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Jaunpur News: पांचवीं पैमाइश फिर भी नहीं सुलझा 110 किसानों का विवाद
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चंदवक। राष्ट्रीय राजमार्ग-233 निर्माण परियोजना से प्रभावित बलुआ गांव के किसानों के मुआवजे का मामला लगातार उलझता जा रहा है। समस्या के समाधान के लिए राजस्व विभाग ने अब तक पांच बार पैमाइश कराई जा चुकी है, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
किसान रामविलास, वंशराज, ओमप्रकाश, हौसला देवी, माया देवी, महेंद्र, मेवा और मिठाई ने बताया कि गांव के 110 किसान मुआवजे से वंचित हैं। उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। बलुआ गांव के कुल 117 किसान भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हैं। इनमें से केवल सात किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि शेष किसानों को यह कहकर मुआवजा देने से इन्कार किया जा रहा है कि उनकी भूमि के बाद ग्राम समाज की जमीन दर्ज है।
किसानों का कहना है कि वर्ष 2017 से उन्हें भूमि अधिग्रहण संबंधी नोटिस मिलता रहा है।
इतना ही नहीं, एनएचएआई ने जिला न्यायालय और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर मुकदमों में भी उन्हें पक्षकार बनाया गया था। किसानों का आरोप है कि जिस ग्राम समाज की भूमि का हवाला दिया जा रहा है, वह वर्षों पहले सड़क चौड़ीकरण के दौरान सड़क में समाहित हो चुकी है। इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों की विसंगतियों के कारण उन्हें मुआवजे से वंचित किया जा रहा है।
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रामविलास, वंशराज, ओमप्रकाश, हौसला देवी, माया देवी, महेंद्र, मेवा और मिठाई समेत दर्जनों किसानों ने इस संबंध में जिलाधिकारी से शिकायत की थी। डीएम के निर्देश पर तहसील कर्मियों ने कई बार पैमाइश कराई, लेकिन विवाद जस का तस बना हुआ है। किसानों का आरोप है कि पूर्व में हुई राजस्वीय त्रुटियों को सुधारने के बजाय उन्हें छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
इससे समाधान नहीं निकल पा रहा है। शुक्रवार को राजस्व निरीक्षक दर्शन सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने एक बार फिर पैमाइश कर रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहित होने के बावजूद मुआवजा न मिलना उनके साथ अन्याय है।
किसान रामविलास, वंशराज, ओमप्रकाश, हौसला देवी, माया देवी, महेंद्र, मेवा और मिठाई ने बताया कि गांव के 110 किसान मुआवजे से वंचित हैं। उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। बलुआ गांव के कुल 117 किसान भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हैं। इनमें से केवल सात किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि शेष किसानों को यह कहकर मुआवजा देने से इन्कार किया जा रहा है कि उनकी भूमि के बाद ग्राम समाज की जमीन दर्ज है।
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किसानों का कहना है कि वर्ष 2017 से उन्हें भूमि अधिग्रहण संबंधी नोटिस मिलता रहा है।
इतना ही नहीं, एनएचएआई ने जिला न्यायालय और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर मुकदमों में भी उन्हें पक्षकार बनाया गया था। किसानों का आरोप है कि जिस ग्राम समाज की भूमि का हवाला दिया जा रहा है, वह वर्षों पहले सड़क चौड़ीकरण के दौरान सड़क में समाहित हो चुकी है। इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों की विसंगतियों के कारण उन्हें मुआवजे से वंचित किया जा रहा है।
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इससे समाधान नहीं निकल पा रहा है। शुक्रवार को राजस्व निरीक्षक दर्शन सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने एक बार फिर पैमाइश कर रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहित होने के बावजूद मुआवजा न मिलना उनके साथ अन्याय है।