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Hardoi News: कार से दोस्त को घसीटने, मौत के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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हरदोई। तुम मेरे रिश्तेदार बनने लायक नहीं हो…, कहने पर युवक को दोस्त ने कार से घसीटा था। इससे युवक की मौत हो गई थी। इसी मामले में जिला जज रीता कौशिक ने आरोपी की जमानत खारिज कर दी।
पंडितपुरवा निवासी बबलू राठौर अपने दोस्त विमलेश के साथ 19 सितंबर को शाहाबाद गए थे। वहां से दोनों बबलू की बहन के घर और फिर पिहानी स्थित उसकी ससुराल गए थे। दोनों के बीच रिश्तेदारी को लेकर बातचीत चल रही थी। आरोप है कि शराब पीने के दौरान बब्लू की टिप्पणी से विवाद बढ़ गया था। शिवम राठौर ने कोतवाली पिहानी में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इसमें बताया था कि उसके पिता बबलू अनंग बेहटा निवासी विमलेश के साथ गए थे। रात में वापस आते समय विमलेश ने अपने साथी की मदद से उसके पिता को गमछे से कार में बांधकर घसीटा था। कुइयां गांव के पास मृत समझकर सड़क पर छोड़कर भाग गए थे। तब जानकारी पर उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। लखनऊ में इलाज के दौरान 29 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी। चिकित्सक ने मृत्यु का कारण मृत्यु से पहले आई संक्रमित चोटों के चलते सेप्टीसीमिया होना बताया।
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वहीं पोस्टमार्टम में 21 चोट का उल्लेख किया गया। विमलेश ने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत अर्जी दाखिल की और खुद को निर्दोष बताते हुए जमानत पर रिहा किए जाने का तर्क दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूत के आधार पर जिला जज ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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पंडितपुरवा निवासी बबलू राठौर अपने दोस्त विमलेश के साथ 19 सितंबर को शाहाबाद गए थे। वहां से दोनों बबलू की बहन के घर और फिर पिहानी स्थित उसकी ससुराल गए थे। दोनों के बीच रिश्तेदारी को लेकर बातचीत चल रही थी। आरोप है कि शराब पीने के दौरान बब्लू की टिप्पणी से विवाद बढ़ गया था। शिवम राठौर ने कोतवाली पिहानी में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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इसमें बताया था कि उसके पिता बबलू अनंग बेहटा निवासी विमलेश के साथ गए थे। रात में वापस आते समय विमलेश ने अपने साथी की मदद से उसके पिता को गमछे से कार में बांधकर घसीटा था। कुइयां गांव के पास मृत समझकर सड़क पर छोड़कर भाग गए थे। तब जानकारी पर उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। लखनऊ में इलाज के दौरान 29 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी। चिकित्सक ने मृत्यु का कारण मृत्यु से पहले आई संक्रमित चोटों के चलते सेप्टीसीमिया होना बताया।
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वहीं पोस्टमार्टम में 21 चोट का उल्लेख किया गया। विमलेश ने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत अर्जी दाखिल की और खुद को निर्दोष बताते हुए जमानत पर रिहा किए जाने का तर्क दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूत के आधार पर जिला जज ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।