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Hathras News: दाम बढ़ते ही वाणिज्यिक सिलिंडर की मांग गिरी
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ढाबे पर चूल्हे पर खाना बनाते कारीगर।
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कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद जिले में इसकी मांग 20 फीसदी तक घट गई है। 19 किलो वाले वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमत 2125 रुपये से बढ़कर 3118 रुपये पहुंचने के बाद होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और अन्य व्यवसायिक उपभोक्ताओं ने खपत में कटौती कर दी है।
जिले में विभिन्न गैस कंपनियों के करीब 3500 वाणिज्यिक कनेक्शन हैं, जहां पहले प्रतिदिन करीब 1200 कमर्शियल सिलिंडरों की खपत होती थी, लेकिन अब बिक्री घटकर लगभग 250 सिलिंडर प्रतिदिन रह गई है, जिससे गैस एजेंसियों की बिक्री पर भी सीधा असर पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो वाणिज्यिक गैस की मांग और घट सकती है, जिसका असर न केवल गैस एजेंसियों बल्कि छोटे व्यवसायों की लागत और आम ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा।
फिर शुरू हो गई रिफिलिंग
कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में इजाफे के बाद शहर में घरेलू सिलिंडर से कमर्शियल सिलिंडर की रिफिलिंग होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। शहर के तमाम रेस्टोरेंट व होटल संचालकों के यहां सिलिंडरों पर जमी गंदगी आदि देखकर नहीं लगता कि यह सिलिंडर महीनों से रिफिल हुए हैं।
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि हाल के दिनों में शादी-विवाह के कारण कुछ अतिरिक्त मांग थी, लेकिन अब अधिक मास शुरू होने से वह मांग भी लगभग खत्म हो गई है। कैटरिंग और आयोजन से जुड़े लोग भी अब कमर्शियल सिलिंडर लेने से बच रहे हैं।
होटल-रेस्टोरेंट पर भी असर
शहर में करीब 30 होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे देर रात तक संचालित होते हैं, जहां कमर्शियल सिलिंडरों की नियमित खपत होती है। कई बड़े होटलों में अब गैस उपयोग सीमित करने की कोशिश की जा रही है, जबकि छोटे प्रतिष्ठानों ने वैकल्पिक ईंधन अपनाना शुरू कर दिया है।
- कीमतों में बढ़ोतरी के बाद छोटे होटल और ढाबा संचालकों ने कमर्शियल सिलिंडर लेना कम कर दिया है। कई ग्राहक अब रोजाना एक की जगह दो-तीन दिन में एक सिलिंडर ले रहे हैं। बिक्री में करीब 70 से 80 फीसदी तक गिरावट आई है।
राजेश भारती, गैस एजेंसी प्रबंधक।
व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए इतनी महंगी गैस पर काम करना मुश्किल है। कई लोग अब कोयले या डीजल की भट्टियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। घरेलू सिलिंडरों का कमर्शियल उपयोग होने की आशंका बढ़ गई है।
-विजय गर्ग, गैस एजेंसी संचालक।
जिले में विभिन्न गैस कंपनियों के करीब 3500 वाणिज्यिक कनेक्शन हैं, जहां पहले प्रतिदिन करीब 1200 कमर्शियल सिलिंडरों की खपत होती थी, लेकिन अब बिक्री घटकर लगभग 250 सिलिंडर प्रतिदिन रह गई है, जिससे गैस एजेंसियों की बिक्री पर भी सीधा असर पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो वाणिज्यिक गैस की मांग और घट सकती है, जिसका असर न केवल गैस एजेंसियों बल्कि छोटे व्यवसायों की लागत और आम ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा।
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फिर शुरू हो गई रिफिलिंग
कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में इजाफे के बाद शहर में घरेलू सिलिंडर से कमर्शियल सिलिंडर की रिफिलिंग होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। शहर के तमाम रेस्टोरेंट व होटल संचालकों के यहां सिलिंडरों पर जमी गंदगी आदि देखकर नहीं लगता कि यह सिलिंडर महीनों से रिफिल हुए हैं।
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि हाल के दिनों में शादी-विवाह के कारण कुछ अतिरिक्त मांग थी, लेकिन अब अधिक मास शुरू होने से वह मांग भी लगभग खत्म हो गई है। कैटरिंग और आयोजन से जुड़े लोग भी अब कमर्शियल सिलिंडर लेने से बच रहे हैं।
होटल-रेस्टोरेंट पर भी असर
शहर में करीब 30 होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे देर रात तक संचालित होते हैं, जहां कमर्शियल सिलिंडरों की नियमित खपत होती है। कई बड़े होटलों में अब गैस उपयोग सीमित करने की कोशिश की जा रही है, जबकि छोटे प्रतिष्ठानों ने वैकल्पिक ईंधन अपनाना शुरू कर दिया है।
- कीमतों में बढ़ोतरी के बाद छोटे होटल और ढाबा संचालकों ने कमर्शियल सिलिंडर लेना कम कर दिया है। कई ग्राहक अब रोजाना एक की जगह दो-तीन दिन में एक सिलिंडर ले रहे हैं। बिक्री में करीब 70 से 80 फीसदी तक गिरावट आई है।
राजेश भारती, गैस एजेंसी प्रबंधक।
व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए इतनी महंगी गैस पर काम करना मुश्किल है। कई लोग अब कोयले या डीजल की भट्टियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। घरेलू सिलिंडरों का कमर्शियल उपयोग होने की आशंका बढ़ गई है।
-विजय गर्ग, गैस एजेंसी संचालक।