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Jalaun News: कदौरा मंडी में पल्लेदारों की हड़ताल, कामकाज ठप
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कदौरा। कृषि उत्पादन मंडी कदौरा में रविवार को पल्लेदारों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल के चलते मंडी में तौलाई और लदाई का काम पूरी तरह ठप हो गया। किसानों और व्यापारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रबी सीजन के चलते इन दिनों मंडी में आवक अधिक है और बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुबह मंडी खुलते ही पल्लेदार एकत्र होकर मंडी कार्यालय के बाहर नारेबाजी करने लगे और काम बंद कर दिया।
पल्लेदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेहद कम मजदूरी दी जा रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें प्रति बोरी लदाई के लिए मात्र 3 रुपये और तौलाई के लिए 20 रुपये प्रति कुंतल मिलते हैं, जो महंगाई के दौर में पर्याप्त नहीं है। पल्लेदारों ने ट्रक लदाई में भी कटौती किए जाने का आरोप लगाया गया है। कहा कि नियमानुसार 30 रुपये प्रति टन मिलना चाहिए लेकिन उन्हें 20 रुपये ही दिए जा रहे हैं।
श्रमिकों का कहना है कि बोरी सिलाई, छनाई और चुकाई जैसे कार्यों के लिए अलग से कोई भुगतान नहीं किया जाता। ऊंचाई पर बोरियों का ढेर लगाने के लिए दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कम मजदूरी में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
वहीद खान, केश लाल, रामसेवक, कल्लू, अमर सिंह, गंगाचरण, गुड्डू, अकील, आशादीन और धर्मेंद्र कुमार सहित अन्य पल्लेदारों ने बताया कि वे पिछले 30-35 वर्षों से मंडी में कार्य कर रहे हैं लेकिन अब तक उनका लाइसेंस नहीं बना है और न ही किसी प्रकार की बीमा सुविधा उपलब्ध है।
इस मामले में उपजिलाधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि श्रमिकों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना चाहिए, जिससे उन्हें बीमा जैसी सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने हड़ताल को आढ़तियों और श्रमिकों के बीच का मामला बताते हुए कहा कि मजदूरी सरकारी मानकों के अनुसार तय होती है।
वहीं मंडी प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि पल्लेदारों के लाइसेंस के लिए कागजात प्राप्त हो चुके हैं और जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे। मजदूरी संबंधी समस्या का भी शीघ्र समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
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रबी सीजन के चलते इन दिनों मंडी में आवक अधिक है और बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुबह मंडी खुलते ही पल्लेदार एकत्र होकर मंडी कार्यालय के बाहर नारेबाजी करने लगे और काम बंद कर दिया।
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पल्लेदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेहद कम मजदूरी दी जा रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें प्रति बोरी लदाई के लिए मात्र 3 रुपये और तौलाई के लिए 20 रुपये प्रति कुंतल मिलते हैं, जो महंगाई के दौर में पर्याप्त नहीं है। पल्लेदारों ने ट्रक लदाई में भी कटौती किए जाने का आरोप लगाया गया है। कहा कि नियमानुसार 30 रुपये प्रति टन मिलना चाहिए लेकिन उन्हें 20 रुपये ही दिए जा रहे हैं।
श्रमिकों का कहना है कि बोरी सिलाई, छनाई और चुकाई जैसे कार्यों के लिए अलग से कोई भुगतान नहीं किया जाता। ऊंचाई पर बोरियों का ढेर लगाने के लिए दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कम मजदूरी में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
वहीद खान, केश लाल, रामसेवक, कल्लू, अमर सिंह, गंगाचरण, गुड्डू, अकील, आशादीन और धर्मेंद्र कुमार सहित अन्य पल्लेदारों ने बताया कि वे पिछले 30-35 वर्षों से मंडी में कार्य कर रहे हैं लेकिन अब तक उनका लाइसेंस नहीं बना है और न ही किसी प्रकार की बीमा सुविधा उपलब्ध है।
इस मामले में उपजिलाधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि श्रमिकों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना चाहिए, जिससे उन्हें बीमा जैसी सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने हड़ताल को आढ़तियों और श्रमिकों के बीच का मामला बताते हुए कहा कि मजदूरी सरकारी मानकों के अनुसार तय होती है।
वहीं मंडी प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि पल्लेदारों के लाइसेंस के लिए कागजात प्राप्त हो चुके हैं और जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे। मजदूरी संबंधी समस्या का भी शीघ्र समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।