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Hathras News: ठगों का खतरनाक ब्लैकआउट फ्रॉड, बैंक खाते हो रहे साफ
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 09 Jun 2026 01:47 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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अगर अचानक आपके चालू मोबाइल की स्क्रीन काली हो जाए और फोन काम करना बंद कर दे, तो इसे मोबाइल की खराबी समझने की भूल कतई न करें। यह साइबर अपराधियों का नया और खतरनाक ब्लैकआउट धोखाधड़ी हो सकता है। साइबर ठग अब लोगों की एक गलती का फायदा उठाते हुए उनका मोबाइल का नियंत्रण लेकर पलक झपकते ही बैंक खाते खाली कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह के भीतर हाथरस में इस नए प्रवृत्ति के दो बड़े मामले सामने आने के बाद साइबर सेल अलर्ट हो गई है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह ठगी स्क्रीन मिररिंग या मैलवेयर के जरिये की जाती है।
केस-01
व्हाट्स ऐप लिंक पर क्लिक करते ही निकले 14 हजार रुपये
अलीगढ़ मार्ग के सुमित कुमार ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। सुमित के मुताबिक, उनके व्हाट्स ऐप पर एक अज्ञात नंबर से एक आकर्षक लिंक आया था। जैसे ही उन्होंने उस लिंक पर क्लिक किया, कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल की स्क्रीन पूरी तरह ब्लैकआउट हो गई। कोई भी बटन काम नहीं कर रहा था। सुमित को लगा कि मोबाइल अचानक खराब हो गया है। उन्होंने तसल्ली के लिए सिम निकालकर दूसरे फोन में डाली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बैंक से संदेश आया था कि उनके खाते से 14,000 रुपये साफ हो चुके हैं।
केस-2
आढ़ती के खाते से पार कर दिए 2.77 लाख रुपये
इससे ठीक एक सप्ताह पहले मधुगढ़ी के रहने वाले अनाज आढ़ती अमित कुमार भी इसी तरह की ठगी का शिकार हुए। ठगों ने उनके मोबाइल को ब्लैकआउट कर बैंक खाते से 2.77 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि पार कर दी। गनीमत यह रही कि अमित को जल्द ही शक हो गया और उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क कर अपना खाता फ्रीज़ (ब्लॉक) करवा दिया, जिससे उनकी बाकी जमा पूंजी सुरक्षित बच गई। रकम गुरुग्राम में निकाली गई है। साइबर सेल अब बैंक खातों के जरिये ठगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
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इस तरह कर रहे ठगी
-शातिर ठग सोशल मीडिया, व्हाट्स ऐप या अविश्वसनीय वेबसाइटें पर आकर्षक या डराने वाले लिंक भेजते हैं।
-जैसे ही उपयोगकर्ता उस लिंक पर क्लिक करता है, पृष्ठभूमि में एक अदृश्य वायरस या रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन डाउनलोड हो जाती है।
-इसके बाद ठग आपके मोबाइल की स्क्रीन को ब्लैक या फ्रीज़ कर देते हैं, ताकि आपको पता न चले कि फोन में क्या हो रहा है।
-जब आप सोचते हैं कि फोन खराब है, ठीक उसी दौरान ठग आपके मोबाइल पर आने वाले बैंकिंग ओटीपी को पढ़कर आपके खाते से पैसे ट्रांसफर कर रहे होते हैं।
अनजान लिंक को तब तक न खोलें, जब तक आप भेजने वाले को पूरी तरह न जानते हों। इंटरनेट पर असुरक्षित, पायरेटेड फिल्में डाउनलोड कराने वाली या अनधिकृत वेबसाइटें को खोलने से बचें। ठग ऐसी साइटों पर जाल बिछाकर बैठते हैं। साइबर धोखाधड़ी के मामले में जितनी जल्दी शिकायत मिलती है, उतनी जल्दी ठगी गई रकम को फ्रीज़ कराया जा सकता है।
-आशीष कुमार, साइबर सेल प्रभारी
केस-01
व्हाट्स ऐप लिंक पर क्लिक करते ही निकले 14 हजार रुपये
अलीगढ़ मार्ग के सुमित कुमार ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। सुमित के मुताबिक, उनके व्हाट्स ऐप पर एक अज्ञात नंबर से एक आकर्षक लिंक आया था। जैसे ही उन्होंने उस लिंक पर क्लिक किया, कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल की स्क्रीन पूरी तरह ब्लैकआउट हो गई। कोई भी बटन काम नहीं कर रहा था। सुमित को लगा कि मोबाइल अचानक खराब हो गया है। उन्होंने तसल्ली के लिए सिम निकालकर दूसरे फोन में डाली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बैंक से संदेश आया था कि उनके खाते से 14,000 रुपये साफ हो चुके हैं।
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केस-2
आढ़ती के खाते से पार कर दिए 2.77 लाख रुपये
इससे ठीक एक सप्ताह पहले मधुगढ़ी के रहने वाले अनाज आढ़ती अमित कुमार भी इसी तरह की ठगी का शिकार हुए। ठगों ने उनके मोबाइल को ब्लैकआउट कर बैंक खाते से 2.77 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि पार कर दी। गनीमत यह रही कि अमित को जल्द ही शक हो गया और उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क कर अपना खाता फ्रीज़ (ब्लॉक) करवा दिया, जिससे उनकी बाकी जमा पूंजी सुरक्षित बच गई। रकम गुरुग्राम में निकाली गई है। साइबर सेल अब बैंक खातों के जरिये ठगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
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इस तरह कर रहे ठगी
-शातिर ठग सोशल मीडिया, व्हाट्स ऐप या अविश्वसनीय वेबसाइटें पर आकर्षक या डराने वाले लिंक भेजते हैं।
-जैसे ही उपयोगकर्ता उस लिंक पर क्लिक करता है, पृष्ठभूमि में एक अदृश्य वायरस या रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन डाउनलोड हो जाती है।
-इसके बाद ठग आपके मोबाइल की स्क्रीन को ब्लैक या फ्रीज़ कर देते हैं, ताकि आपको पता न चले कि फोन में क्या हो रहा है।
-जब आप सोचते हैं कि फोन खराब है, ठीक उसी दौरान ठग आपके मोबाइल पर आने वाले बैंकिंग ओटीपी को पढ़कर आपके खाते से पैसे ट्रांसफर कर रहे होते हैं।
अनजान लिंक को तब तक न खोलें, जब तक आप भेजने वाले को पूरी तरह न जानते हों। इंटरनेट पर असुरक्षित, पायरेटेड फिल्में डाउनलोड कराने वाली या अनधिकृत वेबसाइटें को खोलने से बचें। ठग ऐसी साइटों पर जाल बिछाकर बैठते हैं। साइबर धोखाधड़ी के मामले में जितनी जल्दी शिकायत मिलती है, उतनी जल्दी ठगी गई रकम को फ्रीज़ कराया जा सकता है।
-आशीष कुमार, साइबर सेल प्रभारी