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Hardoi News: एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराने में लापरवाही पर 13 सीडीपीओ का वेतन रोका
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फोटो 13: चार जनवरी के अंक में प्रकाशित खबर।
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हरदोई। कुपोषण के खात्मा के लिए पोषाहार वितरण के साथ ही कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र पर 14 दिन के लिए भर्ती कराए जाने की भी व्यवस्था है।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) पर बच्चों को भर्ती कराने में लापरवाही पर मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा ने नाराजगी जाहिर की। इस पर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने 13 बाल विकास परियोजनाओं के परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है। वहीं, बच्चों को भर्ती न कराने के कारणों पर भी आख्या तलब की है।
गर्भ से ही कुपोषण मिटाने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के माध्यम से संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पंजीकृत लाभार्थियों को पोषाहार का वितरण कराया जाता है। वहीं, स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है। केंद्रों को चिह्नित किए जाने वाले अतिकुपोषित और कुपोषित बच्चों को 14 दिन के लिए एनआरसी पर भर्ती किए जाने की भी व्यवस्था।
इसमें भर्ती होने वाले बच्चे को पौष्टिक आहार के माध्यम से सामान्य श्रेणी में लाने के प्रयास किए जाते हैं। साथ ही अभिभावक को घर पर अगले 14 दिन तक और पौष्टिक आहार दिए जाने के लिए 1,400 रुपये भी दिए जाते हैं। 2,788 कुपोषित बच्चों में से अक्तूबर माह में 15, नवंबर माह में 11 और दिसंबर व जनवरी में 6-6 बच्चों को ही भर्ती कराया गया। इससे जुड़ी खबर को अमर उजाला ने चार जनवरी के अंक में 2,788 बच्चे कुपोषण के शिकार, एनआरसी पर भी छाया सन्नाटा शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का अधिकारियों ने संज्ञान लिया।
खबर का संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने परियोजनावार जानकारी ली। कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने की कम स्थिति पर नाराजगी जाहिर की और कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बाल विकास परियोजना भरखनी, बावन, बेहंदर, भरावन, बिलग्राम, शहर, हरियावां, कोथावां, माधौगंज, मल्लावां, पिहानी, सांडी और संडीला की सीडीपीओ के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है।
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गर्भ से ही कुपोषण मिटाने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के माध्यम से संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पंजीकृत लाभार्थियों को पोषाहार का वितरण कराया जाता है। वहीं, स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है। केंद्रों को चिह्नित किए जाने वाले अतिकुपोषित और कुपोषित बच्चों को 14 दिन के लिए एनआरसी पर भर्ती किए जाने की भी व्यवस्था।
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इसमें भर्ती होने वाले बच्चे को पौष्टिक आहार के माध्यम से सामान्य श्रेणी में लाने के प्रयास किए जाते हैं। साथ ही अभिभावक को घर पर अगले 14 दिन तक और पौष्टिक आहार दिए जाने के लिए 1,400 रुपये भी दिए जाते हैं। 2,788 कुपोषित बच्चों में से अक्तूबर माह में 15, नवंबर माह में 11 और दिसंबर व जनवरी में 6-6 बच्चों को ही भर्ती कराया गया। इससे जुड़ी खबर को अमर उजाला ने चार जनवरी के अंक में 2,788 बच्चे कुपोषण के शिकार, एनआरसी पर भी छाया सन्नाटा शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का अधिकारियों ने संज्ञान लिया।
खबर का संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने परियोजनावार जानकारी ली। कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने की कम स्थिति पर नाराजगी जाहिर की और कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बाल विकास परियोजना भरखनी, बावन, बेहंदर, भरावन, बिलग्राम, शहर, हरियावां, कोथावां, माधौगंज, मल्लावां, पिहानी, सांडी और संडीला की सीडीपीओ के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है।