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Hathras News: भीड़ और इतना जाम, कैसे हो आग से बचने का इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 13 Apr 2026 02:15 AM IST
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दुकान बाहर लगाने के कारण गली संकरी हो गई है। संवाद
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शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले पुराने बाजारों की सूरत बहुत बिगड़ चुकी है। तंग गलियां, बेतरतीब लटकते बिजली के तार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बीच हजारों जिंदगियां हर रोज खतरे के साये में जी रहीं हैं। खरीदारी और व्यापार कर रही हैं।
आलम यह है कि इन बाजारों के संकरे रास्तों और उनसे जुड़ी तंग गलियों में दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अगर आग लगने की कोई घटना होती है तो राहत और बचाव कार्य करने में बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
तंग गलियां : फायर टेंडर के लिए नो एंट्री
कमला बाजार, बैनीगंज, नजिहाई और घंटाघर बाजार की गलियां इतनी संकरी हैं कि यहां से दो दुपहिया वाहनों का एक साथ निकलना भी दूभर हो जाता है। ऐसे में अगर किसी दुकान या गोदाम में आग लगती है, तो फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियों का अंदर पहुंचना असंभव है। स्थिति यह है कि पैदल चलने वाले लोगों की भीड़ और सड़कों तक फैला दुकानदारों का सामान राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है।
इन इलाकों में है रेड अलर्ट जैसी स्थिति
नजिहाई व हलवाई खाना : यहां थोक और खुदरा किराना का बड़ा कारोबार है। दोनों बाजारों की चौड़ाई ठीक-ठाक है, लेकिन फुटपाथों पर रखा सामान व उसके बाद खड़े रहने वाले वाहनों से जगह संकरी हो जाती है। इसके साथ ही इन बाजारों से जो गलियां जाती हैं, वहां भी प्रतिष्ठान व गोदाम हैं, जहां दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच सकतीं।
घंटाघर : यह शहर का प्रमुख केंद्र है। जीर्णोद्धार के बाद पिछले चार सालों से घंटाघर के नीचे वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है। इस कारण से यहां से आपात स्थिति में भी कोई बड़ा वाहन नहीं गुजर सकता, जबकि आसपास घना बाजार है।
बैनीगंज : घंटाघर से रामलीला मैदान के बीच का यह इलाका रेडीमेड व हैंडलूम का हब है, जहां सड़कों पर मार्केट लगता है। दुकानों का सामान पूरा फुटपाथ घेरता है, जिससे यहां भी बड़े वाहन निकालने की जगह नहीं मिलती। बैनीगंज से गली बख्तावर की तरफ जाएंगे तो यह रिहायशी इलाका बाजार बन चुका है। हर घर के नीचे शृंगार व कपड़े की दुकानें व भूतल में गोदाम हैं। यहां से बाइक निकालना भी मुश्किल है। यही हालत कमला बाजार, बागला मार्ग, पसरट्टा बाजार आदि जगहों की है।
कागजों में सिमटे सुरक्षा के दावे
नियमों के मुताबिक घने बाजारों में वाटर हाईड्रेंट के साथ-साथ अग्रिशमन यंत्रों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन हाथरस के इन पुराने बाजारों में जमीनी हकीकत इसके उलट है। ज्यादातर दुकानों में न तो अग्निशमन यंत्र हैं और न ही आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था।
केस-1
नवीपुर की संकरी गली में गलीचा फैक्टरी संचालित थी, जिसमें 23 अक्तूबर 2025 को भीषण आग लग गई थी। गली में मिनी फायर टेंडर भी नहीं घुस सका था। ऐसे में 30-30 मीटर की पांच फायर हॉज पाइप जोड़कर नालियों के रास्ते पानी को फैक्टरी तक पहुंचाया गया था। शहर के बीचोंबीच रिहायशी इलाके में लगी इस आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ था।
केस-2
सरकूलर रोड स्थित चेतन कांप्लेक्स में 22 फरवरी को शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। यह हादसा रात में हुआ था, कोई वैंटिलेशन न होने के कारण दुकानों में धुंआ भर गया था, जिससे दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में समय लगा। हादसे में दवा कारोबारी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ था।
केस-३
कमला बाजार में 30 मार्च को मोमोज की दुकान में आग लग गई थी। डीप फ्रीजर में हुई शॉर्ट सर्किट से यह हादसा हुआ था। गनीमत रही कि घटना रात की थी। इसलिए आसानी से फायर टेंडर पहुंच गया था। यदि यह हादसा दिन में हुआ होता तो फायर टेंडर के लिए बाजार में जगह बनाना मुश्किल हो जाता।
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दो वर्ष में 45 बार लगी आग
13 जनवरी 2024 को अलीगढ़ रोड स्थित रबर व नमकीन फैक्टरी में आग।
17 दिसंबर 2024 को गोपीगंज गली तेलियान में पेंट्स के गोदाम में आग।
11 अक्तूबर 2025 को नवीपुर में गलीचा फैक्टरी में आग।
16 अक्तूबर 2025 को खातीखाना स्थित टिंबर गोदाम में आग।
23 अक्तूबर 2025 को नवीपुर में दोबारा गलीचा फैक्टरी में आग।
22 फरवरी 2026 की रात चेतन कांप्लेक्स में शॉर्ट सर्किट से आग।
12 मार्च 2026 को हनुमान गली में घर में आग की बड़ी घटना हुई।
30 मार्च 2026 को कमला बाजार में मोमोज की दुकान में आग।
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बयान
