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Hathras News: लोक अदालत का आदेश, फिर भी नहीं पकड़े बंदर
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 27 Apr 2026 02:29 AM IST
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बंदरों का झुंड। संवाद
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न्यायालय के आदेश के बाद भी नगर पालिका परिषद हाथरस ने तीन साल बाद भी बंदरों को पकड़ने की कवायद नहीं की है। सिविल जज सीनियर डिवीजन ने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा था, लेकिन नगर पालिका ने बंदर न पकड़ते हुए मामले में रिवीजन डाला है, जिसकी सुनवाई सेशन न्यायालय में चल रही है और सोमवार को इसकी तारीख है।
जिले में बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके उत्पात पर अंकुश लगाने की मांग को लेकर समाजसेवी मधुशंकर अग्रवाल ने वर्ष 2022 में स्थायी लोक अदालत में पीएलए वाद दायर किया था। इसमें डीएम, प्रमुख वन्य रक्षक जीव लखनऊ, प्रभारी वनाधिकारी हाथरस और नगर पालिका ईओ को पार्टी बनाया गया था।
इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 21 मई 2023 को आदेश दिया था कि नगर पालिका ईओ सुरक्षित ढंग से याची को साथ लेते हुए बंदरों को पकड़वा कर संरक्षित स्थान पर छुड़वाएंगे। आदेश में यह भी था कि बाकी विपक्षी इस कार्य में ईओ की मदद करेंगे, लेकिन पालिका की ओर से कोई कवायद नहीं हुई। याची की अपील पर सिविल जज ने 31 जनवरी 2026 को आदेश के अनुपालन के लिए डीएम को पत्र लिखा था तथा 17 फरवरी तक रिपोर्ट तलब की थी।
इस मामले में नगर पालिका परिषद हाथरस की ओर से ईओ ने आपत्ति दाखिल की। कहा कि बंदर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 में संरक्षित प्राणी है। इसके साथ ही उनके पास पकड़ने या जिले से बाहर छोड़ने के लिए कोई प्रशिक्षित टीम नहीं है। यदि वन विभाग टीम उपलब्ध कराए तो वे सहयोग कर सकते हैं।
इधर, नगर पालिका ने कोर्ट के क्षेत्राधिकार को लेकर भी प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे, जो कि न्यायालय ने खारिज कर दिए। इस पर निचली अदालत की कार्रवाई पर स्टे के लिए पालिका ने जिला जज के यहां रिवीजन डाला था, जिस पर एडीजे कोर्ट प्रथम में सुनवाई चल रही है। इसी रिवीजन पर सोमवार की तारीख लगी है।
लगातार हो रहीं घटनाएं
एक तरफ न्यायालय में वन विभाग और नगर पालिका गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने का प्रयास कर रहे हैं, दूसरी ओर उत्पाती बंदरों के कारण लगातार घटनाएं हो रही हैं। जिला अस्पताल में लगने वाले 30 फीसदी एआरवी बंदर काटने के कारण लगाए जा रहे हैं। बीती सात अप्रैल को जलेसर रोड स्थित अक्रूर कॉलोनी में बंदरों के हमले में युवती की छत से गिरकर मौत हो गई थी।
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इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 21 मई 2023 को आदेश दिया था कि नगर पालिका ईओ सुरक्षित ढंग से याची को साथ लेते हुए बंदरों को पकड़वा कर संरक्षित स्थान पर छुड़वाएंगे। आदेश में यह भी था कि बाकी विपक्षी इस कार्य में ईओ की मदद करेंगे, लेकिन पालिका की ओर से कोई कवायद नहीं हुई। याची की अपील पर सिविल जज ने 31 जनवरी 2026 को आदेश के अनुपालन के लिए डीएम को पत्र लिखा था तथा 17 फरवरी तक रिपोर्ट तलब की थी।
इस मामले में नगर पालिका परिषद हाथरस की ओर से ईओ ने आपत्ति दाखिल की। कहा कि बंदर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 में संरक्षित प्राणी है। इसके साथ ही उनके पास पकड़ने या जिले से बाहर छोड़ने के लिए कोई प्रशिक्षित टीम नहीं है। यदि वन विभाग टीम उपलब्ध कराए तो वे सहयोग कर सकते हैं।
इधर, नगर पालिका ने कोर्ट के क्षेत्राधिकार को लेकर भी प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे, जो कि न्यायालय ने खारिज कर दिए। इस पर निचली अदालत की कार्रवाई पर स्टे के लिए पालिका ने जिला जज के यहां रिवीजन डाला था, जिस पर एडीजे कोर्ट प्रथम में सुनवाई चल रही है। इसी रिवीजन पर सोमवार की तारीख लगी है।
लगातार हो रहीं घटनाएं
एक तरफ न्यायालय में वन विभाग और नगर पालिका गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने का प्रयास कर रहे हैं, दूसरी ओर उत्पाती बंदरों के कारण लगातार घटनाएं हो रही हैं। जिला अस्पताल में लगने वाले 30 फीसदी एआरवी बंदर काटने के कारण लगाए जा रहे हैं। बीती सात अप्रैल को जलेसर रोड स्थित अक्रूर कॉलोनी में बंदरों के हमले में युवती की छत से गिरकर मौत हो गई थी।

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