Hathras: 75 वर्ष पुराने ड्रेनेज सिस्टम के सुधरेंगे दिन, 6.50 करोड़ रुपये से बनेगा नया, जलभराव से मिलेगी मुक्त
नगर पालिका 6.50 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट से शहर में एक आधुनिक ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करेगी। नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य शहर के गंदे पानी की निकासी को सुव्यवस्थित करना और बारिश के दौरान होने वाले जलभराव को रोकना है।
विस्तार
हाथरस शहरवासियों को दशकों पुरानी जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए जिला और नगर पालिका प्रशासन ने बड़ी पहल की है। शहर के करीब 75 साल पुराने जर्जर ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह बदलने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए धरातल पर सर्वे का काम भी शुरू कर दिया गया है। सर्वे पूर्ण होते ही प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
नगर पालिका के अधिकारियों के अनुसार शहर का ड्रेनेज सिस्टम वर्ष 1950 के आसपास बना था। आठ किलोमीटर के क्षेत्र में अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई गई थी, तब शहर की आबादी लगभग 50 हजार थी। तब से अब तक शहर की आबादी तीन लाख पहुंच चुकी है। इतने साल में ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त हो चुका है, जिनमें मोहल्ला श्रीनगर, मोहनगंज, मुरसान गेट, मधुगढ़ी, विजयनगर व अन्य पुराने स्थान शामिल हैं। जल निकासी के नाम पर नाले-नालियां बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन ग्रेडिएंट सर्वे (सही ढलान) के बिना किए गए ये कार्य जल निकासी के लिए नाकाफी साबित हुए।
शहर की आवश्यकता के अनुरूप एक बेहतर और बड़े प्लान की आवश्यकता थी, इसलिए एक-एक कर नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसके लिए ढलान का आंकलन जरूरी है। ग्रेडिएंट सर्वे पूरा होते ही ड्रेनेज सिस्टम पर काम शुरू कराया जाएगा।-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस
6.50 करोड़ रुपये से होगा कायाकल्प
नगर पालिका 6.50 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट से शहर में एक आधुनिक ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करेगी। नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य शहर के गंदे पानी की निकासी को सुव्यवस्थित करना और बारिश के दौरान होने वाले जलभराव को रोकना है। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में नगर पालिका व जल निगम ने संयुक्त रूप से काम शुरू कर दिया है। जल निगम ने ग्रेडिएंट सर्वे शुरू कर दिया है। इसमें पाइप से पानी निकलने की दर का आंकलन करते हुए सही ढलान का पता किया जाएगा, जिससे पानी के प्रवाह में कोई दिक्कत न आए।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने की योजना
पानी की निकासी के लिए शहर में उपयुक्त जगह केवल जलेसर रोड ही है। शहर के एक तरफ रेलवे लाइन है और दो तरफ नेशनल हाईवे है। इसलिए केवल सीवेज फार्म की जगह बचती है। पूरे शहर के ढलान को जलसेर रोड की तरफ ही रखा जाएगा। इसी तरह अंडरग्राउंड पाइप लाइन बिछाई जाएगी।
ट्रीटमेंट प्लांट पर हो रहे 122 करोड़ रुपये खर्च
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत नगर पालिका के सीवेज फार्म की जगह पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। इस पर सरकार लगभग 122 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। 62 करोड़ रुपये इसके निर्माण में खर्च किए जा रहे हैं, जबकि लगभग 60 करोड़ रुपये 15 साल तक इसके संचालन के लिए संबंधित कंपनी को दिए जाएंगे। ड्रेनेज के साथ-साथ शहर के सीवेज का ढलान भी इसी ओर रखा जाएगा।
शहर में ग्रेडिएंट सर्वे (ढाल का आकलन) इसलिए जरूरी
- यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी का बहाव बिना किसी पंपिंग के प्राकृतिक रूप से एसटीपी की ओर रहे।
- पुराने और बंद हो चुके ड्रेनेज पॉइंट्स की पहचान कर उन्हें नए सिस्टम में जोड़ा जा सके।
- आगामी 50 वर्षों की आबादी और पानी की निकासी की जरूरतों को ध्यान में रखा जा सके।
