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Hathras News: ग्लोरी गार्डन मामले में सिविल कोर्ट में प्रकीर्ण वाद दर्ज
Sun, 02 Aug 2026 02:19 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 02 Aug 2026 02:19 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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ग्लोरी गार्डन कॉलोनी निवासी मधुशंकर अग्रवाल ने सिविल कोर्ट में प्रकीर्ण वाद दर्ज कराते हुए प्रशासन व कॉलोनाइजर पर मंदिर में पूजा करने से रोकने का आरोप लगाया है, जबकि संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 के अंतर्गत यह उनका व कॉलोनी के लोगों को संवैधानिक हक है। प्रकरण में शनिवार को सुनवाई हुई।
गौरतलब है कि नगर पालिका परिषद हाथरस ने ग्लोरी गार्डन के कॉलोनाइजर मनोज यादव के खिलाफ चकरोड, नाली व पोखर को घेरने के आरोप में 26 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रशासनिक जांच के बाद यह कार्रवाई की गई थी।
स्थानीय निवासी मधुशंकर अग्रवाल का आरोप है कि जांच के दौरान 24 जुलाई को प्रतिवादीगण के अधीनस्थों ने वादी एवं अन्य भक्तों को मंदिर में प्रवेश व पूजा-अर्चना करने से रोक दिया और भविष्य में पूजा न करने की धमकी दी गई।
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मधुशंकर अग्रवाल ने इस संबंध में 30 जुलाई को सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) में प्रदेश सरकार, डीएम, ईओ नगर पालिका व कॉलोनाइजर मनोज यादव के खिलाफ वाद दायर करते हुए मंदिर में निर्बाध आवागमन, दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की।
कोर्ट ने 80(2) सीपीसी की दी छूट
सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों पर सिविल वाद से पहले धारा 80(2) सीपीसी के अंतर्गत नोटिस देकर विपक्षी को समय दिया जाता है, लेकिन मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण कोर्ट ने तात्कालिकता देखते हुए इससे छूट दे दी और प्रकीर्ण वाद दर्ज कर लिया। सुनवाई की तिथि 1 अगस्त लगाई गई थी।
जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी
शनिवार को सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग की कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रकरण में अपना पक्ष रखने के लिए शासकीय अधिवक्ता सिविल को नोटिस जारी किया है। प्रकरण में सुनवाई की अगली तिथि तीन अगस्त लगाई गई है।
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गौरतलब है कि नगर पालिका परिषद हाथरस ने ग्लोरी गार्डन के कॉलोनाइजर मनोज यादव के खिलाफ चकरोड, नाली व पोखर को घेरने के आरोप में 26 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रशासनिक जांच के बाद यह कार्रवाई की गई थी।
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स्थानीय निवासी मधुशंकर अग्रवाल का आरोप है कि जांच के दौरान 24 जुलाई को प्रतिवादीगण के अधीनस्थों ने वादी एवं अन्य भक्तों को मंदिर में प्रवेश व पूजा-अर्चना करने से रोक दिया और भविष्य में पूजा न करने की धमकी दी गई।
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मधुशंकर अग्रवाल ने इस संबंध में 30 जुलाई को सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) में प्रदेश सरकार, डीएम, ईओ नगर पालिका व कॉलोनाइजर मनोज यादव के खिलाफ वाद दायर करते हुए मंदिर में निर्बाध आवागमन, दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की।
कोर्ट ने 80(2) सीपीसी की दी छूट
सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों पर सिविल वाद से पहले धारा 80(2) सीपीसी के अंतर्गत नोटिस देकर विपक्षी को समय दिया जाता है, लेकिन मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण कोर्ट ने तात्कालिकता देखते हुए इससे छूट दे दी और प्रकीर्ण वाद दर्ज कर लिया। सुनवाई की तिथि 1 अगस्त लगाई गई थी।
जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी
शनिवार को सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग की कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रकरण में अपना पक्ष रखने के लिए शासकीय अधिवक्ता सिविल को नोटिस जारी किया है। प्रकरण में सुनवाई की अगली तिथि तीन अगस्त लगाई गई है।