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हाथरस: 120 किलोमीटर का सफर, सहारा सिर्फ एक रोडवेज बस का, यात्रियों को हो रही भारी परेशानी
Fri, 23 Oct 2026 05:00 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Fri, 23 Oct 2026 05:00 PM IST
सार
मार्ग पर रोडवेज बसों की कमी का असर नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है। उन्हें बसों की अनुपलब्धता के कारण अपने समय का निर्धारण करना पड़ता है।
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यूपी रोडवेज बस
- फोटो : संवाद
विस्तार
एटा से मथुरा तक के करीब 120 किलोमीटर लंबे मार्ग पर सार्वजनिक परिवहन की कमी से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एटा डिपो की महज एक रोडवेज बस इस मार्ग पर संचालित होती है। बसों की सीमित उपलब्धता के कारण यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए डग्गेमार वाहनों और निजी बसों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उन्हें जानलेवा सफर तय करने को मजबूर होना पड़ता है।
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मार्ग पर रोडवेज बसों की कमी का असर नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है। उन्हें बसों की अनुपलब्धता के कारण अपने समय का निर्धारण करना पड़ता है। सादाबाद से निजी बसों का संचालन भी जलेसर रोड तक ही सीमित है, जिससे पूरे मार्ग पर पर्याप्त बस सेवाएं नहीं मिल पाती हैं। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए एटा से सहपऊ, सादाबाद होते हुए मथुरा तक रोडवेज बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। डिपो प्रभारी मंगेश कुमार ने बताया कि यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए अधिकारियों से बातचीत करके रोडवेज बसें चलाईं जाएंगी।
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यात्रियों से बातचीत
एटा से मथुरा तक करीब 120 किलोमीटर लंबे मार्ग पर रोडवेज बसों की संख्या बेहद कम होने से आवागमन में परेशानी होती है। बसों का पर्याप्त विकल्प नहीं होने के कारण कई बार निजी बसों और डग्गेमार वाहनों के सहारे सफर करना पड़ता है।-मुन्नीलाल दीक्षित, सहपऊ
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सार्वजनिक परिवहन के पर्याप्त साधन उपलब्ध होने से लोगों को सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। मार्ग पर रोडवेज बसों की संख्या बढ़ने से निजी और डग्गेमार वाहनों पर निर्भरता भी कम हो सकती है। यात्रियों की जरूरत का आंकलन कर बसों की संख्या बढ़ाएं।- दिनेश वार्ष्णेय, समाजसेवी।
पर्याप्त बसें नहीं होने से यात्रियों के पास सीमित विकल्प बचते हैं और कई बार मजबूरी में दूसरे वाहनों से सफर करना पड़ता है। मार्ग पर निगम को अतिरिक्त बसें चलानी चाहिए, जिससे सहपऊ और सादाबाद आदि क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके।- मथुरा प्रसाद, पीहुरा।