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Hardoi News: लंबे रूटों पर घाटे में दौड़ रहीं रोडवेज की बसें, नहीं मिल रहीं सवारियां

Sun, 25 Oct 2026 10:08 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 10:08 PM IST
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Roadways buses operating on long routes are running at a loss due to a lack of passengers.
हरदोई। यात्रियों की सुविधा के लिए जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर शुरू की गईं रोडवेज बसें निगम के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही हैं। कई अहम रूटों पर बसों को सवारियां ही नहीं मिल रही हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सवायजपुर से कानपुर के बीच चलने वाली रोडवेज बस का लोड फैक्टर महज 31 प्रतिशत है। इसी तरह संडीला से चंडीगढ़ चलने वाली बस का लोड फैक्टर सिर्फ 31 प्रतिशत आ रहा है। हरदोई से वाराणसी के बीच चलने वाली रोडवेज बस का लोड फैक्टर 32 प्रतिशत ही है। इसी तरह पाली से टनकपुर के बीच चल रही रोडवेज बस को भी सवारियां नहीं मिल रही हैं। यहां 27 प्रतिशत लोड फैक्टर ही मिल रहा है।
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उदाहरण-1
सवायजपुर से कानपुर के लिए रोडवेज बस चलती हैं। उन्नाव होकर जाने वाली इस बस को क्षेत्रीय लोगों की मांग पर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू के प्रयासों से शुरू कराया गया था। बस तो चल रही है लेकिन इसमें पर्याप्त सवारियां नहीं मिल रहीं। मतलब यह कि घाटे में जाकर भी रोडवेज इस बस को चला रहा है।
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उदाहरण-2
हरदोई से लखनऊ होते हुए वाराणसी के लिए भी बस चलती है। यह रोडवेज बस हरदोई से लखनऊ के लिए पर्याप्त सवारी पा जाती है लेकिन वाराणसी के लिए पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पातीं। बस स्थानीय लोगों की मांग पर ही शुरू की गई थी लेकिन अब जो हालात हैं उनमें यह बस रोडवेज को घाटा ही दे रही है।
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उदाहरण-3
संडीला से चंडीगढ़ के लिए भी रोडवेज बस चलती है। हरिद्वार, सहारनपुर और अंबाला होते हुए चंडीगढ़ जाने वाली इस बस को भी पर्याप्त सवारियां नहीं मिल रही हैं। मतलब यह कि यह बस भी रोडवेज के लिए घाटे का सौदा ही साबित हो रही है। यह बात यह है कि फिलहाल इस बस को बंद करने का कोई विचार रोडवेज नहीं कर रहा है।


उदाहरण-4
पाली से टनकपुर के बीच रोडवेज बस चलती है। यह बस भी सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू के प्रयासों से शुरू हुई थी। कुछ दिनों तक तो बस को खूब सवाारियां मिलीं लेकिन अब हालत बेहद खराब है। बस तो रोज चल रही है लेकिन इसे सवारियां नहीं मिल रहीं।



50 फीसदी से कम लोड फैक्टर पर कटौती का है नियम
निगम के सूत्र बताते हैं कि 50 प्रतिशत से कम लोड फैक्टर होने पर बस चालक और परिचालक के मानदेय से कटौती किए जाने का प्रावधान भी है। हालांकि सामान्य तौर पर कटौती की नहीं जाती है। निगम के अधिकारी भी अनौपचारिक बातचीत में कहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा सवारियां ले जाने में ही चालक-परिचालक का भी हित है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि चालक परिचालक की लापरवाही से लोड फैक्टर पर फर्क पड़ रहा है।

जिन बसों या रूट पर लोड फैक्टर कम है वहां रूट रेशनलाइज्ड किए जा रहे हैं। इस पर भी यात्री नहीं बढ़े तो 90 दिन बाद इन सेवाओं को बंद भी किया जा सकता है।
-गौरव वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज
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