{"_id":"69c048ad4d8e5a666c09a2c4","slug":"gas-connections-double-the-number-of-electricity-connections-companies-baffled-hathras-news-c-56-1-hts1004-146188-2026-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: बिजली से दोगुने गैस कनेक्शन, हैरत में कंपनियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: बिजली से दोगुने गैस कनेक्शन, हैरत में कंपनियां
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 23 Mar 2026 01:23 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
हाल ही में बिजली और गैस उपभोक्ताओं के आंकड़ों का मिलान किया गया, जिसमें चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। जिले में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या महज 2.35 लाख है, जबकि घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या 4.55 लाख है। बिजली कनेक्शन के मुकाबले लगभग दोगुने गैस कनेक्शन होने से सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं कनेक्शनों का इस्तेमाल घरेलू गैस की कालाबाजारी के लिए तो नहीं हो रहा।
सामान्यत: एक परिवार या एक घर में एक बिजली का मीटर होता है और उसी के अनुपात में गैस कनेक्शन की आवश्यकता होती है, लेकिन 2.20 लाख कनेक्शनों का यह भारी अंतर कहीं न कहीं यह भी स्पष्ट कर रहा है कि एक घर में एक से अधिक कनेक्शन हैं और किल्लत के दौर में इनके नाम पर बुकिंग कर सिलिंडरों का स्टॉक किया जा रहा है।
यह समस्या पुरानी है। पूर्व में भी गैस कंपनियों ने एकीकृत सॉफ्टवेयर के जरिये एक नाम वाले कनेक्शन छांटे थे। इसके बाद दोहरे कनेक्शन बंद किए गए थे। फिर इसके विकल्प के रूप में लोगों ने परिवार में ही दूसरे सदस्यों के नाम से कनेक्शन ले लिए। एक घर एक रसोई के बावजूद हजारों ऐसे परिवार हैं, जिन पर कई कनेक्शन हैं, इसलिए बाजार में कालाबाजारी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दोहरे कनेक्शन वाले परिवारों की तलाश
दोहरे कनेक्शन वाले परिवारों पर शिकंजा कसने के लिए गैस कंपनियों व प्रशासन ने तैयारी कर दी है। इस क्रम में पहले 33 गैस एजेंसियों के निष्क्रिय 50,532 कनेक्शन बंद किए गए हैं। ये वो कनेक्शन हैं, जो महीनों से गैस नहीं ले रहे थे। इनके अलावा अब उन उपभोक्ताओं को तलाशा जा रहा है, जिन पर किताब नहीं है, इसलिए केवाईसी के लिए गैस की किताब और साथ में पहचान पत्र मांगा जा रहा है, जिससे दोहरीकरण को पकड़ा जा सके।
किताब खोजने में जुटे उपभोक्ता
ऑनलाइन बुकिंग के सहारे चल रहे हजारों उपभोक्ताओं की किताबें गायब हैं। अब ये केवाईसी के लिए किताब तलाश रहे हैं। हॉकरों ने भी किताब पर बुकिंग चढ़ाने की जहमत नहीं उठाई। उपभोक्ता लापरवाह रहे और इस लापरवाही का लाभ हॉकरों ने डिलीवरी में हेरा-फेरी कर उठाया। शनिवार को नगर पालिका स्थित गैस एजेंसी पर पहुंचे नवीपुर के सचिन के साथ भी यही समस्या आई। पासबुक न होने के कारण उनकी केवाईसी नहीं हो सकी और इसी कारण 13 मार्च की बुकिंग के बावजूद उन्हें सिलिंडर नहीं मिला। सचिन जैसे अन्य उपभोक्ता भी अब अपनी किताब तलाशने में लगे हैं।
-- -- -
बुकिंग के लिए शहर में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन में डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। एक से अधिक कंपनी से कनेक्शन लेने वाले परिवारों पर नजर रखी जा रही है। शासन से निर्देश मिलते हैं तो जिले में परिवारों की संख्या से गैस कनेक्शनों की भी तुलना की जाएगी। एलपीजी गैस की कमी नहीं है, स्थिति सामान्य है।
