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Hapur News: उच्च रक्तचाप से ब्रेन स्ट्रोक का बढ़ा खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 09 Jan 2026 10:25 PM IST
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हापुड़। सर्दी में रक्तचाप बढ़ने के कारण ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में हर रोज दो से तीन मरीज आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण उच्च रक्तचाप है, जिसे लोग गंभीरता से नहीं लेते। समय पर इलाज और जांच न होने से यह बीमारी जानलेवा साबित हो रही है। हालांकि, जिले में उपचार की सुविधा न मिलने के कारण मरीजों को मेरठ, गाजियाबाद जाना पड़ रहा हैं।
हापुड़ सीएचसी के न्यूरो साइकेट्री (प्रशिक्षण) डॉ.अशरफ अली ने बताया कि सर्दियों में अधिक रक्तचाप वाले मरीजों को लकवे का खतरा ज्यादा होता है। ठंड के कारण खून गाढ़ा हो जाता है, इससे हृदयघात और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। रक्तचाप अचानक बढ़ने से दिमाग की नस फट जाती है।
उन्होंने बताया कि नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराते रहें। 180 से ऊपर रक्तचाप जाने पर पूरी तरह गंभीर हो जाएं, क्योंकि यही वह अवस्था है जब ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान और शराब भी हानिकारक है। बताया कि यह बीमारी पहले बुजुर्गों में थी, अब बीते चार से पांच सालों में युवा भी ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
बचाव के तरीके
लकवा का जोखिम कम करने के लिए बिस्तर छोड़ने से पहले आधा घंटा तक वहीं बैठे रहें। इसके बाद अपने पैर एक मिनट तक लटकाए रखें। लकवे के खतरे को कम करने के लिए नहाते समय पहले अपने पैरों पर पानी डालना चाहिए। इसके बाद शरीर के अन्य हिस्सों पर पानी डालें। सीधा सिर पर पानी डालने से भी लकवा का खतरा बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए नियमित व्यायाम करें, संतुलित और पौष्टिक आहार लें। इसके अलावा ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखकर मोटापे से बचें।
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हापुड़ सीएचसी के न्यूरो साइकेट्री (प्रशिक्षण) डॉ.अशरफ अली ने बताया कि सर्दियों में अधिक रक्तचाप वाले मरीजों को लकवे का खतरा ज्यादा होता है। ठंड के कारण खून गाढ़ा हो जाता है, इससे हृदयघात और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। रक्तचाप अचानक बढ़ने से दिमाग की नस फट जाती है।
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उन्होंने बताया कि नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराते रहें। 180 से ऊपर रक्तचाप जाने पर पूरी तरह गंभीर हो जाएं, क्योंकि यही वह अवस्था है जब ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान और शराब भी हानिकारक है। बताया कि यह बीमारी पहले बुजुर्गों में थी, अब बीते चार से पांच सालों में युवा भी ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
बचाव के तरीके
लकवा का जोखिम कम करने के लिए बिस्तर छोड़ने से पहले आधा घंटा तक वहीं बैठे रहें। इसके बाद अपने पैर एक मिनट तक लटकाए रखें। लकवे के खतरे को कम करने के लिए नहाते समय पहले अपने पैरों पर पानी डालना चाहिए। इसके बाद शरीर के अन्य हिस्सों पर पानी डालें। सीधा सिर पर पानी डालने से भी लकवा का खतरा बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए नियमित व्यायाम करें, संतुलित और पौष्टिक आहार लें। इसके अलावा ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखकर मोटापे से बचें।