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Hardoi News: चकबंदी लेखपालों को पहली बार ही मिला ऑनलाइन सत्यापन का मौका, उसी में कर दिया खेल
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हरदोई। भूमिहीनों का सत्यापन किए जाने के सभी मामले चकबंदी विभाग के लेखपालों और चकबंदी अधिकारियों से जुड़े हैं। दरअसल पहली बार ही यह व्यवस्था दी गई थी कि चकबंदी वाले गांवों के खेतों का सत्यापन विभागीय लेखपाल करेंगे और चकबंदी अधिकारी इस सत्यापन पर मुहर लगाकर लॉक कर देंगे। पूर्व में चकबंदी वाले गांवों मे ऑफलाइन सत्यापन तो संबंधित लेखपाल ही करते थे,लेकिन इन पर अंतिम मुहर उपजिलाधिकारी की लगती थी।
जनपद के 11 गांवाें में 1380 भूमिहीनों को किसान बनाकर चकबंदी के आठ लेखपालों ने सत्यापन कर दिया था। चकबंदी लेखपालों के इस सत्यापन पर संबंधित चकबंदी अधिकारियों ने भी मुहर लगा दी थी। अभिलेख सत्यापित होने के कारण इन 1380 भूमिहीनों के नाम पर लगभग डेढ़ लाख क्विंटल धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों पर कर ली गई थी। इस फर्जीवाड़े को लेकर जिलाधिकारी अनुनय झा को शिकायत मिली थी। उन्होंने उपसंचालक चकबंदी और बंदोबस्त अधिकारी से जांच कराई थी।
जांच में पता चला था कि संडीला तहसील क्षेत्र के छह गांवों और शाहाबाद तहसील क्षेत्र के पांच गांवों में जमीनें दिखाकर भूमिहीनों का सत्यापन कर दिया गया। दरअसल इस बार ही व्यवस्था में बदलाव हुआ था। गत वर्ष तक चकबंदी लेखपालों और चकबंदी अधिकारियों को ऑनलाइन सत्यापन की अनुमति नहीं थी। चकबंदी वाले क्षेत्र का किसान होने पर सत्यापन विभागीय लेखपाल करते थे, लेकिन इस पर मुहर एसडीएम की लगती थी। इस बार चकबंदी लेखपालों से लेकर चकबंदी अधिकारियों तक की लाॅगइन आईडी बनवाकर सत्यापन का अधिकार इन लोगों को ही दे दिया गया था। नतीजा अब सबके सामने है। फिलहाल धान खरीद में हुई इस गड़बड़ी के कारण क्रय केंद्र प्रभारियों से लेकर लेखपालों तक में अफरा तफरी है।
सहायक चकबंदी अधिकारी दर्ज कराएंगे प्राथमिकी
संबंधित लेखपालों के खिलाफ विभागीय और विधिक कार्रवाई करने के आदेश डीएम अनुनय झा ने दिए हैं। इसी क्रम में संबंधित सहायक चकबंदी अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर निर्देश बंदोबस्त अधिकारी ने भी जारी कर दिए हैं। संडीला के मामलों में अनिल वर्मा और रामलखन शिकायत दर्ज कराएंगे, जबकि शाहाबाद के मामलों में अन्नू देवी और सर्वेश कुमार को प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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जनपद के 11 गांवाें में 1380 भूमिहीनों को किसान बनाकर चकबंदी के आठ लेखपालों ने सत्यापन कर दिया था। चकबंदी लेखपालों के इस सत्यापन पर संबंधित चकबंदी अधिकारियों ने भी मुहर लगा दी थी। अभिलेख सत्यापित होने के कारण इन 1380 भूमिहीनों के नाम पर लगभग डेढ़ लाख क्विंटल धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों पर कर ली गई थी। इस फर्जीवाड़े को लेकर जिलाधिकारी अनुनय झा को शिकायत मिली थी। उन्होंने उपसंचालक चकबंदी और बंदोबस्त अधिकारी से जांच कराई थी।
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जांच में पता चला था कि संडीला तहसील क्षेत्र के छह गांवों और शाहाबाद तहसील क्षेत्र के पांच गांवों में जमीनें दिखाकर भूमिहीनों का सत्यापन कर दिया गया। दरअसल इस बार ही व्यवस्था में बदलाव हुआ था। गत वर्ष तक चकबंदी लेखपालों और चकबंदी अधिकारियों को ऑनलाइन सत्यापन की अनुमति नहीं थी। चकबंदी वाले क्षेत्र का किसान होने पर सत्यापन विभागीय लेखपाल करते थे, लेकिन इस पर मुहर एसडीएम की लगती थी। इस बार चकबंदी लेखपालों से लेकर चकबंदी अधिकारियों तक की लाॅगइन आईडी बनवाकर सत्यापन का अधिकार इन लोगों को ही दे दिया गया था। नतीजा अब सबके सामने है। फिलहाल धान खरीद में हुई इस गड़बड़ी के कारण क्रय केंद्र प्रभारियों से लेकर लेखपालों तक में अफरा तफरी है।
सहायक चकबंदी अधिकारी दर्ज कराएंगे प्राथमिकी
संबंधित लेखपालों के खिलाफ विभागीय और विधिक कार्रवाई करने के आदेश डीएम अनुनय झा ने दिए हैं। इसी क्रम में संबंधित सहायक चकबंदी अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर निर्देश बंदोबस्त अधिकारी ने भी जारी कर दिए हैं। संडीला के मामलों में अनिल वर्मा और रामलखन शिकायत दर्ज कराएंगे, जबकि शाहाबाद के मामलों में अन्नू देवी और सर्वेश कुमार को प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
