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Hapur News: गढ़ में मकान पर छापा मारकर 13 क्विंटल रंगीन कचरी पकड़ी, मिलावट के शक पर सीज

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 01:26 AM IST
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13 quintals of coloured waste seized after raid on house in Garh, suspected of adulteration
गढ़ स्थित कचरी की फैक्टरी में जांच करने पहुंची फूड विभाग की टीम। संवाद
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हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर। गढ़मुक्तेश्वर की नाजिम कॉलोनी में एक मकान से करीब 13 क्विंटल रंगीन कचरी को जब्त कर मिलावट के शक पर सीज किया गया है। कचरी को बनाने में खराब गुणवत्ता व अधिक रंग की मात्रा के इस्तेमाल का शक अधिकारियों ने जताया है। कचरी के दो नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इसके अलावा गंदगी में सेवइयां बनाने पर नोटिस जारी हुआ है।
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होली से पहले खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग की टीम जिले में छापा मार रही है। इसी कड़ी में बुधवार को सहायक आयुक्त द्वितीय सुनील कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की। अधिकारियों की टीम ने नाजिम कॉलोनी में राशिद के मकान में बन रही रंगीन कचरी पर छापा मारा। फैक्टरी के अंदर कट्टों में बनकर तैयार और छत पर सूख रही रंगीन कचरी की जांच की गई। कचरी बनाने में रंग के इस्तेमाल को लेकर सवाल किए गए। इसके अलावा कचरी को अधिक रंगीन व चमकदार बनाने के लिए तय से अधिक मात्रा में रंग के इस्तेमाल का शक मिला है। वहीं, मौके पर सेवइयां भी बनाई जा रही थीं। भारी अनियमितताओं और गंदगी के बीच सेवइयां बनाने पर नोटिस दिया गया है।
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मामले में सहायक आयुक्त द्वितीय सुनील कुमार का कहना है कि कचरी को चमकदार बनाने के लिए तय से अधिक मात्रा में रंग का इस्तेमाल मिला है। इस पर करीब 13 क्विंटल रंगीन कचरी को सीज करा दिया। साथ ही दो नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

30 रुपये किलोग्राम में हो रही बिक्री --
होली पर कचरी की डिमांड बहुत अधिक रहती है। इसलिए इसे चमकदार बनाने के लिए रंगों का अधिक इस्तेमाल होता है। सहायक आयुक्त द्वितीय सुनील कुमार ने बताया कि राशिद की फैक्टरी पर जो कचरी बनाई जा रही है, वह बाजार में करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम में बिक्री होती है, जबकि दुकानों पर ग्राहकों को 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम में इसे बेचा जाता है।

अधिक व खराब गुणवत्ता वाले रंग से कैंसर का खतरा --
सहायक आयुक्त सुनील कुमार ने बताया कि रंगीन कचरी (कलर वाले पापड़) में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंगों से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है। कई बार इन्हें बनाने में अखाद्य या कपड़े रंगने वाले रंगों का प्रयोग तक किया जाता है। सिंथेटिक रंगों में खतरनाक केमिकल होते हैं, जिनके लंबे समय तक सेवन से कैंसर भी फैल सकता है। यह लीवर और किडनी पर बुरा असर डालते हैं, जिससे अंग खराब हो सकते हैं। इसके अलावा रंगीन कचरी खाने से बच्चों में एलर्जी, अस्थमा और त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं। साथ ही पेट में दर्द, उल्टी और अन्य पाचन समस्याएं हो सकती हैं।
घर पर इस प्रकार आसानी से कर सकते हैं जांच
पानी का परीक्षण :
एक कांच के गिलास में सादा पानी लें, रंगीन कचरी के एक या दो टुकड़ों को पानी में डाल दें। इसे 1-2 मिनट के लिए छोड़ दें। यदि पानी तुरंत रंगीन होने लगे और कचरी अपना रंग छोड़ दे तो इसका मतलब है कि इसमें हानिकारक सिंथेटिक रंग मिलाया गया है। शुद्ध या खाद्य सुरक्षित रंग इतनी आसानी से पानी में नहीं घुलते हैं।
रुई का परीक्षण :
रुई का एक छोटा टुकड़ा लें और उसे थोड़ा पानी या तेल में भिगो लें। कचरी की सतह पर इसे रुई से जोर से रगड़ें। अगर रुई पर वह रंग लग जाता है तो यह स्पष्ट है कि इसमें मिलावटी रंग का उपयोग किया गया है।
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