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Jaunpur News: अनुसंधान और नवाचार के नए रोडमैप पर चर्चा के लिए समिति गठित
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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल के निर्देश पर केंद्रीय बजट 2026-27 के गहन अध्ययन के लिए विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति वित्त मंत्रालय से जारी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और आगामी बजट के प्रावधानों का विश्लेषण करेगी। समिति ने रविवार को कुलपति प्रो. वंदना सिंह की अध्यक्षता में बजट का सजीव प्रसारण देखा।
बजट के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 अनुसंधान, नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी को भारत के आर्थिक विकास की आधारशिला के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए बताया कि बजट में सेमीकंडक्टर, जैव-प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल अनुसंधान को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए आवंटित 40,000 करोड़ से चिप निर्माण और सामग्री अनुसंधान में तेजी आएगी। इससे उद्योग-शैक्षणिक सहयोग के नए द्वार खुलेंगे।
कुलपति ने बताया कि स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान में बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत अगले पांच वर्षों में होने वाला 10,000 करोड़ का निवेश शोधार्थियों के लिए बड़े अवसर पैदा करेगा। विश्वविद्यालय अब एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से लैब-टू-मार्केट अनुसंधान को गति देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। साथ ही चिकित्सा, अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान एवं योग जैसे विषयों में अनुसंधान को सशक्त बनाया जाएगा। प्रो. सिंह ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय पहले से ही नवीकरणीय ऊर्जा एवं जल अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। अब सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप इन क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी योगदान देने की तैयारी है। समिति का मुख्य उद्देश्य बजट के उन सभी पहलुओं की पहचान कर एक समेकित रिपोर्ट तैयार करना है, जो उच्च शिक्षा और अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सकें। यह रिपोर्ट भविष्य में छात्रहित की योजनाओं और नीतिगत ढांचे के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। इस अवसर पर प्रो. सौरभ पाल, डॉ. विक्रांत भटेजा, डॉ. धीरेंद्र चौधरी, डॉ. काजल डे, डॉ. रमांशु प्रताप सिंह उपस्थित रहे।
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बजट के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 अनुसंधान, नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी को भारत के आर्थिक विकास की आधारशिला के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए बताया कि बजट में सेमीकंडक्टर, जैव-प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल अनुसंधान को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए आवंटित 40,000 करोड़ से चिप निर्माण और सामग्री अनुसंधान में तेजी आएगी। इससे उद्योग-शैक्षणिक सहयोग के नए द्वार खुलेंगे।
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कुलपति ने बताया कि स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान में बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत अगले पांच वर्षों में होने वाला 10,000 करोड़ का निवेश शोधार्थियों के लिए बड़े अवसर पैदा करेगा। विश्वविद्यालय अब एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से लैब-टू-मार्केट अनुसंधान को गति देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। साथ ही चिकित्सा, अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान एवं योग जैसे विषयों में अनुसंधान को सशक्त बनाया जाएगा। प्रो. सिंह ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय पहले से ही नवीकरणीय ऊर्जा एवं जल अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। अब सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप इन क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी योगदान देने की तैयारी है। समिति का मुख्य उद्देश्य बजट के उन सभी पहलुओं की पहचान कर एक समेकित रिपोर्ट तैयार करना है, जो उच्च शिक्षा और अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सकें। यह रिपोर्ट भविष्य में छात्रहित की योजनाओं और नीतिगत ढांचे के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। इस अवसर पर प्रो. सौरभ पाल, डॉ. विक्रांत भटेजा, डॉ. धीरेंद्र चौधरी, डॉ. काजल डे, डॉ. रमांशु प्रताप सिंह उपस्थित रहे।
