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Jaunpur News: गेंदे के फूलों से दमका चौकिया धाम
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मां शीतला का भव्य रूप। स्रोत-संवाद
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माँ शीतला चौकिया धाम में चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन सोमवार को शीतला का दरबार दौना और गेंदे के फूल से दमक गया। लाल और पीली चुनरी से माता रानी का शृंगार किया गया।
कतार में खड़े होकर माता के पांचवें स्वरूप का श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया। भोर में माँ शीतला का पीली, लाल चुनरी, पीले गेंदा के फूल से बने माला से शृंगार किया गया। फल ,पेड़ा, बर्फी का भोग लगाया गया।
चौकियां धाम के महंत विवेकानंद पंडा ने मां शीतला की आरती आरती उतारी। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। श्रद्धालु शीतला माता की जय के जयघोष लगते हुए दर्शन पूजन करते रहे। नवरात्र के पांचवे दिन सुल्तानपुर, आजमगढ़, प्रतापगढ़, वाराणसी से भी भारी संख्या में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ दर्शन पूजन करने के लिए आए। कई महिला श्रद्धालुओं ने पचरा गाया।
महंत विवेकानंद पंडा ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इस दिन सुबह स्नान के बाद पीले या सफेद वस्त्र पहनकर माता को पीले फूल, कुमकुम और केले का भोग (केसर की खीर भी) अर्पित किया जाता है। स्कंदमाता की आराधना से संतान सुख, ज्ञान और समृद्धि शांति मिलती है। दोपहर 3 बजे तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
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कतार में खड़े होकर माता के पांचवें स्वरूप का श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया। भोर में माँ शीतला का पीली, लाल चुनरी, पीले गेंदा के फूल से बने माला से शृंगार किया गया। फल ,पेड़ा, बर्फी का भोग लगाया गया।
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चौकियां धाम के महंत विवेकानंद पंडा ने मां शीतला की आरती आरती उतारी। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। श्रद्धालु शीतला माता की जय के जयघोष लगते हुए दर्शन पूजन करते रहे। नवरात्र के पांचवे दिन सुल्तानपुर, आजमगढ़, प्रतापगढ़, वाराणसी से भी भारी संख्या में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ दर्शन पूजन करने के लिए आए। कई महिला श्रद्धालुओं ने पचरा गाया।
महंत विवेकानंद पंडा ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इस दिन सुबह स्नान के बाद पीले या सफेद वस्त्र पहनकर माता को पीले फूल, कुमकुम और केले का भोग (केसर की खीर भी) अर्पित किया जाता है। स्कंदमाता की आराधना से संतान सुख, ज्ञान और समृद्धि शांति मिलती है। दोपहर 3 बजे तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।