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Jhansi News: छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में पिता-पुत्र के पास पकड़ी गई 20 किलो चांदी
Tue, 18 Aug 2026 01:57 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:57 AM IST
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झांसी। झांसी रेलवे स्टेशन पर सोमवार दोपहर पहुंची छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में सवार लुधियाना निवासी पिता-पुत्र के पास से 20.05 किलोग्राम चांदी की ज्वेलरी बरामद हुई। रसीद मांगने पर दोनों कोई कागज नहीं दिखा सके। तस्करी की आशंका में दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जीएसटी टीम को भी झांसी स्टेशन बुला लिया गया। जीएसटी टीम ने भी जांच-पड़ताल की। बाजार में इस चांदी की कीमत करीब 47 लाख रुपये आंकी गई है। जीआरपी मामले की आगे भी छानबीन कर रही है।
जीआरपी को चांदी तस्करी करके झांसी लाए जाने का सुराग मिला था। आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम प्लेटफार्म पर चेकिंग करने पहुंची। दोपहर करीब एक बजे छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (18237) के प्लेटफार्म पर पहुंचते ही, उसकी तलाशी ली गई। स्लीपर कोच की तलाशी लेने पर दो लोगों के पास रखे पिट्ठू बैग से संदिग्ध पैकेट मिले। उनको ट्रेन से नीचे उतारा गया। बैग की तलाशी लेने पर 20.05 किलोग्राम चांदी की ज्वैलरी बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अमृतसर निवासी लखविंदर सिंह बताया। उसने बताया कि वह भोपाल के शहंशाह गार्डन में चांदी का काम करता है। अपने पुत्र बलविंदर के साथ भोपाल से चांदी लेकर ग्वालियर जा रहा था। जीआरपी एसपी विपुल कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक चेकिंग के दौरान ज्वैलरी से संबंधित बिल और अन्य दस्तावेज मांगे गए लेकिन, दोनों कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। जीआरपी ने जीएसटी विभाग को सूचना दी। कई बार पहले भी इस तरह से तस्करी के मामले सामने आए हैं।
सत्यापन के बाद तय होगा टैक्स
स्टेट जीएसटी विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी मनीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जीआरपी ने 20.05 किलोग्राम चांदी विभाग के सुपुर्द की है। बरामद माल का सत्यापन कराया जा रहा है। दोनों से दस्तावेज मांगा गया है। दस्तावेज प्रस्तुत करने पर नियमानुसार कर निर्धारण होगा। वहीं, चांदी पर मालिकाना हक एवं वैध दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर कार्रवाई होगी।
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राजकोट से झांसी का रास्ता बना तस्करी का सिल्वर रूट
हर साल लाखों रुपये की होती है जीएसटी चोरी, पहले भी पकड़े जा चुके मामले
आर्टिफिशियल चांदी के गहने खास तौर से राजकोट राजकोट (गुजरात) में तैयार होते हैं। भोपाल, सागर, ललितपुर, झांसी, ग्वालियर, आगरा में हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। इस पर लगने वाले करीब तीन प्रतिशत जीएसटी को बचाने के लिए सराफा कारोबारी इन लोगों की मदद लेते हैं। यह लोग चांदी के गहने बिना किसी कागज के इन जनपदों तक सराफा कारोबारियों को पहुंचाने हैं। आने-जाने में ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। जीआरपी एवं आरपीएफ की निगाह से बचने के लिए जनरल अथवा स्लीपर कोच में सफर करते हैं। इसके पहले भी इस तरह से तस्करी के मामले पकड़े जा चुके। 5 मार्च 2025 में समता एक्सप्रेस के जनरल कोच से झांसी लाए जा रहे 90.5 किलो चांदी के जेवर बरामद हुए। इसके साथ ही पांच किलो पायल भी मिली थी। यह चांदी भी झांसी एवं आगरा ले जाई जा रही थी। इसके पहले मई 2024 में झांसी रेलवे स्टेशन पर 24 किलो चांदी और पांच लाख रुपये से अधिक नकदी पकड़ी गई थी। यह चांदी झांसी से खरीदकर आगरा ले जाई जा रही थी। अप्रैल 2026 में भी उत्कल एक्सप्रेस में 7.286 किलो चांदी की पायल पकड़ी गईं थी। यह चांदी भी राजकोट के रास्ते झांसी लाई जा रही थी। जीआरपी अफसर भी मानते हैं कि ट्रेन के माध्यम से चांदी की तस्करी होती है।
