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Hathras News: रीसस मकाक बंदर संरक्षित प्रजाति नहीं.. पकड़ने की छूट
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 04 May 2026 02:41 AM IST
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मंडी समिति में बंदर। संवाद
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जिले में सभी नगर निकाय अपने-अपने क्षेत्र में बंदरों की गिनती करेंगे। उत्पाती बंदरों को भी चिह्नित किया गया जाएगा। बंदरों और मनुष्यों के बीच बढ़ते संघर्ष की घटनाओं के चलते शासन ने एक व्यापक अंतरिम कार्ययोजना जारी की है।
हाईकोर्ट में विचाराधीन एक जनहित याचिका के अनुपालन में शासन ने योजना पर तत्काल अमल करने के निर्देश दिए हैं। एक महीने के अंदर संघर्ष बाहुल्य क्षेत्र व उत्पाती बंदरों की संख्या उपलब्ध करानी होगी।
जिले में पाए जाने वाले बंदरों की प्रजाति रीसस मकाक है। शासन ने साफ किया है कि यह प्रजाति वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में संरक्षित नहीं है। इसलिए पकड़ने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
इन बंदरों को रिहायशी इलाके से पकड़कर जिले के ही वन्य क्षेत्र में छोड़े जाएंगे। संरक्षित क्षेत्रों में इन्हें नहीं छोड़ा जाएगा। अब तक नगर निकाय व वन विभाग दोनों एक-दूसरे पर पलड़ा झाड़ते थे, लेकिन शासनादेश में साफ है कि वन विभाग केवल सहयोग में करेगा।
नगर पालिका के ईओ कमेटी में सचिव
शासन ने हर जिले के लिए कमेटी का गठन किया है, जो इस कार्य की समीक्षा करेगी। कमेटी के अध्यक्ष डीएम व सचिव नगर पालिका परिषद हाथरस के ईओ सचिव बनाया गया है। एसपी, प्रभागीय वनाधिकारी, सीवीओ, डीपीआरओ, संबंधित ब्लॉक के बीडीओ, अन्य नगर पालिका व पंचायत के ईओ को सदस्य बनाया गया है।
जागरूकता अभियान और कचरा प्रबंधन
योजना में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोग बंदरों को खुले में खाना न खिलाएं, क्योंकि इससे वे आक्रामक हो जाते हैं। इसके लिए स्कूलों, धार्मिक स्थलों और बाजारों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही, शहरों में कचरा प्रबंधन को दुरुस्त किया जाएगा ताकि बंदरों को खुले में खाद्य सामग्री न मिले।
तत्काल उपाय
-हॉटस्पॉट की पहचान: सभी नगर निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में उन इलाकों की पहचान करें जहां बंदरों का अधिक आतंक है।
-हेल्पलाइन नंबर: संघर्ष की घटनाओं की सूचना देने के लिए प्रत्येक नगर निकाय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा।
-बंदरों को पकड़ना : बंदरों को पकडऩे के लिए कुशल व्यक्तियों या संस्थाओं का पंजीकरण किया जाएगा। पकड़े गए बंदरों को मानवीय आबादी से दूर सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।
--
दीर्घकालिक उपाय
- प्रजनन नियंत्रण : बंदरों की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर उनकी प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करने पर काम होगा।
- रेस्क्यू सेंटर : शहरी निकायों में बंदरों को स्थाई रूप से रखने के लिए डेडिकेटेड रेस्क्यू सेंटर्स की स्थापना की जाएगी।
- फलों के पेड़ों का रोपण : सार्वजनिक क्षेत्रों और वन क्षेत्रों के बाहरी हिस्सों में फलदार वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि बंदरों को भोजन के लिए शहरी बस्तियों में न आना पड़े।
--
- बंदरों के संबंध में दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं। निर्देशों के क्रम में इनके चिह्नीकरण का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा। पकड़ने को लेकर भी विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है।
- रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस
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हाईकोर्ट में विचाराधीन एक जनहित याचिका के अनुपालन में शासन ने योजना पर तत्काल अमल करने के निर्देश दिए हैं। एक महीने के अंदर संघर्ष बाहुल्य क्षेत्र व उत्पाती बंदरों की संख्या उपलब्ध करानी होगी।
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जिले में पाए जाने वाले बंदरों की प्रजाति रीसस मकाक है। शासन ने साफ किया है कि यह प्रजाति वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में संरक्षित नहीं है। इसलिए पकड़ने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
इन बंदरों को रिहायशी इलाके से पकड़कर जिले के ही वन्य क्षेत्र में छोड़े जाएंगे। संरक्षित क्षेत्रों में इन्हें नहीं छोड़ा जाएगा। अब तक नगर निकाय व वन विभाग दोनों एक-दूसरे पर पलड़ा झाड़ते थे, लेकिन शासनादेश में साफ है कि वन विभाग केवल सहयोग में करेगा।
नगर पालिका के ईओ कमेटी में सचिव
शासन ने हर जिले के लिए कमेटी का गठन किया है, जो इस कार्य की समीक्षा करेगी। कमेटी के अध्यक्ष डीएम व सचिव नगर पालिका परिषद हाथरस के ईओ सचिव बनाया गया है। एसपी, प्रभागीय वनाधिकारी, सीवीओ, डीपीआरओ, संबंधित ब्लॉक के बीडीओ, अन्य नगर पालिका व पंचायत के ईओ को सदस्य बनाया गया है।
जागरूकता अभियान और कचरा प्रबंधन
योजना में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोग बंदरों को खुले में खाना न खिलाएं, क्योंकि इससे वे आक्रामक हो जाते हैं। इसके लिए स्कूलों, धार्मिक स्थलों और बाजारों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही, शहरों में कचरा प्रबंधन को दुरुस्त किया जाएगा ताकि बंदरों को खुले में खाद्य सामग्री न मिले।
तत्काल उपाय
-हॉटस्पॉट की पहचान: सभी नगर निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में उन इलाकों की पहचान करें जहां बंदरों का अधिक आतंक है।
-हेल्पलाइन नंबर: संघर्ष की घटनाओं की सूचना देने के लिए प्रत्येक नगर निकाय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा।
-बंदरों को पकड़ना : बंदरों को पकडऩे के लिए कुशल व्यक्तियों या संस्थाओं का पंजीकरण किया जाएगा। पकड़े गए बंदरों को मानवीय आबादी से दूर सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।
दीर्घकालिक उपाय
- प्रजनन नियंत्रण : बंदरों की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर उनकी प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करने पर काम होगा।
- रेस्क्यू सेंटर : शहरी निकायों में बंदरों को स्थाई रूप से रखने के लिए डेडिकेटेड रेस्क्यू सेंटर्स की स्थापना की जाएगी।
- फलों के पेड़ों का रोपण : सार्वजनिक क्षेत्रों और वन क्षेत्रों के बाहरी हिस्सों में फलदार वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि बंदरों को भोजन के लिए शहरी बस्तियों में न आना पड़े।
- बंदरों के संबंध में दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं। निर्देशों के क्रम में इनके चिह्नीकरण का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा। पकड़ने को लेकर भी विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है।
- रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस
