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Hardoi News: गैर इरादतन हत्या के आरोपी अस्पताल संचालक की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
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हरदोई। गैर इरादतन हत्या के आरोपी अस्पताल संचालक की अग्रिम जमानत अर्जी जिला जज रीता कौशिक ने खारिज कर दी है। माधौगंज थाना क्षेत्र के रुदामऊ के प्रधान अनुज कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि बीती 17 जून को पत्नी माधुरी को प्रसव पीड़ा हुई थी। इस पर वह उन्हें लेकर माधौगंज रेलवे क्रॉसिंग के पास बने बंधन हॉस्पिटल गए थे।
आरोप है कि उपचार के दौरान चिकित्सीय लापरवाही के कारण नवजात की मौत हो गई थी और माधुरी की हालत बिगड़ गई थी। बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम में माधुरी के गर्भाशय में खून के थक्के मिले थे। प्रसव के बाद ज्यादा रक्तस्राव होने से शॉक और हेमरेज होने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई थी। अस्पताल संचालक प्रिंस कुमार के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि केवल अस्पताल संचालक होने के कारण उसे फंसाया गया है। प्राथमिकी में किसी विशिष्ट लापरवाही का उल्लेख नहीं है।
दावा किया कि महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और बच्चे की मौत डिलीवरी से पहले ही हो चुकी थी। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी अस्पताल का संचालक है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार आरोपी और संबंधित डॉक्टर फरार चल रहे हैं। डॉक्टर की योग्यता और अन्य मेडिकल दस्तावेज भी अभी तक उपलब्ध नहीं कराए हैं। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जिला जज ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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आरोप है कि उपचार के दौरान चिकित्सीय लापरवाही के कारण नवजात की मौत हो गई थी और माधुरी की हालत बिगड़ गई थी। बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम में माधुरी के गर्भाशय में खून के थक्के मिले थे। प्रसव के बाद ज्यादा रक्तस्राव होने से शॉक और हेमरेज होने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई थी। अस्पताल संचालक प्रिंस कुमार के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि केवल अस्पताल संचालक होने के कारण उसे फंसाया गया है। प्राथमिकी में किसी विशिष्ट लापरवाही का उल्लेख नहीं है।
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दावा किया कि महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और बच्चे की मौत डिलीवरी से पहले ही हो चुकी थी। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी अस्पताल का संचालक है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार आरोपी और संबंधित डॉक्टर फरार चल रहे हैं। डॉक्टर की योग्यता और अन्य मेडिकल दस्तावेज भी अभी तक उपलब्ध नहीं कराए हैं। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जिला जज ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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