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Jalaun News: पछुआ हवा ने बढ़ाई चिंता, गेहूं की फसल पर संकट
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फोटो - 12 खेत में लहलहाती गेहूं की फसल। संवाद
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उरई। जिले में इन दिनों चल रही तेज पछुआ हवा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूं की फसल इस समय दाना बनने की महत्वपूर्ण अवस्था में है। ऐसे में तेज और शुष्क हवा फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। किसानों का कहना है कि हवा से फसल समय से पहले सूख सकती है। दाना पतला (झिरी) पड़ने और उपज घटने का खतरा बढ़ गया है।
जिले में करीब ढाई लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है। बीते कुछ वर्षों में हरी मटर की खेती के बाद गेहूं बोने का चलन बढ़ा है। मटर की फसल लेने के बाद दिसंबर से मध्य जनवरी तक बोई गई गेहूं की लगभग 80 प्रतिशत फसल इस समय हरी अवस्था में है। उसमें दाना भरने की प्रक्रिया जारी है।
इधर, किसान शिवाकांत, राजेश कुमार, विकास पटेल, मनोहर के अनुसार दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि ने पहले ही फसल को कमजोर कर दिया था। अब लगातार चल रही तेज हवा हालात और बिगाड़ रही हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो प्रति बीघा उपज में एक क्विंटल तक की कमी आ सकती है। विशेष रूप से वे किसान ज्यादा प्रभावित होंगे, जिन्होंने मटर के बाद गेहूं की बोआई की है।
जिन किसानों ने अक्तूबर-नवंबर में बोआई की थी, उनकी फसल पककर तैयार हो चुकी है और कई स्थानों पर कटाई भी शुरू हो गई है। तेज हवाओं के कारण इन खेतों में भी फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा है।
पछुआ हवा आमतौर पर शुष्क और तेज होती है, जो फसल से नमी तेजी से खींच लेती है। इस समय जब गेहूं में दाना भर रहा होता है तब नमी की कमी से वह विकसित नहीं हो पाता और उसका वजन कम रह जाता है। अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो उपज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
- विस्टर जोशी, कृषि मौसम विशेषज्ञ
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जिले में करीब ढाई लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है। बीते कुछ वर्षों में हरी मटर की खेती के बाद गेहूं बोने का चलन बढ़ा है। मटर की फसल लेने के बाद दिसंबर से मध्य जनवरी तक बोई गई गेहूं की लगभग 80 प्रतिशत फसल इस समय हरी अवस्था में है। उसमें दाना भरने की प्रक्रिया जारी है।
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इधर, किसान शिवाकांत, राजेश कुमार, विकास पटेल, मनोहर के अनुसार दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि ने पहले ही फसल को कमजोर कर दिया था। अब लगातार चल रही तेज हवा हालात और बिगाड़ रही हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो प्रति बीघा उपज में एक क्विंटल तक की कमी आ सकती है। विशेष रूप से वे किसान ज्यादा प्रभावित होंगे, जिन्होंने मटर के बाद गेहूं की बोआई की है।
जिन किसानों ने अक्तूबर-नवंबर में बोआई की थी, उनकी फसल पककर तैयार हो चुकी है और कई स्थानों पर कटाई भी शुरू हो गई है। तेज हवाओं के कारण इन खेतों में भी फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा है।
पछुआ हवा आमतौर पर शुष्क और तेज होती है, जो फसल से नमी तेजी से खींच लेती है। इस समय जब गेहूं में दाना भर रहा होता है तब नमी की कमी से वह विकसित नहीं हो पाता और उसका वजन कम रह जाता है। अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो उपज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
- विस्टर जोशी, कृषि मौसम विशेषज्ञ