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Hathras News: मेंडू-हाथरस जंक्शन रेलवे ट्रैक जोड़ने की तैयारी, फाइनल लोकेशन सर्वे शुरू
Sun, 02 Aug 2026 02:18 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 02 Aug 2026 02:18 AM IST
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हाथरस जंक्शन स्टेशन का यार्ड, जहां से रेलवे ट्रैक को मेंडू से जोड़ा जाना है। संवाद
- फोटो : Samvad
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विनीत चौरसिया
हाथरस। पूर्वोत्तर रेलवे के मेंडू और उत्तर मध्य रेलवे के हाथरस जंक्शन स्टेशन को रेल लाइन से जोड़ने की वर्षों पुरानी योजना अब धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद उत्तर मध्य रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) शुरू करा दिया है।
सर्वे का कार्य इसी वर्ष नवंबर-दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नई रेल लाइन के निर्माण, तकनीकी स्वीकृतियों और बजट आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह परियोजना केवल हाथरस ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी रेल नेटवर्क के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब दो दशक से लंबित इस मांग के पूरी होने से दो प्रमुख रेलवे जोन उत्तर मध्य रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे का सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।
करीब दो किलोमीटर नए ट्रैक की जरूरत
मेंडू स्टेशन और हाथरस जंक्शन के बीच कुल दूरी लगभग तीन किलोमीटर है। इनमें से करीब दो किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाकर दोनों ट्रैक को आपस में जोड़ा जा सकता है। हालांकि इस कार्य में रेलवे को तकनीकी दृष्टि से जटिल इंजीनियरिंग कार्य करने होंगे, लेकिन इसके पूरा होने पर रेलवे को एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रेल मार्ग मिल जाएगा।
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दिल्ली-हावड़ा और मथुरा-कासगंज-बरेली-मैलानी रेलखंड जुड़ेंगे
यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम है। इसके पूरा होने पर उत्तर मध्य रेलवे का दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलखंड सीधे पूर्वोत्तर रेलवे के मथुरा-कासगंज-बरेली-मैलानी रेलमार्ग से जुड़ जाएगा। इससे दोनों जोन के बीच ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा और जरूरत पड़ने पर ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से भी संचालित किया जा सकेगा।
अलीगढ़-मथुरा के बीच रेल संपर्क को मिलेगा नया आयाम।
नई रेल लाइन बनने के बाद अलीगढ़ और मथुरा के बीच रेल संपर्क को नई दिशा मिलेगी। मथुरा से होकर मुंबई जाने वाली कुछ ट्रेनों को भविष्य में हाथरस सिटी, मेंडू, हाथरस जंक्शन, अलीगढ़ और खुर्जा मार्ग से चलाने की संभावना बनेगी। इसी तरह अलीगढ़, टूंडला और दिल्ली की दिशा से आने वाली ट्रेनों को भी हाथरस सिटी के रास्ते पूर्वोत्तर रेलवे के नेटवर्क पर भेजा जा सकेगा। इससे यात्रियों को नए रेल विकल्प उपलब्ध होंगे और परिचालन में भी लचीलापन आएगा।
मथुरा-अलीगढ़ की दूरी होगी करीब 80 किमी
वर्तमान में सड़क मार्ग से मथुरा और अलीगढ़ के बीच की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। प्रस्तावित रेल लिंक बनने के बाद रेल मार्ग से यह दूरी करीब 80 किलोमीटर होगी। इसमें मथुरा से मेंडू तक लगभग 45 किलोमीटर, प्रस्तावित नई रेल लाइन करीब तीन किलोमीटर और हाथरस जंक्शन से अलीगढ़ तक लगभग 32 किलोमीटर का सफर शामिल होगा।
दो दशक से उठ रही मांग
मेंडू और हाथरस जंक्शन को जोड़ने की मांग करीब 20 वर्षों से उठती रही है, लेकिन मामला पूर्वोत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के बीच समन्वय के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब रेलवे बोर्ड की स्वीकृति और उत्तर मध्य रेलवे की पहल के बाद परियोजना ने गति पकड़ ली है। यदि सर्वे के बाद निर्माण कार्य समय पर शुरू होता है तो आने वाले वर्षों में हाथरस देश के दो महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क को जोड़ने वाले प्रमुख जंक्शन के रूप में उभर सकता है।
