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Jalaun News: गौरैया की चहचहाहट लौटाने को युवाओं ने संभाली कमान
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फोटो - 08 विलुप्त होती गौरैया को बचाने के लिए लोगों को घौसला देते शिक्षक अजय कुमार। संवाद
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उरई। कभी हर आंगन में चहचहाने वाली नन्ही चिड़िया गौरैया अब धीरे-धीरे शहरों से गायब होती जा रही है। इसी चिंता को लेकर उरई के दो युवाओं ने गौरैया संरक्षण की मुहिम को जनआंदोलन का रूप देने की पहल की है। मोहल्ला राम नगर निवासी शिक्षक अजय कुमार दो वर्षों से लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने न केवल लोगों को जागरूक किया, बल्कि गौरैया के लिए सुरक्षित आश्रय भी उपलब्ध कराए।
अजय कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने करीब 200 घोंसले बनवाकर लोगों में वितरित किए थे। इस वर्ष उन्होंने प्रयासों को और विस्तार देते हुए 300 घोंसले तैयार कराकर लोगों को बांटे हैं। उनका कहना है कि गौरैया एक सामाजिक पक्षी है जो परिवार के बीच रहना पसंद करती है। यदि उसे सुरक्षित और शांत वातावरण मिले तो वह आसानी से फिर से हमारे आसपास लौट सकती है।
शहर के मोहल्ला पुराना रामनगर निवासी कपिल यादव गुमावली भी पांच वर्षों से गौरैया संरक्षण में जुटे हुए हैं। उन्होंने अपने स्तर पर पेड़ों और घरों के आसपास घोंसले बांधकर गौरैया को सुरक्षित ठिकाना देने का काम किया है। कपिल यादव का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली, कंक्रीट के जंगल और मोबाइल टावरों के बढ़ते प्रभाव ने गौरैया के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में हर व्यक्ति को आगे आकर इस नन्ही चिड़िया को बचाने का प्रयास करना चाहिए।
दोनों ही लोगों का मानना है कि यदि समाज के लोग थोड़ा सा सहयोग करें- जैसे घरों में दाना-पानी रखना, घोंसलों की व्यवस्था करना और पेड़ों को बचाना- तो गौरैया को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। उनकी यह मुहिम अब धीरे-धीरे लोगों को प्रेरित कर रही है और शहर में फिर से गौरैया की चहचहाहट लौटने की उम्मीद लग रही है।
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अजय कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने करीब 200 घोंसले बनवाकर लोगों में वितरित किए थे। इस वर्ष उन्होंने प्रयासों को और विस्तार देते हुए 300 घोंसले तैयार कराकर लोगों को बांटे हैं। उनका कहना है कि गौरैया एक सामाजिक पक्षी है जो परिवार के बीच रहना पसंद करती है। यदि उसे सुरक्षित और शांत वातावरण मिले तो वह आसानी से फिर से हमारे आसपास लौट सकती है।
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शहर के मोहल्ला पुराना रामनगर निवासी कपिल यादव गुमावली भी पांच वर्षों से गौरैया संरक्षण में जुटे हुए हैं। उन्होंने अपने स्तर पर पेड़ों और घरों के आसपास घोंसले बांधकर गौरैया को सुरक्षित ठिकाना देने का काम किया है। कपिल यादव का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली, कंक्रीट के जंगल और मोबाइल टावरों के बढ़ते प्रभाव ने गौरैया के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में हर व्यक्ति को आगे आकर इस नन्ही चिड़िया को बचाने का प्रयास करना चाहिए।
दोनों ही लोगों का मानना है कि यदि समाज के लोग थोड़ा सा सहयोग करें- जैसे घरों में दाना-पानी रखना, घोंसलों की व्यवस्था करना और पेड़ों को बचाना- तो गौरैया को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। उनकी यह मुहिम अब धीरे-धीरे लोगों को प्रेरित कर रही है और शहर में फिर से गौरैया की चहचहाहट लौटने की उम्मीद लग रही है।

फोटो - 08 विलुप्त होती गौरैया को बचाने के लिए लोगों को घौसला देते शिक्षक अजय कुमार। संवाद