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Hardoi News: दहेज हत्या में पति को सात साल, सास-ससुर को दो-दो साल की सजा
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हरदोई। शादी के महज डेढ़ साल बाद एक नवविवाहिता की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में अपर जिला जज (एफटीसी) भूपेंद्र प्रताप ने पति, सास-ससुर को दोषी करार दिया है। पति को सात साल और सास-ससुर को दो-दो साल की सजा सुनाई है। साथ ही 24 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
शाहजहांपुर जनपद के कांठ थाना क्षेत्र के कोर्रिया गांव निवासी राजेश सिंह ने 27 मार्च 2020 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि पुत्री शानू की शादी करीब डेढ़ साल पहले सांडी क्षेत्र के तिलमई खेड़ा गांव निवासी राहुल सिंह से की थी। विवाह में दान-दहेज भी दिया था, लेकिन शादी के बाद से ही पति राहुल सिंह, सास कांति देवी, ससुर राजेश सिंह और अन्य परिजन अतिरिक्त दहेज और चार पहिया वाहन की मांग को लेकर शानू को प्रताड़ित करते थे।
आरोप है कि 26 मार्च 2020 की शाम दहेज की मांग पूरी न होने पर शानू की हत्या कर दी गई और बाद में शव को फांसी पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि शानू ने आत्महत्या की है। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य और गवाहों के बयानों का विश्लेषण करते हुए इस तर्क को नकार दिया। न्यायालय ने निर्णय में कहा है कि शव परीक्षण में ऐसे तथ्य सामने आए जो फंदा लगाकर आत्महत्या की बजाय मृत्यु के बाद शव को लटकाए जाने के संकेत करते हैं। अभियोजन पक्ष के तर्कों को सही माना और फैसला सुनाया है।
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शाहजहांपुर जनपद के कांठ थाना क्षेत्र के कोर्रिया गांव निवासी राजेश सिंह ने 27 मार्च 2020 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि पुत्री शानू की शादी करीब डेढ़ साल पहले सांडी क्षेत्र के तिलमई खेड़ा गांव निवासी राहुल सिंह से की थी। विवाह में दान-दहेज भी दिया था, लेकिन शादी के बाद से ही पति राहुल सिंह, सास कांति देवी, ससुर राजेश सिंह और अन्य परिजन अतिरिक्त दहेज और चार पहिया वाहन की मांग को लेकर शानू को प्रताड़ित करते थे।
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आरोप है कि 26 मार्च 2020 की शाम दहेज की मांग पूरी न होने पर शानू की हत्या कर दी गई और बाद में शव को फांसी पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि शानू ने आत्महत्या की है। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य और गवाहों के बयानों का विश्लेषण करते हुए इस तर्क को नकार दिया। न्यायालय ने निर्णय में कहा है कि शव परीक्षण में ऐसे तथ्य सामने आए जो फंदा लगाकर आत्महत्या की बजाय मृत्यु के बाद शव को लटकाए जाने के संकेत करते हैं। अभियोजन पक्ष के तर्कों को सही माना और फैसला सुनाया है।