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जीआरपी को चांदी तस्करी करके झांसी लाए जाने का सुराग मिला था। आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम प्लेटफार्म पर चेकिंग करने पहुंची। दोपहर करीब एक बजे छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (18237) के प्लेटफार्म पर पहुंचते ही, उसकी तलाशी ली गई। स्लीपर कोच की तलाशी लेने पर दो लोगों के पास रखे पिट्ठू बैग से संदिग्ध पैकेट मिले। उनको ट्रेन से नीचे उतारा गया। बैग की तलाशी लेने पर 20.05 किलोग्राम चांदी की ज्वैलरी बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अमृतसर निवासी लखविंदर सिंह बताया। उसने बताया कि वह भोपाल के शहंशाह गार्डन में चांदी का काम करता है। अपने पुत्र बलविंदर के साथ भोपाल से चांदी लेकर ग्वालियर जा रहा था। जीआरपी एसपी विपुल कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक चेकिंग के दौरान ज्वैलरी से संबंधित बिल और अन्य दस्तावेज मांगे गए लेकिन, दोनों कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। जीआरपी ने जीएसटी विभाग को सूचना दी। कई बार पहले भी इस तरह से तस्करी के मामले सामने आए हैं।
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स्टेट जीएसटी विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी मनीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जीआरपी ने 20.05 किलोग्राम चांदी विभाग के सुपुर्द की है। बरामद माल का सत्यापन कराया जा रहा है। दोनों से दस्तावेज मांगा गया है। दस्तावेज प्रस्तुत करने पर नियमानुसार कर निर्धारण होगा। वहीं, चांदी पर मालिकाना हक एवं वैध दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर कार्रवाई होगी।
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हर साल लाखों रुपये की होती है जीएसटी चोरी, पहले भी पकड़े जा चुके मामले
आर्टिफिशियल चांदी के गहने खास तौर से राजकोट राजकोट (गुजरात) में तैयार होते हैं। भोपाल, सागर, ललितपुर, झांसी, ग्वालियर, आगरा में हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। इस पर लगने वाले करीब तीन प्रतिशत जीएसटी को बचाने के लिए सराफा कारोबारी इन लोगों की मदद लेते हैं। यह लोग चांदी के गहने बिना किसी कागज के इन जनपदों तक सराफा कारोबारियों को पहुंचाने हैं। आने-जाने में ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। जीआरपी एवं आरपीएफ की निगाह से बचने के लिए जनरल अथवा स्लीपर कोच में सफर करते हैं। इसके पहले भी इस तरह से तस्करी के मामले पकड़े जा चुके। 5 मार्च 2025 में समता एक्सप्रेस के जनरल कोच से झांसी लाए जा रहे 90.5 किलो चांदी के जेवर बरामद हुए। इसके साथ ही पांच किलो पायल भी मिली थी। यह चांदी भी झांसी एवं आगरा ले जाई जा रही थी। इसके पहले मई 2024 में झांसी रेलवे स्टेशन पर 24 किलो चांदी और पांच लाख रुपये से अधिक नकदी पकड़ी गई थी। यह चांदी झांसी से खरीदकर आगरा ले जाई जा रही थी। अप्रैल 2026 में भी उत्कल एक्सप्रेस में 7.286 किलो चांदी की पायल पकड़ी गईं थी। यह चांदी भी राजकोट के रास्ते झांसी लाई जा रही थी। जीआरपी अफसर भी मानते हैं कि ट्रेन के माध्यम से चांदी की तस्करी होती है।