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Hathras News: बारिश के डर से फसल जल्द काटी, अब औने-पौने भाव में बिक रही नमी वाली मक्का

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:28 AM IST
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Crops harvested early due to the fear of rain; moisture-laden maize is now being sold at throwaway prices.
मंडी समिति में सड़क पर सूखती मक्का। संवाद - फोटो : Samvad
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बेमौसम की बरसात किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। इससे घबराए किसानों ने मक्का जल्दी काट दी। जिससे दानों में नमी रह गई। अब मंडी पहुंचने पर इसका पूरा भाव नहीं मिल रहा है। सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 2410 रुपये क्विंटल तय कर दिया है, लेकिन 40 फीसदी की नमी के कारण किसानों को आधी कीमत पर लगभग 1200 रुपये में फसल बेचनी पड़ रही है, जिससे उनकी आंखें नम हो रही हैं। सरकारी क्रय केंद्र खुलने से पहले ही मंडी समिति में रोजाना दो से ढाई हजार क्विंटल मक्का की आवक हो रही है, बड़ी मात्रा में आवक होने से आढ़ती भी इसकी कीमतें अपने मुताबिक तय कर रहे हैं।




साढ़े सात हजार हेक्टेयर में हुई फसल
जिले में करीब 7.5 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का बोई गई है, फसल लगभग तैयार है। किसान अनाज लेकर लगातार मंडी पहुंच रहे हैं। बार-बार खराब हो रहे मौसम से किसानों में चिंता है, इसलिए उन्होंने जल्द कटाई कर ली है। इसी वजह से मक्के के दानों में नमी है। आढ़ती प्रवीन वार्ष्णेय का कहना है कि अधिक नमी वाली मक्का का भंडारण करना नामुमकिन है, क्योंकि यह तुरंत काली पड़ने लगती है और सड़ जाती है। इसीलिए व्यापारी इसे ऊंचे भाव पर खरीदने का जोखिम नहीं उठा रहे हैं।
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नमी करा रही बड़ा नुकसान
मंडी समिति में इन दिनों मक्का की गुणवत्ता और नमी के प्रतिशत के आधार पर बोलियां लग रही हैं। नमी जितनी ज्यादा है, किसानों को उतना ही नुकसान हो रहा है। गांव जवाहरगढ़ के इंदर सिंह ने बताया कि आठ बीघा में फसल की थी। नमी कम होने के बावजूद मंगलवार को 50 क्विंटल मक्का 1850 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचना पड़ा। समर्थन मूल्य के अनुसार उन्हें 28 हजार का नुकसान हुआ है।
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वहीं गांव ज्ञानपुर सिकतरा के सोनू ने बताया कि सात बीघा में फसल की थी। मौसम का भरोसा नहीं, इसलिए जल्दी कटान कर लिया। 60 क्विंटल अनाज बेचा है। जिसका भाव 1461 रुपये प्रति क्विंटल मिला है। समर्थन मूल्य के अनुसार 59,640 रुपये का नुकसान हुआ है।



आढ़तियों पर मजदूरी का भार : आढ़तियों का कहना है कि अनाज को सुखाने के लिए मजदूरी का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सुखाने की मजदूरी अलग से देनी पड़ रही है। आढ़ती अमित कुमार ने बताया मंडी में जगह की कमी है, साथ ही साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं है। सड़क पर मक्का सुखानी पड़ रही है। हवा से अनाज में गंदगी भी पहुंच रही है। जिसकी सफाई कराने में अलग से खर्च करना पड़ रहा है। इस वजह से नमी के अनुसार दाम तय किए जा रहे हैं।



15 जून से शुरू होगी सरकारी खरीद
आगामी 15 जून से जिले के सात सरकारी क्रय केंद्रों पर मक्का की खरीद शुरू होगी। इस वर्ष सूखी और अच्छी गुणवत्ता वाली मक्का के लिए 2,410 प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। डिप्टी आरएमओ कमला प्रसाद यादव ने कहा है कि फसल को खेतों में थोड़ा और पकने दें। अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी लाएं। यदि मक्का निर्धारित मानकों के अनुरूप होगी, तो किसानों को 2,410 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा और कम दामों पर फसल नहीं बेचनी पड़ेगी।
बाक्स--
नमी का प्रतिशत मंडी का भाव

40 प्रतिशत नमी 1,200 प्रति क्विंटल

30 प्रतिशत नमी 1,400 प्रति क्विंटल

20 प्रतिशत नमी 1,650 प्रति क्विंटल

10 प्रतिशत (सूखी) 1,900 प्रति क्विंटल
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