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Depression: उम्मीदों का बोझ व सूनापन छीन रहा जीने की चाह, इन्होंने दिखाई नादानी, गंवा दी जान

कमल वार्ष्णेय, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 27 Mar 2026 04:07 PM IST
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सार

एक दिन की ओपीडी के लिए आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और अस्पताल में यहां के चिकित्सकों को एक-एक माह का प्रशिक्षण भी दिलाया गया था, जिससे मानसिक बीमार लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग तक पहुंचाया जा सके।

burden of hope and emptiness
अवसाद। - फोटो : freepik
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विस्तार

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर हर 26 मार्च को लगने वाला मन चेतना दिवस अवसाद से ग्रसित युवाओं को राहत नहीं दे पा रहा है। हाथरस जिले में आत्महत्या के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। पिछले वर्ष फंदा लगाकर खुदकुशी करने के 42 मामले प्रकाश में आए, जबकि इस साल ढाई महीने में अब तक आठ लोग आत्महत्या कर चुके हैं।

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हाथरस जिला अस्पताल के नैदानिक मनोविज्ञानी ललित कुमार की मानें तो परिवार के सदस्यों में संवाद की कमी व अत्यधिक उम्मीद के बोझ के तले युवा दबते जा रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत होने वाले मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के नाम पर जिले में केवल कोरम पूरा किया जा रहा है। सभी सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हर बृहस्पतिवार को मन चेतना दिवस लगना अनिवार्य है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा।
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एक दिन की ओपीडी के लिए आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और अस्पताल में यहां के चिकित्सकों को एक-एक माह का प्रशिक्षण भी दिलाया गया था, जिससे मानसिक बीमार लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग तक पहुंचाया जा सके। सीएचसी पर इस कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। केवल रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही हैं। मन चेतना दिवस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया जा रहा है।

मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सप्ताह में एक दिन ओपीडी लगाई जाती है। लोगों को अधिक से अधिक सुविधा देने के लिए निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं समस्या आ रही है तो उसे दिखवाया जाएगा।-डाॅ. राजीव रॉय, सीएमओ

मन कक्ष में भी सुविधा का अभाव
मानसिक रोग विभाग के नाम जिला अस्पताल में केवल दो कमरे का मन कक्ष है, जबकि ओपीडी, साइकोथेरेप्यूटिक रूम, ईसीटी और मेडिकल थैरेपी यूनिट, विभागीय कार्यालय आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। माहौल भी शांतिपूर्ण व तनाव रहित होना चाहिए, लेकिन यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं।

केवल काउंसिलिंग तक सीमित
मन कक्ष की सेवाएं केवल काउंंसिलिंग तक सीमित हैं। मनोचिकित्सा संबंधी उपकरण जैसे ईईजी आदि हैं, लेकिन चिकित्सक व रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में इनका प्रयोग नहीं होता। मन कक्ष में रोजाना औसतन 20 से 25 मरीजों की ओपीडी है। इनमें 60 फीसदी फॉलोअप मरीज होते हैं। तीन दिन ओपीडी और तीन दिन आउटरीच कार्यक्रम चलते हैं, जिसके तहत क्षेत्र में जाकर मनोरोग के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। इस साल स्कूल-कॉलेजों में भी कोई कार्यक्रम नहीं हुए हैं।

काउंसिलिंग लेने वालों में युवा अधिक
नैदानिक मनोविज्ञानिक डाॅ. ललित कुमार ने बताया कि काउंसिलिंग लेने वालों में युवाओं की संख्या अधिक हैं। अवसाद में आने के प्रमुख कारण बेहतर कॅरिअर की आस व अकेलापन है। इस साल अवसाद से ग्रसित दो ऐसे युवा आए, जो आत्महत्या की कोशिश कर चुके थे। इनमें से एक युवती ने परिवार का ध्यान आकर्षित करने के लिए कई बार नस काटी थी। हालांकि चार से पांच बार की काउंसिलिंग में दोनों काफी हद तक ठीक हैं।

इन्होंने दिखाई नादानी.. गंवा दी जान

  • 29 दिसंबर 2025 प्रेमी के शादी से इन्कार करने पर शहर की एक युवती ने पहले वीडियो जारी किया और फिर उसके बाद आत्महत्या कर ली। मां व मौसी के करीब होने के बाद भी युवती ने अपनी परेशानी उनसे साझा नहीं की।
  • 2 जनवरी 2026 को मुरसान के गांव में नौवीं कक्षा के छात्र ने महज मां के डांटने पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
  • 11 जनवरी 2026 को 15 वर्षीय किशोर ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों को पता ही नहीं चल सका कि उनके बेटे ने यह कदम क्यों उठाया।
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