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Hathras News: आयुष ज्योति केंद्र खुद बीमार, यहां कैसे हो उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 20 Mar 2026 02:49 AM IST
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जिला अस्पताल परिसर स्थित आयुष ज्योति केंद्र पर होता जीर्णोद्धार कार्य। संवाद
- फोटो : Samvad
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जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित आयुष ज्योति केंद्र खुद के इलाज की बाट जोह रहा है। हालत यह है कि यहां आने वाले मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार नहीं, बल्कि केंद्र के पास उपलब्ध सीमित बजट के अनुसार दवाएं मिलती हैं। जिला अस्पताल में अलग-थलग पड़े इस केंद्र पर मरीज तो आते हैं, लेकिन शून्य प्राथमिकता के कारण इसका ठीक ढंग से संचालन नहीं हो पा रहा।
तत्कालीन सीएमओ डाॅ. रामवीर सिंह के कार्यकाल में वर्ष 2016 में जिला अस्पताल में आयुष ज्योति केंद्र की स्थापना हुई थी। मिशन के अंतर्गत टीबी अस्पताल के पास भवन तैयार हुआ था। यहां एक ही छत के नीचे आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा व होम्योपैथी का उपचार दिया जाना था।
चूंकि सिद्धा दक्षित भारत में प्रचलित है, इसलिए केवल इसे छोड़कर बाकी चारों प्रणालियों के चिकित्सक यहां तैनात किए गए। वर्तमान में यहां एनएचएम के अंतर्गत आयुर्वेद, होम्योपैथी व योग के चिकित्सक तैनात हैं। भवन से लेकर दवाओं तक की व्यवस्था जर्जर हो चुकी हैं।
बजट का अभाव और दवाओं का संकट
आयुष केंद्र की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे साल की दवाओं के लिए एक चिकित्सक पर मात्र 50 हजार रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, जबकि कोरोना से पहले यह बजट एक लाख रुपये था। आज के समय में, जब दवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं तो ऐसे में इतनी कम राशि में मरीजों को समुचित दवाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। हर साल बजट आ भी नहीं पाता। 2023 के बाद पिछले वर्ष दवाइयां आ सकी थीं। एनएचएम के अंतर्गत इस वर्ष भी दवाओं के लिए बजट नहीं मिला है।
कोरोना काल की मार और घटती ओपीडी
आयुष ज्योति केंद्र की साख गिरने के पीछे एक बड़ा कारण कोरोना काल भी रहा। महामारी के दौरान टीबी अस्पताल को कोविड एल-टू अस्पताल व इस केंद्र को कोविड कंट्रोल रूम में तब्दील कर दिया था। वर्ष 2020 से 2022 तक यहां की चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित रहीं। लंबे समय तक बंद रहने के कारण क्षेत्र के मरीजों का संपर्क केंद्र से टूट गया, जिसका सीधा असर यहां की ओपीडी पर पड़ी। पहले जहां केंद्र पर 150 से 200 मरीज आते थे, वहीं अब केंद्र की ओपीडी गिरकर 50 से 60 पहुंच गई है। इनके लिए भी दवाओं के लाले हैं।
भवन का हो रहा जीर्णोद्धार
10 साल के अंदर ही भवन की छत व दीवारों से प्लास्टर झड़ने लग गया था। दरवाजों में दीमक लग गई थी। सीएमओ ने पिछले वर्ष जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव पर छह लाख रुपये की तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे यहां जीर्णोद्धार का काम शुरू हो चुका है।
वेतन के भी लाले
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आयुष कार्यक्रम के तहत जिले में 22 चिकित्सक तैनात हैं। इनमें तीन आयुष ज्योति केंद्र पर हैं और बाकी सीएचसी पर तैनात हैं। एनएचएम के तहत बजट न आने के कारण इनका दो-दो महीने का वेतन अटक जाता है। इससे भी चिकित्सकों का मनोबल गिर रहा है।
