाई। कुछ खामियां थीं फिर भी उसे आगे बढ़ा दिया। अब दोबारा बीएलओ के पास फार्म भेजा गया। कुसुम कली के बेटे का कहना है कि मतदाता सूची में नाम संशोधन कराना बहुत कठिन काम है।