हाथरस जंक्शन से मेंडू के रेलवे लिंक को जोड़े जाने के लिए अब हमारी ओर से फाइनल लोकेशन सर्वे शुरू कर दिया गया है। उम्मीद की जा रही है इसी साल नवंबर या दिसंबर तक सर्वे को पूरा कर लिया जाएगा।
-डाॅ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, प्रयागराज।
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हाथरस। पूर्वोत्तर रेलवे के मेंडू और उत्तर मध्य रेलवे के हाथरस जंक्शन स्टेशन को रेल लाइन से जोड़ने की वर्षों पुरानी योजना अब धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद उत्तर मध्य रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) शुरू करा दिया है।
सर्वे का कार्य इसी वर्ष नवंबर-दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नई रेल लाइन के निर्माण, तकनीकी स्वीकृतियों और बजट आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह परियोजना केवल हाथरस ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी रेल नेटवर्क के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब दो दशक से लंबित इस मांग के पूरी होने से दो प्रमुख रेलवे जोन उत्तर मध्य रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे का सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।
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करीब दो किलोमीटर नए ट्रैक की जरूरत
मेंडू स्टेशन और हाथरस जंक्शन के बीच कुल दूरी लगभग तीन किलोमीटर है। इनमें से करीब दो किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाकर दोनों ट्रैक को आपस में जोड़ा जा सकता है। हालांकि इस कार्य में रेलवे को तकनीकी दृष्टि से जटिल इंजीनियरिंग कार्य करने होंगे, लेकिन इसके पूरा होने पर रेलवे को एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रेल मार्ग मिल जाएगा।
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दिल्ली-हावड़ा और मथुरा-कासगंज-बरेली-मैलानी रेलखंड जुड़ेंगे
यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम है। इसके पूरा होने पर उत्तर मध्य रेलवे का दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलखंड सीधे पूर्वोत्तर रेलवे के मथुरा-कासगंज-बरेली-मैलानी रेलमार्ग से जुड़ जाएगा। इससे दोनों जोन के बीच ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा और जरूरत पड़ने पर ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से भी संचालित किया जा सकेगा।
अलीगढ़-मथुरा के बीच रेल संपर्क को मिलेगा नया आयाम।
नई रेल लाइन बनने के बाद अलीगढ़ और मथुरा के बीच रेल संपर्क को नई दिशा मिलेगी। मथुरा से होकर मुंबई जाने वाली कुछ ट्रेनों को भविष्य में हाथरस सिटी, मेंडू, हाथरस जंक्शन, अलीगढ़ और खुर्जा मार्ग से चलाने की संभावना बनेगी। इसी तरह अलीगढ़, टूंडला और दिल्ली की दिशा से आने वाली ट्रेनों को भी हाथरस सिटी के रास्ते पूर्वोत्तर रेलवे के नेटवर्क पर भेजा जा सकेगा। इससे यात्रियों को नए रेल विकल्प उपलब्ध होंगे और परिचालन में भी लचीलापन आएगा।
मथुरा-अलीगढ़ की दूरी होगी करीब 80 किमी
वर्तमान में सड़क मार्ग से मथुरा और अलीगढ़ के बीच की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। प्रस्तावित रेल लिंक बनने के बाद रेल मार्ग से यह दूरी करीब 80 किलोमीटर होगी। इसमें मथुरा से मेंडू तक लगभग 45 किलोमीटर, प्रस्तावित नई रेल लाइन करीब तीन किलोमीटर और हाथरस जंक्शन से अलीगढ़ तक लगभग 32 किलोमीटर का सफर शामिल होगा।
दो दशक से उठ रही मांग
मेंडू और हाथरस जंक्शन को जोड़ने की मांग करीब 20 वर्षों से उठती रही है, लेकिन मामला पूर्वोत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के बीच समन्वय के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब रेलवे बोर्ड की स्वीकृति और उत्तर मध्य रेलवे की पहल के बाद परियोजना ने गति पकड़ ली है। यदि सर्वे के बाद निर्माण कार्य समय पर शुरू होता है तो आने वाले वर्षों में हाथरस देश के दो महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क को जोड़ने वाले प्रमुख जंक्शन के रूप में उभर सकता है।
हाथरस जंक्शन से मेंडू के रेलवे लिंक को जोड़े जाने के लिए अब हमारी ओर से फाइनल लोकेशन सर्वे शुरू कर दिया गया है। उम्मीद की जा रही है इसी साल नवंबर या दिसंबर तक सर्वे को पूरा कर लिया जाएगा।
-डाॅ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, प्रयागराज।