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Jhansi News: चार साल से सरकारी गनर लेकर चल रहा था आशीष, अब व्हाट्स एप कॉल खंगाल रही पुलिस
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सट्टा गिरोह के सदस्य के तौर पर गिरफ्तार हुआ भाजपा किसान मोर्चा का कोषाध्यक्ष आशीष उपाध्याय पिछले करीब चार साल से सरकारी गनर के सहारे रौब गांठता फिर रहा था। हालांकि गनर के लिए हर माह 1.14 लाख रुपये चुकाता था। इस गनर की हनक की बदौलत सरकारी एवं निजी कार्यक्रम में तरजीह मिलती थी। पुलिस उसके पास मिले मोबाइल को भी खंगाल रही है। पुलिस की निगाह खास तौर से उसके साथ वित्तीय लेनदेन करने वालों पर है। पुलिस उसके मोबाइल के व्हाट्स एप कॉल का रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है।
बजरिया निवासी शुभम उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद ही आशीष सरकारी गनर छोड़कर दिल्ली भाग निकला था। नई दिल्ली स्थित एक प्रदेश के राजकीय भवन में उसने पनाह ले रखी थी। पनाह दिलाने में एक वरिष्ठ अफसर की भी भूमिका सामने आई। शुक्रवार को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आशीष से काफी देर पूछताछ की। इस दौरान उसने कई राज उगले। पैसों का लेनदेन जानने में भी पुलिस कामयाब रही। सबसे अहम सुराग पुलिस को उसके मोबाइल से मिले। कई डिजिटल साक्ष्य मिले। आशीष के मोबाइल में व्हाट्स एप के अलावा सिग्नल एप मिला है। सिग्नल एप में कई सारी चैट डिलीट है। पुलिस इसे रिस्टोर कर रही है। आशीष फेस टाइम का इस्तेमाल बात करने के लिए करता था।
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बजरिया निवासी शुभम उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद ही आशीष सरकारी गनर छोड़कर दिल्ली भाग निकला था। नई दिल्ली स्थित एक प्रदेश के राजकीय भवन में उसने पनाह ले रखी थी। पनाह दिलाने में एक वरिष्ठ अफसर की भी भूमिका सामने आई। शुक्रवार को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आशीष से काफी देर पूछताछ की। इस दौरान उसने कई राज उगले। पैसों का लेनदेन जानने में भी पुलिस कामयाब रही। सबसे अहम सुराग पुलिस को उसके मोबाइल से मिले। कई डिजिटल साक्ष्य मिले। आशीष के मोबाइल में व्हाट्स एप के अलावा सिग्नल एप मिला है। सिग्नल एप में कई सारी चैट डिलीट है। पुलिस इसे रिस्टोर कर रही है। आशीष फेस टाइम का इस्तेमाल बात करने के लिए करता था।
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