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केराकत हादसा: 25 लाख में दफन हुई दो मजदूरों की मौत? तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया; हुआ समझौता

अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 10 Apr 2026 05:36 AM IST
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सार

Jaunpur News: जिले के देवकली में गैस पाइपलाइन की खोदाई के दौरान मिट्टी धंसने से प्रिंस और निरंजन की मौत हो गई थी। 12.50-12.50 लाख के मुआवजे के बाद बिना शिकायत परिजन बिहार लौट गए। यह मामला कानूनी कार्रवाई के बजाय आर्थिक समझौते की भेंट चढ़ गया।

Kerakat Tragedy Deaths of Two Laborers Buried Settlement Reached Between Families and Company
जौनपुर के केराकत कोतवाली का मामला। - फोटो : संवाद
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विस्तार

UP Accident: जौनपुर में देवकली बाजार के समीप चौकिया शिवालय के पास गैस पाइपलाइन मरम्मत के दौरान हुए भीषण हादसे ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 30 फीट गहरे गड्ढे में मिट्टी धंसने से दबे दो मजदूरों, प्रिंस कुमार (20) और निरंजन महतो (32) की मौत के बाद मामला कानूनी कार्रवाई के बजाय आर्थिक समझौते की भेंट चढ़ गया।

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बृहस्पतिवार तड़के जब बिहार से मृतकों के परिजन केराकत पहुंचे, तो घटनास्थल पर काफी देर तक चीख-पुकार और हंगामा मचा रहा। हालांकि, कार्यदायी संस्था और परिजनों के बीच लंबी मान-मनौव्वल का दौर चला, जो अंततः सुलह में तब्दील हो गया। समझौते के तहत कंपनी ने दोनों मृतक आश्रितों को 12.50-12.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस में कोई भी लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई।

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परिजनों में मचा कोहराम

अडानी टोटल गैस लिमिटेड की पाइपलाइन में लीकेज ठीक करने के लिए तीन मजदूर 30 फीट गहरे गड्ढे में काम कर रहे थे। इसी दौरान जेसीबी से मिट्टी निकालने के दौरान किनारे का बड़ा हिस्सा धंस गया। एक मजदूर शशि रंजन तो किसी तरह बच निकला लेकिन निरंजन और प्रिंस मलबे में दब गए। एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और पुलिस की घंटों की मशक्कत के बाद देर रात उनके शव निकाले जा सके थे।

चर्चा का विषय बनी चुप्पी : दो जवान युवकों की मौत के बावजूद पीड़ित पक्ष की खामोशी और कार्यदायी संस्था की लापरवाही पर किसी भी आधिकारिक कार्रवाई का न होना क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पोस्टमार्टम के बाद कागजी कार्रवाई पूरी कर परिजन भारी मन से शवों को लेकर बिहार रवाना हो गए।

किसी भी प्रकार की शिकायत की तहरीर न मिलने के कारण सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर दोनों शवों को परिजनों को सौंप दिया गया। सुरक्षा की दृष्टि से घटनास्थल के गड्ढे को पूर्णतया पटवा दिया गया है। - अरविंद पांडेय, थाना प्रभारी, केराकत

प्रिंस अपने परिवार का था इकलौता सहारा
हादसे में जान गंवाने वाले प्रिंस (20) की अभी शादी भी नहीं हुई थी। उनके पिता लल्लन राय खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता शकुंतला देवी गृहिणी हैं। प्रिंस तीन भाई-बहन में दूसरे नंबर पर थे। बड़ी बहन किरण भी अविवाहित और छोटा भाई प्रीतम पढ़ाई कर रहा है।

पिता लल्लन राय ने बताया कि प्रिंस पिछले दो वर्षों से काम कर रहे थे और दो महीनों से नई बाजार क्षेत्र में इस पाइपलाइन कार्य से जुड़े थे। घटना की जानकारी उनके पिता को सबसे पहले गांव के ही एक युवक से मिली जो प्रिंस के साथ काम करता था। उसने शाम करीब 7 बजे फोन कर घटना की सूचना दी। जब पिता ने प्रिंस को कॉल किया तो फोन नहीं उठा। इसके बाद वे बिहार से तुरंत यहां के लिए निकले, तभी रास्ते में पुलिस का फोन आया और घटना की पुष्टि हुई।

तीन छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मृतक निरंजन महतो (32) अपने परिवार के साथ अलग रहकर जीवन यापन कर रहे थे। उनके पिता रामा महतो और माता छठी देवी खेती करते हैं। निरंजन की शादी वर्ष 2016 में महादेवी से हुई थी। उनके दो बेटे और एक बेटी है। चार भाइयों में निरंजन तीसरे नंबर पर थे और सभी भाई अलग-अलग रहते हैं। उनकी मौत से पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों का सहारा छिन गया है।

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