जिला अस्पताल परिसर में भवन होने के कारण आयुष केंद्र की तकनीकी मंजूरी हमारे यहां आई है। इसके तहत भवन का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। दवाओं की व्यवस्था सीएमओ स्तर से की जाती हैं।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
पर्याप्त दवाओं के लिए बजट मांगा गया है। इसे बढ़ाने के लिए भी बात की जा रही हैं। फिलहाल आवश्यकता के अनुरूप दवाएं आयुष केंद्र पर दवाएं उपलब्ध हैं।
-डॉ. राजीव रॉय, सीएमओ
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तत्कालीन सीएमओ डाॅ. रामवीर सिंह के कार्यकाल में वर्ष 2016 में जिला अस्पताल में आयुष ज्योति केंद्र की स्थापना हुई थी। मिशन के अंतर्गत टीबी अस्पताल के पास भवन तैयार हुआ था। यहां एक ही छत के नीचे आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा व होम्योपैथी का उपचार दिया जाना था।
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चूंकि सिद्धा दक्षित भारत में प्रचलित है, इसलिए केवल इसे छोड़कर बाकी चारों प्रणालियों के चिकित्सक यहां तैनात किए गए। वर्तमान में यहां एनएचएम के अंतर्गत आयुर्वेद, होम्योपैथी व योग के चिकित्सक तैनात हैं। भवन से लेकर दवाओं तक की व्यवस्था जर्जर हो चुकी हैं।
बजट का अभाव और दवाओं का संकट
आयुष केंद्र की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे साल की दवाओं के लिए एक चिकित्सक पर मात्र 50 हजार रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, जबकि कोरोना से पहले यह बजट एक लाख रुपये था। आज के समय में, जब दवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं तो ऐसे में इतनी कम राशि में मरीजों को समुचित दवाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। हर साल बजट आ भी नहीं पाता। 2023 के बाद पिछले वर्ष दवाइयां आ सकी थीं। एनएचएम के अंतर्गत इस वर्ष भी दवाओं के लिए बजट नहीं मिला है।
कोरोना काल की मार और घटती ओपीडी
आयुष ज्योति केंद्र की साख गिरने के पीछे एक बड़ा कारण कोरोना काल भी रहा। महामारी के दौरान टीबी अस्पताल को कोविड एल-टू अस्पताल व इस केंद्र को कोविड कंट्रोल रूम में तब्दील कर दिया था। वर्ष 2020 से 2022 तक यहां की चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित रहीं। लंबे समय तक बंद रहने के कारण क्षेत्र के मरीजों का संपर्क केंद्र से टूट गया, जिसका सीधा असर यहां की ओपीडी पर पड़ी। पहले जहां केंद्र पर 150 से 200 मरीज आते थे, वहीं अब केंद्र की ओपीडी गिरकर 50 से 60 पहुंच गई है। इनके लिए भी दवाओं के लाले हैं।
भवन का हो रहा जीर्णोद्धार
10 साल के अंदर ही भवन की छत व दीवारों से प्लास्टर झड़ने लग गया था। दरवाजों में दीमक लग गई थी। सीएमओ ने पिछले वर्ष जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव पर छह लाख रुपये की तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे यहां जीर्णोद्धार का काम शुरू हो चुका है।
वेतन के भी लाले
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आयुष कार्यक्रम के तहत जिले में 22 चिकित्सक तैनात हैं। इनमें तीन आयुष ज्योति केंद्र पर हैं और बाकी सीएचसी पर तैनात हैं। एनएचएम के तहत बजट न आने के कारण इनका दो-दो महीने का वेतन अटक जाता है। इससे भी चिकित्सकों का मनोबल गिर रहा है।
जिला अस्पताल परिसर में भवन होने के कारण आयुष केंद्र की तकनीकी मंजूरी हमारे यहां आई है। इसके तहत भवन का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। दवाओं की व्यवस्था सीएमओ स्तर से की जाती हैं।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
पर्याप्त दवाओं के लिए बजट मांगा गया है। इसे बढ़ाने के लिए भी बात की जा रही हैं। फिलहाल आवश्यकता के अनुरूप दवाएं आयुष केंद्र पर दवाएं उपलब्ध हैं।
-डॉ. राजीव रॉय, सीएमओ