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Hardoi News: महिलाओं ने कुपोषण पर वार के लिए पोषक आहार बनाकर बदली अपनी तकदीर
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फोटो 22: टीएचआर प्लांट पर काम करतीं महिलाएं। संवाद
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संडीला। गांव की महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। महिलाओं ने कुपोषण पर वार के लिए पोषक आहार बनाकर अपनी तकदीर बदली है। आत्मनिर्भर बनने के साथ ही महिलाएं पुष्टाहार इकाई में प्रतिदिन औसतन पांच टन पोषक आहार का उत्पादन कर रहीं हैं।
गांवों की महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने के लिए पहले स्वयं सहायता समूह बनाए। घर की चौखट लांघी और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर काम शुरू किए। स्वरोजगार के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल बनी हैं। विकास खंड संडीला की ग्राम पंचायत बेगमगंज में आरजू प्रेरणा लघु उद्योग पुष्टाहार उत्पादन इकाई इसका प्रमुख उदाहरण है। करीब 90 लाख रुपये की लागत से दो नवंबर 2023 को स्थापित इस आधुनिक इकाई का संचालन पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में है। यहां लगभग 20 महिला दो पाली में आधुनिक मशीनों के माध्यम से पौष्टिक खाद्य सामग्री तैयार कर रहीं हैं। यह पोषक आहार गर्भवती महिला, किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है।
इकाई की अध्यक्ष पूनम प्रजापति ने बताया कि शुरुआत में यहां पंजीरी बनाई जाती थी, लेकिन शासन की तरफ से नई रेसिपी लागू की गई है। अब आटा-बेसन हलवा और बर्फी, ऊर्जा युक्त हलवा, दलिया-नमकीन, आटा-बेसन सोया बर्फी और दलिया-मूंगदाल खिचड़ी जैसे पौष्टिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों से लाभार्थियों को संतुलित और गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले कई महिलाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन अब उन्हें हर माह लगभग आठ हजार रुपये तक की नियमित आमदनी हो रही है। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजे जाने वाले पोषक आहार से होने वाले लाभ का अंश भी महिलाओं को दिया जाता है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
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यहां से आता कच्चा माल और इन परियोजनाओं को दिया जाताा उत्पाद
प्लांट की अध्यक्ष ने बताया कि कच्चा माल कई स्थानों से मंगवाया जाता है।। चना दाल, मूंग दाल, सोयाबीन तेल, नमक, चीनी और सोया बड़ी स्थानीय बाजार के साथ लखनऊ और कानपुर से खरीदी जाती है। वहीं सूखा दूध बरेली, विटामिन पाउडर महाराष्ट्र, गेहूं एफसीआई और पैकिंग रोल लखनऊ व हरियाणा से मंगाए जाते हैं। प्लांट पर तैयार पुष्टाहार की आपूर्ति संडीला के 240 और माधौगंज के 200 आंगनबाड़ी केंद्रों पर की जाती है।
गांवों की महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने के लिए पहले स्वयं सहायता समूह बनाए। घर की चौखट लांघी और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर काम शुरू किए। स्वरोजगार के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल बनी हैं। विकास खंड संडीला की ग्राम पंचायत बेगमगंज में आरजू प्रेरणा लघु उद्योग पुष्टाहार उत्पादन इकाई इसका प्रमुख उदाहरण है। करीब 90 लाख रुपये की लागत से दो नवंबर 2023 को स्थापित इस आधुनिक इकाई का संचालन पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में है। यहां लगभग 20 महिला दो पाली में आधुनिक मशीनों के माध्यम से पौष्टिक खाद्य सामग्री तैयार कर रहीं हैं। यह पोषक आहार गर्भवती महिला, किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है।
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इकाई की अध्यक्ष पूनम प्रजापति ने बताया कि शुरुआत में यहां पंजीरी बनाई जाती थी, लेकिन शासन की तरफ से नई रेसिपी लागू की गई है। अब आटा-बेसन हलवा और बर्फी, ऊर्जा युक्त हलवा, दलिया-नमकीन, आटा-बेसन सोया बर्फी और दलिया-मूंगदाल खिचड़ी जैसे पौष्टिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों से लाभार्थियों को संतुलित और गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले कई महिलाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन अब उन्हें हर माह लगभग आठ हजार रुपये तक की नियमित आमदनी हो रही है। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजे जाने वाले पोषक आहार से होने वाले लाभ का अंश भी महिलाओं को दिया जाता है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
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प्लांट की अध्यक्ष ने बताया कि कच्चा माल कई स्थानों से मंगवाया जाता है।। चना दाल, मूंग दाल, सोयाबीन तेल, नमक, चीनी और सोया बड़ी स्थानीय बाजार के साथ लखनऊ और कानपुर से खरीदी जाती है। वहीं सूखा दूध बरेली, विटामिन पाउडर महाराष्ट्र, गेहूं एफसीआई और पैकिंग रोल लखनऊ व हरियाणा से मंगाए जाते हैं। प्लांट पर तैयार पुष्टाहार की आपूर्ति संडीला के 240 और माधौगंज के 200 आंगनबाड़ी केंद्रों पर की जाती है।

फोटो 22: टीएचआर प्लांट पर काम करतीं महिलाएं। संवाद