-ध्रुवराज यादव, जिला पूर्ति अधिकारी
एक घर में एक ही बिजली कनेक्शन होता है। परिवार अलग रह रहे हों, तभी लोग अपने नाम से दूसरे कनेक्शन लेते हैं। ऐसे एक या दो फीसदी ही कनेक्शन होंगे, जो एक ही पते पर हैं। शहर में 43 हजार कनेक्शन हैं, जिनमें से 34 हजार घरेलू कनेक्शन हैं।
संदीप कुमार, एक्सईएन प्रथम
Trending Videos
सामान्यत: एक परिवार या एक घर में एक बिजली का मीटर होता है और उसी के अनुपात में गैस कनेक्शन की आवश्यकता होती है, लेकिन 2.20 लाख कनेक्शनों का यह भारी अंतर कहीं न कहीं यह भी स्पष्ट कर रहा है कि एक घर में एक से अधिक कनेक्शन हैं और किल्लत के दौर में इनके नाम पर बुकिंग कर सिलिंडरों का स्टॉक किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह समस्या पुरानी है। पूर्व में भी गैस कंपनियों ने एकीकृत सॉफ्टवेयर के जरिये एक नाम वाले कनेक्शन छांटे थे। इसके बाद दोहरे कनेक्शन बंद किए गए थे। फिर इसके विकल्प के रूप में लोगों ने परिवार में ही दूसरे सदस्यों के नाम से कनेक्शन ले लिए। एक घर एक रसोई के बावजूद हजारों ऐसे परिवार हैं, जिन पर कई कनेक्शन हैं, इसलिए बाजार में कालाबाजारी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दोहरे कनेक्शन वाले परिवारों की तलाश
दोहरे कनेक्शन वाले परिवारों पर शिकंजा कसने के लिए गैस कंपनियों व प्रशासन ने तैयारी कर दी है। इस क्रम में पहले 33 गैस एजेंसियों के निष्क्रिय 50,532 कनेक्शन बंद किए गए हैं। ये वो कनेक्शन हैं, जो महीनों से गैस नहीं ले रहे थे। इनके अलावा अब उन उपभोक्ताओं को तलाशा जा रहा है, जिन पर किताब नहीं है, इसलिए केवाईसी के लिए गैस की किताब और साथ में पहचान पत्र मांगा जा रहा है, जिससे दोहरीकरण को पकड़ा जा सके।
किताब खोजने में जुटे उपभोक्ता
ऑनलाइन बुकिंग के सहारे चल रहे हजारों उपभोक्ताओं की किताबें गायब हैं। अब ये केवाईसी के लिए किताब तलाश रहे हैं। हॉकरों ने भी किताब पर बुकिंग चढ़ाने की जहमत नहीं उठाई। उपभोक्ता लापरवाह रहे और इस लापरवाही का लाभ हॉकरों ने डिलीवरी में हेरा-फेरी कर उठाया। शनिवार को नगर पालिका स्थित गैस एजेंसी पर पहुंचे नवीपुर के सचिन के साथ भी यही समस्या आई। पासबुक न होने के कारण उनकी केवाईसी नहीं हो सकी और इसी कारण 13 मार्च की बुकिंग के बावजूद उन्हें सिलिंडर नहीं मिला। सचिन जैसे अन्य उपभोक्ता भी अब अपनी किताब तलाशने में लगे हैं।
बुकिंग के लिए शहर में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन में डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। एक से अधिक कंपनी से कनेक्शन लेने वाले परिवारों पर नजर रखी जा रही है। शासन से निर्देश मिलते हैं तो जिले में परिवारों की संख्या से गैस कनेक्शनों की भी तुलना की जाएगी। एलपीजी गैस की कमी नहीं है, स्थिति सामान्य है।
-ध्रुवराज यादव, जिला पूर्ति अधिकारी
एक घर में एक ही बिजली कनेक्शन होता है। परिवार अलग रह रहे हों, तभी लोग अपने नाम से दूसरे कनेक्शन लेते हैं। ऐसे एक या दो फीसदी ही कनेक्शन होंगे, जो एक ही पते पर हैं। शहर में 43 हजार कनेक्शन हैं, जिनमें से 34 हजार घरेलू कनेक्शन हैं।
संदीप कुमार, एक्सईएन प्रथम