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Hathras News: 8 माह की बच्ची ने निगला बटन, एक्स-रे के इंतजार में पांच घंटे अटकी रही जान

संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Wed, 24 Jun 2026 02:33 AM IST
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8 month old baby girl swallows button; life hangs in the balance for five hours while waiting for X ray
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Archive
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जिला अस्पताल में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए स्वतंत्र फीडर की व्यवस्था होने के बावजूद मंगलवार को सुबह आठ बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक जिला अस्पताल की बिजली गुल रही। इससे मरीज और उनके तीमारदार एक्स-रे कक्ष के बाहर जमीन पर बैठकर इंतजार में परेशान रहे। उधर आठ माह की बच्ची दर्द से तड़पती रही। उसने गलती से बटन निगल लिया था और डॉक्टर ने एक्स-रे लिखा था, लेकिन बिजली नहीं थी। दोपहर साढ़े 12 बजे तक पर्चा बनाने वाले काउंटर पर भी सन्नाटा पसरा हुआ था।





केस 1 : गोद में बिलखती मासूम को दादी देती रही थपकी

लोकेश अपनी आठ माह की बेटी लवी और मां लाजवती के साथ सुबह 8 बजे ही अस्पताल पहुंच गए थे। खेल-खेल में मासूम ने जींस के कपड़े बटन निगल लिया था जिसके बाद से वह लगातार रो रही थी। बाल रोग विशेषज्ञ ने फौरन गले से पेट तक का एक्स-रे कराने की सलाह दी ताकि बटन की सही लोकेशन पता चल सके। दादी लाजवती सुबह 8:30 बजे बच्ची को गोद में लेकर एक्स-रे रूम के बाहर बैठ गईं। उन्हें आश्वासन मिला कि 10 बजे बिजली आते ही काम हो जाएगा, लेकिन 12 बज गए किंतु बिजली नहीं आई। इस बीच भूख और दर्द से बेहाल बच्ची रोते-रोते सो जाती और फिर उठकर बिलखने लगती। दोपहर करीब 1 बजे, यानी पूरे 5 घंटे बाद जब बिजली आई, तब जाकर बच्ची का एक्स-रे हो सका और उसका इलाज शुरू हुआ।
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दर्द की अन्य तस्वीरें:



जवाहरलाल (73 वर्ष, नगला उम्मेद) : घुटने के गंभीर दर्द से पीडि़त जवाहरलाल लाठी के सहारे सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंचे थे। साढ़े चार घंटे तक बिना कुछ खाए-पिए सिर्फ इसलिए बैठे रहे क्योंकि दोबारा लौटकर आने की उनमें हिम्मत नहीं थी।
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वेदप्रकाश (21 वर्ष, गांव रहना) : हाथ में फ्रैक्चर के बाद डाली गई रॉड के बोल्ट खुल चुके थे। जख्म से मवाद बह रहा था और भाई शिवा रावत के साथ सुबह 9 बजे से एक्स-रे रूम के बाहर दर्द से कराह रहे थे।



मानसी (8 वर्ष, मेंडू) : पैर में गंभीर सूजन और फ्रैक्चर की जांच के लिए मां मंजू के साथ 5 घंटे तक एक्स-रे कक्ष के बाहर बैठी इंतजार करती रही।



दीपक (22 वर्ष, लाला का नगला) : बीमारी की हालत में चलने की हिम्मत न होने के बावजूद एक्स-रे कक्ष के गेट पर ही फर्श पर बैठे दिखे।




जेनरेटर से कूलर-पंखा और मशीनें रहीं ठप

प्रगतिपुरम बिजलीघर में काम के चलते सुबह 10 बजे तक आपूर्ति बंद रहने की सूचना थी। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी बिजली नहीं आई, तो अस्पताल प्रबंधन में अफरा-तफरी मच गई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक लगातार बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन मिलाते रहे। इस दौरान अस्पताल में जेनरेटर से केवल लाइट, पंखे और कूलर ही चल सके। एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसी हाई-वोल्टेज मशीनें ठप पड़ी रहीं। दोपहर तक सीटी स्कैन के लिए 30 से अधिक मरीज फॉर्म भरकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। हद तो तब हो गई जब दोपहर 12:35 पर बिजली आने के बाद भी तकनीकी खराबी के चलते सीटी स्कैन मशीन चालू नहीं हो सकी।





प्रगतिपुरम बिजली घर पर कार्य के चलते 10 बजे तक आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी थी, लेकिन इसके बाद भी बिजली नहीं आई। इससे कुछ कार्य प्रभावित रहे। बाद में बिजली आने के बाद सभी मरीजों के एक्स-रे कराए गए। डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
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