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Jhansi News: किताबें हाथ में, राह में रपटा... बच्चों की जान हथेली पर
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊरानीपुर। हाथों में किताबें और आंखों में पढ़ने का सपना...लेकिन स्कूल पहुंचने की राह में बच्चों को नदी का बहाव पार करना पड़ रहा है। मऊरानीपुर तहसील के ग्राम खनुआ में शंकरलाल माध्यमिक विद्यालय जाने वाले करीब 80 बच्चों की राह में दुडेरी नदी का रपटा सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। बारिश के बाद नदी का पानी रपटे के ऊपर से बह रहा है। इसके बावजूद बच्चे इसी पानी के बीच से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। व्यवस्था की इस बेबसी में बच्चों की जान हर दिन खतरे में पड़ रही है।
ग्राम खनुआ स्थित विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। यहां 125 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें करीब 80 बच्चे खदरका गांव के हैं। इन बच्चों को विद्यालय पहुंचने के लिए दुडेरी नदी पर बने रपटे को पार करना पड़ता है। बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से रपटे के ऊपर से पानी बह रहा है।
पानी का बहाव होने के बावजूद बच्चे जैसे-तैसे रपटा पार करते हैं। छोटे बच्चे एक-दूसरे का हाथ थामकर पानी के बीच कदम बढ़ाते हैं। कई बार ग्रामीण उन्हें पीठ पर बैठाकर रपटा पार कराते हैं। पानी का बहाव बढ़ने पर जरा सी चूक बच्चों को बहाव में खींच सकती है। यही वजह है कि बच्चों के साथ अभिभावकों की चिंता भी बढ़ी हुई है।
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ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में बच्चों को इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है। लंबे समय से रपटे की जगह ऊंचे पुल के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि पढ़ाई के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
पानी बढ़ा तो स्कूल न आने की हिदायत
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार गुप्ता ने बताया कि रपटे के ऊपर से पानी बहने पर बच्चों को विद्यालय न आने के लिए कहा गया है। हालांकि, ग्रामीणों के मुताबिक विद्यालय तक पहुंचने का सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है।
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रपटे के ऊपर से बहते पानी के बीच बच्चों के विद्यालय जाने का मामला सामने आया है। तत्काल प्रभाव से इस मार्ग को बंद कराया जाएगा। बच्चों को पानी से होकर न जाना पड़े, इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे। -मनोज कुमार भारती, उपजिलाधिकारी, मऊरानीपुर
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मऊरानीपुर। हाथों में किताबें और आंखों में पढ़ने का सपना...लेकिन स्कूल पहुंचने की राह में बच्चों को नदी का बहाव पार करना पड़ रहा है। मऊरानीपुर तहसील के ग्राम खनुआ में शंकरलाल माध्यमिक विद्यालय जाने वाले करीब 80 बच्चों की राह में दुडेरी नदी का रपटा सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। बारिश के बाद नदी का पानी रपटे के ऊपर से बह रहा है। इसके बावजूद बच्चे इसी पानी के बीच से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। व्यवस्था की इस बेबसी में बच्चों की जान हर दिन खतरे में पड़ रही है।
ग्राम खनुआ स्थित विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। यहां 125 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें करीब 80 बच्चे खदरका गांव के हैं। इन बच्चों को विद्यालय पहुंचने के लिए दुडेरी नदी पर बने रपटे को पार करना पड़ता है। बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से रपटे के ऊपर से पानी बह रहा है।
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पानी का बहाव होने के बावजूद बच्चे जैसे-तैसे रपटा पार करते हैं। छोटे बच्चे एक-दूसरे का हाथ थामकर पानी के बीच कदम बढ़ाते हैं। कई बार ग्रामीण उन्हें पीठ पर बैठाकर रपटा पार कराते हैं। पानी का बहाव बढ़ने पर जरा सी चूक बच्चों को बहाव में खींच सकती है। यही वजह है कि बच्चों के साथ अभिभावकों की चिंता भी बढ़ी हुई है।
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ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में बच्चों को इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है। लंबे समय से रपटे की जगह ऊंचे पुल के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि पढ़ाई के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
पानी बढ़ा तो स्कूल न आने की हिदायत
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार गुप्ता ने बताया कि रपटे के ऊपर से पानी बहने पर बच्चों को विद्यालय न आने के लिए कहा गया है। हालांकि, ग्रामीणों के मुताबिक विद्यालय तक पहुंचने का सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है।
रपटे के ऊपर से बहते पानी के बीच बच्चों के विद्यालय जाने का मामला सामने आया है। तत्काल प्रभाव से इस मार्ग को बंद कराया जाएगा। बच्चों को पानी से होकर न जाना पड़े, इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे। -मनोज कुमार भारती, उपजिलाधिकारी, मऊरानीपुर