तंग इलाकों के लिए फायर बाइक व मिनी फायर टेंडर हैं, आधुनिक उपकरण भी हैं, लेकिन लोगों को भी सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है। विभाग समय-समय जागरूक करता रहता है। अग्रिशमन यंत्र रखें तथा उसका प्रशिक्षण प्राप्त करें। तंग गलियों में ज्वलनशील पदार्थ की दुकान या गोदाम न खोलें।
आरके वाजपेयी, मुख्य अग्रिशमन अधिकारी
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आलम यह है कि इन बाजारों के संकरे रास्तों और उनसे जुड़ी तंग गलियों में दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अगर आग लगने की कोई घटना होती है तो राहत और बचाव कार्य करने में बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
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तंग गलियां : फायर टेंडर के लिए नो एंट्री
कमला बाजार, बैनीगंज, नजिहाई और घंटाघर बाजार की गलियां इतनी संकरी हैं कि यहां से दो दुपहिया वाहनों का एक साथ निकलना भी दूभर हो जाता है। ऐसे में अगर किसी दुकान या गोदाम में आग लगती है, तो फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियों का अंदर पहुंचना असंभव है। स्थिति यह है कि पैदल चलने वाले लोगों की भीड़ और सड़कों तक फैला दुकानदारों का सामान राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है।
इन इलाकों में है रेड अलर्ट जैसी स्थिति
नजिहाई व हलवाई खाना : यहां थोक और खुदरा किराना का बड़ा कारोबार है। दोनों बाजारों की चौड़ाई ठीक-ठाक है, लेकिन फुटपाथों पर रखा सामान व उसके बाद खड़े रहने वाले वाहनों से जगह संकरी हो जाती है। इसके साथ ही इन बाजारों से जो गलियां जाती हैं, वहां भी प्रतिष्ठान व गोदाम हैं, जहां दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच सकतीं।
घंटाघर : यह शहर का प्रमुख केंद्र है। जीर्णोद्धार के बाद पिछले चार सालों से घंटाघर के नीचे वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है। इस कारण से यहां से आपात स्थिति में भी कोई बड़ा वाहन नहीं गुजर सकता, जबकि आसपास घना बाजार है।
बैनीगंज : घंटाघर से रामलीला मैदान के बीच का यह इलाका रेडीमेड व हैंडलूम का हब है, जहां सड़कों पर मार्केट लगता है। दुकानों का सामान पूरा फुटपाथ घेरता है, जिससे यहां भी बड़े वाहन निकालने की जगह नहीं मिलती। बैनीगंज से गली बख्तावर की तरफ जाएंगे तो यह रिहायशी इलाका बाजार बन चुका है। हर घर के नीचे शृंगार व कपड़े की दुकानें व भूतल में गोदाम हैं। यहां से बाइक निकालना भी मुश्किल है। यही हालत कमला बाजार, बागला मार्ग, पसरट्टा बाजार आदि जगहों की है।
कागजों में सिमटे सुरक्षा के दावे
नियमों के मुताबिक घने बाजारों में वाटर हाईड्रेंट के साथ-साथ अग्रिशमन यंत्रों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन हाथरस के इन पुराने बाजारों में जमीनी हकीकत इसके उलट है। ज्यादातर दुकानों में न तो अग्निशमन यंत्र हैं और न ही आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था।
केस-1
नवीपुर की संकरी गली में गलीचा फैक्टरी संचालित थी, जिसमें 23 अक्तूबर 2025 को भीषण आग लग गई थी। गली में मिनी फायर टेंडर भी नहीं घुस सका था। ऐसे में 30-30 मीटर की पांच फायर हॉज पाइप जोड़कर नालियों के रास्ते पानी को फैक्टरी तक पहुंचाया गया था। शहर के बीचोंबीच रिहायशी इलाके में लगी इस आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ था।
केस-2
सरकूलर रोड स्थित चेतन कांप्लेक्स में 22 फरवरी को शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। यह हादसा रात में हुआ था, कोई वैंटिलेशन न होने के कारण दुकानों में धुंआ भर गया था, जिससे दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में समय लगा। हादसे में दवा कारोबारी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ था।
केस-३
कमला बाजार में 30 मार्च को मोमोज की दुकान में आग लग गई थी। डीप फ्रीजर में हुई शॉर्ट सर्किट से यह हादसा हुआ था। गनीमत रही कि घटना रात की थी। इसलिए आसानी से फायर टेंडर पहुंच गया था। यदि यह हादसा दिन में हुआ होता तो फायर टेंडर के लिए बाजार में जगह बनाना मुश्किल हो जाता।
दो वर्ष में 45 बार लगी आग
13 जनवरी 2024 को अलीगढ़ रोड स्थित रबर व नमकीन फैक्टरी में आग।
17 दिसंबर 2024 को गोपीगंज गली तेलियान में पेंट्स के गोदाम में आग।
11 अक्तूबर 2025 को नवीपुर में गलीचा फैक्टरी में आग।
16 अक्तूबर 2025 को खातीखाना स्थित टिंबर गोदाम में आग।
23 अक्तूबर 2025 को नवीपुर में दोबारा गलीचा फैक्टरी में आग।
22 फरवरी 2026 की रात चेतन कांप्लेक्स में शॉर्ट सर्किट से आग।
12 मार्च 2026 को हनुमान गली में घर में आग की बड़ी घटना हुई।
30 मार्च 2026 को कमला बाजार में मोमोज की दुकान में आग।
बयान
तंग इलाकों के लिए फायर बाइक व मिनी फायर टेंडर हैं, आधुनिक उपकरण भी हैं, लेकिन लोगों को भी सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है। विभाग समय-समय जागरूक करता रहता है। अग्रिशमन यंत्र रखें तथा उसका प्रशिक्षण प्राप्त करें। तंग गलियों में ज्वलनशील पदार्थ की दुकान या गोदाम न खोलें।
आरके वाजपेयी, मुख्य अग्रिशमन अधिकारी